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थ्री स्टार रनिंग रूम की बेहतर सुविधा, बाप रे बाप…. शिकायत कर पानी की टंकी में सफाई कराई, निकले मृत कीड़े, कबूतर व छिपकली

फ़ोटो- टंकी के अंदर जमा गंदगी।

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रतलाम रनिंग रूम की थ्री स्टार सुविधा की धरातल पर कितनी सच्चाई हैं, इसका आंदाज ऐसी चेम्बर में बैठकर नहीं लगाया जा सकता है। बल्कि जिम्मेदार अफ़सर द्वारा समय-समय पर बारिकी से मौका मुआयना करना जरूरी होता है। रनिंग रूम की अनदेखी के भी यहीं हाल है। यहां कर्मचारियों की शिकायत पर पानी की टंकी की सफाई करवाई गई। इसे देखकर संभव है कि कोई यहां के पानी का कभी उपयोग ही न करे। टंकी की सफाई करने पर इसमें अंदर मृत कीड़े, कबूतर, मकड़ी तथा छिपकली निकली। कर्मचारियों ने इसके फ़ोटो भी बनाए। लेकिन भयवश वे अधिकारियों तक नहीं भेज पाए। क्योंकि वे केवल ठेकेदार के प्रभाव व बात को ही सच्चा मानेंगे।

बता दें कि ट्रेनों में सैकड़ों किलोमीटर की रनिंग कर गार्ड-ड्राइवर कर्मचारी रनिंग रूम में रेस्ट करते है। इनकी वर्किंग  सेफ़्टी व यात्रियों के सुरक्षित सफर से जुड़ी रहती है। इसलिए रेल मंत्रालय व रेलवे बोर्ड द्वारा इनके ठहरने के दौरान सुविधाओं पर करोड़ों रुपए सालाना खर्च किया जा रहा है।

फ़ोटो-सफाई के अभाव में टंकी के हालात। आसपास जमी काई।

दरअसल कर्मचारियों का कहना है कि रनिंग स्टाफ रतलाम में भोजन बाहर से लेकर बनवाने के बाद भी बीमार क्यों हो रहा है। दो दिन पहले टंकियों की खुद ही जांच की। जिसमें मरे हुए कीड़े, मकड़ियां, कबूतर व छिपकलियां पाई गई। हमने रनिंग रूम इंचार्ज को सूचना दी। इसके बाद सीएलआई कुलदीप को तुरंत अवगत कराया गया। फ़ौरन ही टंकी सफाई के आदेश दिए गए। नए रनिंग रूम का यह मामला है। ऐसे ही सभी टंकियों के यही हाल होंगे। मामले में रेलवे पीआरओ खेमराज मीणा से पक्ष लेना चाहा, लेकिन उन्होंने हमेशा की तरह जिम्मेदारी से दूर रहते फोन रिसीव नहीं किया।
बता दें कि रनिंग रूम का 3 करोड़ 33 लाख रुपए में हुआ है। रेलवे और भी मोटी राशि खर्च कर रहा है। बावजूद इसका कर्मचारियों को कितना लाभ मिल रहा यह पानी जैसी प्राथमिक सुविधा से अंदाजा लगाया जा सकता हैं।

फ़ोटो:- रतलाम रनिंग रूम में टंकी की सफाई में निकला मृत कबूतर।

आपको को यह भी बता दें कि रनिंग रूम में बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पिछले साल दक्षता शील्ड का पुरस्कार भी मिला। इन हालातों को देखते जीएम अवॉर्ड के चयन के आधार पर भी सवाल खड़े होने लगे है।

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