-मामला रेलवे सीएलआई की रिकवरी माफ करने सबंधित आदेश का।
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रतलाम मंडल के मुख्य लोको निरीक्षक (सीएलआई) की लाखों रुपए की रिकवरी में रेलवे बोर्ड द्वारा राहत रेल प्रशासन की परेशानी बढ़ा सकती है। दरअसल इस आदेश को आधार मानते हुए रिकवरी के मामले में अन्य कर्मचारी भी रेल प्रशासन को दोबारा आवेदन देने सहित कोर्ट के दरवाजे खटखटाने की तैयारी में जुट गए है।
बता दें कि एक-एक सीएलआई कर्मचारी का 40 से 50 लाख की कटौती का यह मामला है।

इसमें राहत दिलाने में वेस्टर्न रेलवे एम्प्लाइज यूनियन की भूमिका बताई गई है। मंडल अध्यक्ष ह्रदेश पांडे ,मंडल मंत्री मनोहर सिंह बारठ मंडल कोषाध्यक्ष शैलेश तिवारी की माने तो वर्ष 2020 से मुख्य लोको निरीक्षक के पे फिक्सेशन में विसंगतियों को लेकर रतलाम मंडल के मंडल रेल प्रबंधक से लेकर मुख्यालय महाप्रबंधक व रेलवे बोर्ड तक वार्ता के माध्यम से मुद्दा उठाया गया। मुख्य लोको निरीक्षक 1998 से आज दिनांक तक मुख्य लोको निरीक्षक बने हैं। उनकी बेसिक को कम करने के लिए नियमित प्रशासन 13 से अधिक निरीक्षक को नोटिस दे चुके थे। रतलाम रेल प्रशासन ने अध्ययन कर सभी के पेपर फिक्सेशन सुधारे है। जो निरीक्षक सेवानिवृत्ति भी हो चुके थे उनका भी भुगतान नहीं हो पा रहा था। जिसमें रामप्रकाश शाक्यवार, बद्रीनारायण, भूपेंद्र लोहार, मनवर सिंह, शरद गौतम, राजकुमार ऐसे कर्मचारी है, जो सेवा निवृत्ति हुए, तब से भुगतान रोक रखा था। 2 सितंबर को सभी का फिक्सेशन सुधार कर पत्र जारी किया गया।
एक दर्जन से अधिक कर्मचारियों की सुध नहीं:- इधर पे फिक्सेशन से जुड़ी विसंगतियों तथा गणना निर्धारण में त्रुटियों के चलते रेल प्रशासन द्वारा अन्य कर्मचारियों को भो नोटिस भेजे है। ऐसे एक दर्जन से अधिक कर्मचारी है, जिन्हें रिकवरी के आदेश जारी किए। इनके रिटायर्ड होते ही उनकी सुख के अवसर को परेशानी में तब्दील कर दिया जाएगा। इसमें ऐसे कर्मचारी भी है जो रिटायर्ड हो चुके है।
मामले ही मामले में रिटायर्ड डिप्टी सीटीआई अनिल उपाध्याय का कहना है कि कुछ कर्मचारियों ने कोर्ट की शरण ली है। जबकि वे स्वयं सीएलआई मामले को आधार मानकर कोर्ट में जाएंगे।
रिटायरमेंट के आखरी तीन साल के नियम का पालन नहीं:- हालांकि सीएलआई में रिकवरी वरिष्ठता व कनिष्ठता के पे फिक्सेशन की त्रुटि का मामला है। जबकि अन्य मामले में वेतनवृद्धि में गणना त्रुटि से जुड़ा मसला है। हाल ही में कंट्रोल में कार्यरत एसएंडटी विभाग, कमर्शियल क्लर्क सहित एमी कई ऐसे मामले है। जिन्हें त्रुटिवश भुगतान होने तथा रिकवरी करने संबंधी नोटिस थमाया है। कुछ कर्मचारी ने तो बोर्ड के ही सर्कुलर को आधार मानकर कोर्ट की शरण ली है। बोर्ड के ही नियम से कर्मचारी के रिटायरमेंट के आखिरी तीन साल के अंतराल में कोई कटौती नहीं की जा सकती है। मामले में जनसंपर्क विभाग का कहना है कि आदेशों में मामलों में नियमों को ध्यान में रखा जाता है।
