-गुजरात एसीबी द्वारा पश्चिम एक्सप्रेस में जाल बिछाकर डिप्टी सीटीआई को दबोचने का मामला
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। पश्चिम एक्सप्रेस में 200 रुपए घूंस लेने के आरोप में धराए रतलाम मंडल हेड क्वार्टर के डिप्टी सीटीआई अनिल कौशल को शुक्रवार कोर्ट में पेश किया गया। लेकिन इसे बेल नहीं दी गई। ऐसे में अब डिप्टी सीटीआई को बेल के लिए सोमवार कोर्ट खुलने तक इंतज़ार करना पड़ेगा। हालांकि बताया जा रहा कि कोर्ट द्वारा एसीबी को कस्टडी नहीं दी गई।
पश्चिम एक्सप्रेस के एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) की कार्रवाई के बाद रेलवे की जोनल विजिलेंस की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
बता दें कि गुरुवार को एसीबी गुजरात की टीम ने जाल बिछाकर पश्चिम एक्सप्रेस में डिप्टी सीटीआई अनिल कुमार कौशल को 200 रुपए की रिश्वत लेते पकड़ा था। यह कार्रवाई पश्चिम एक्सप्रेस में जनरल टिकट पर एस-2 स्लीपर कोच में सीट देने के बदले अवैध वसूली को लेकर की गई है।
एसीबी की कार्रवाई को लेकर दिनभर चर्चाएं व कयास:- ट्रेन में विजिलेंस के बजाय एसीबी द्वारा कार्रवाई को लेकर रतलाम में दिनभर चर्चाओं का माहौल रहा। कयास लगाए गए कि एसीबी को टीटीई के बारे में कैसे भनक लगी होगी।
दरअसल एसीबी को शिकायत मिली कि सूरत से मुंबई जाने वाली ट्रेनों में नवसारी, बिलिमोरा, वलसाड और वापी जाने वाले यात्रियों से टीटीई द्वारा चेकिंग के दौरान स्लीपर कोच के टिकट के अभाव में अवैध वसूली की जाती है। भनक यह भी लगी कि रिजर्वेशन कोच में हर यात्री से 200 से 500 रुपए तक वसूले जा रहे हैं।
शिकायत को सत्यापित करने के लिए एसीबी PI/BL जेआर गामित एवं एसीबी/डांग की टीम डिप्टी एसपी आरआर चौधरी के निर्देशन में 28.08.2025 को सूरत रेलवे स्टेशन से ट्रेन नं. 12926 पश्चिम एक्सप्रेस के कोच नंबर एस-2 में सवार हुई थी। कोच एस-1 से इस-6 में तैनात ऑन ड्यूटी डिप्टी सीटीआई अनिल कुमार कौशल द्वारा टिकट चेक की गयी। टीम के पास सामान्य कोच का टिकट था।
स्लीपर कोच की सीट के बारे में पूछने पर कौशल ने टिकिट के पीछे कोच, सीट नंबर लिखकर दिया। बदले में 200 रुपए की मांग की। डिप्टी सीटीआई कौशल को अंततः सूरत स्टेशन से जनरल टिकट पर इस-2 कोच में सीट देने के बदले 200 रुपए की रिश्वत लेते हुए टीम ने हिरासत में ले लिया। इसे टीम वलसाड स्टेशन पर उतारकर एसीबी ऑफिस ले गई।
पश्चिम रेलवे मुख्यालय में ही विजिलेंस का भय नही:- पश्चिम एक्सप्रेस में एसीबी की कार्रवाई को लेकर विजिलेंस की भूमिका पर सवाल खड़े होने लगे है। दरअसल मुंबई-दिल्ली की वर्किंग में टिकिट चेकिंग स्टाफ को कभी मुंबई की ओर विजिलेंस का ख़ौफ़ रहता था। लेकिन मुंबई की ट्रेनों में चेकिंग कर्मचारी बेख़ौफ़ 200 से 500 रुपए की रिश्वत ले रहे है। इसमें मेलजोल की भी आशंका है।
इसलिए भी बेख़ौफ़ कर्मचारी
-अनुशासनहीनता या अन्य मामला उजागर होने के बाद संबंधित टीटीई पर विभाग द्वारा प्रश्रय दिए जाने के चलते ठोस कार्रवाई न करना।
-दशक पहले भी पश्चिम एक्प्रेस में ही टीटीई का विजिलेंस केस बना था। तब भी टीटीई ने खूद पर कार्रवाई व विभागीय दंड की भी मेलजोल से भरपाई करवा ली थी।
– मथुरा के आसपास विजिलेंस इंस्पेक्टर वत्स ने ईएफटी में हैराफेरी कर वसूली से कम राशि दर्ज करने को लेकर टीटीई को पकड़ा था। बाद में इसका राजकोट मंडल में निचले पद ग्रुप डी में इंटरडिवीजन तबादला कर दिया था। कुछ दिनों ग्रुप डी में काम करने के बाद इसे जूनियर टीसी बना दिया गया। कुछ समय में ही टीटीई ने रतलाम तबादला करवा लिया था।
-यहां जूनियर टीसी रहते दोबारा उसे ईएफटी थमा दी गई। इसके बाद भी यहां संबंधित टीटीई का दो बार विजिलेंस केस बना।
-सीटीआई स्लीपर मोहन जोशी से मारपीट के मामले में डिप्टी सीटीआई विजेंद्र बैरवा को निलंबित करने के चंद दिनों में ही ड्यूटी दे दी गई।
-सैकड़ों किलोमीटर दूर उत्तराखंड अपने गृह नगर होने के बावजूद टीटीई ने ट्रेन में ऑन ड्यूटी दर्शा दी थी। इस मामले में कुछ माह की कार्रवाई के बाद दोबारा इसे ड्यूटी दे दी गई।
-पूर्व एडीआरएम के दिव्यांग माली के साथ दिव्यांग कोच में बदसलूकी करने वाले सीटीआई को शिकायत के बावजूद क्लीन चिट दिलवा दी गई।
-चार्जशीट सहित अन्य कार्रवाई के मामले के बावजूद टीटीई को मेन ऑफ दी मंथ पुरस्कार से नवाजा जा रहा। जबकि अर्निंग में अव्वल रहने वाले योग्य टीटीई पुरस्कार से वंचित किए जा रहे है।
