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तुनकमिजाज अफसर पर तुनक उठे लाल, रेलवे के विजय माल्‍या साहब, क्‍या कहने….। बड़े मिया तो…छोटे मिया सुभानअल्‍लाह

जलज शर्मा,
रेल इंज‍िन सुधरवाने वाले तुनकमिजाज अफसर इन दिनों एकाएक चर्चा में आ गए। हुआ यूं कि लाल झंडे वाले नेताओं के राडार पर आए तो इन्‍होंने अफसर को आड़े हाथ लेने में देर नहीं की। इसके पहले तिरंगे झंडे वाले संगठन के साथ बात बिगड़ी थी। तब बातचीत रिकॉर्ड की बात वायरल भी हो गई। बाद में लाल झंडे वालों की उलझन हुई। वह इसलिए कि इन नेताओं में से कारखाने के ही एक नेता की अफसर से कहासुनी हो गई। इसके बाद क्‍या था…। सभी जैसे स्ट्रेप्सिल्स गोली खाकर जा पहुंचे शेड वाले कारखाने। ताज्‍जूब की बात कि वहां नारेबाजी करने में किसी का गला भी खराब नहीं हुआ। जो ‘भूरा’ था, उसका चेहरा भी लाल हो गया।
हालांकि गला इतना खराब तो अफसर का भी नहीं है। कई बार वे हाथ में माइक लिए गाना गाकर साबित भी कर चुके है। लेकिन गुस्‍सा आते ही इनके सुर बिगड़ने लग जाते है। कुछ दिनों पहले अपनी ‘डीजल’ गाड़ी चलाने वाले ड्राइवर का भी इन्‍होंने बेंड बजा दिया। कॉलोनी वाली रेल पुलिस की चौकी पहुंचे और इन्होंने ड्राइवर की ही कर दी शिकायत। बेचारा ड्राइवर माफी मांगकर मामला रफा-दफा करने चौकी के चक्‍कर काटता फ‍िर रहा है।
हे प्रभु जगन्‍नाथम, बेचारे गरीब ड्राइवर का क्या कसूर, उल्टे उसने तो अफसर से गाली भी सुन ली। अब इसे पुलिस प्रकरण से बचाए। प्रभु, कर्मचारियों को अब इनके हाथों सीआर बिगाड़ने का भय सताने लगा है।

रेलवे के विजय माल्‍या साहब। क्‍या कहने….

भले ही विजय माल्‍या अपने शौक मिजाजी के लिए मशहूर रहे है। लेकिन रेलवे के एक साहब भी माल्‍या से कम नहीं है। बस अंतर एक ही है। विजय माल्‍या हवाई जहाज से एयरपोर्ट पर उतरते है। यहां वाले साहब ग्‍यारह नंबर की गाड़ी से सड़क मार्ग की रफ्तार से सीधे हवाई पट्टी पहुंचते है। वहां फिटनेस के लिए दौड़ लगाते हैं। माल्‍या को पेय का तो सा‍हब को खाद्य ‘मटेरियल’ का शौक है। वह भी केबिन में बैठकर… केवल ड्रायफुड चबाने का..। खेर, व्हाइट हेयर कट वाले असली माल्‍या तो माल्‍या रहे। उनकी रंगत अलग ही रही….। काम दिलाने के बदले उल्टे कमीशन बांटते थे।
प्रभु जगन्नाथ का इतना ही कहना है कि- “वक्त बर्बाद न बिन बात की बातों में कीजिये”….

कुंभ में डूबकी लगाने पहुंचे बड़े साहब

प्रयागराज कुंभ के दौरान अमृत स्नान का पुण्‍यलाभ लेने में श्रद्धालुओं का रेलवे बड़ा सहारा बनी है। कुछ ट्रेन बढ़ाई तो अब बढ़ती भीड़ को देखते रेलवे ने कुछ निरस्‍त करने का भी फैसला लिया है। इसी भीड़ व कुशल परिचालन प्रबंधन को सीखने रतलाम से भोले भंडारी कहे जाने वाले रेलवे के बड़े साहब भी कुंभ की ओर रवाना हुए है। बताते हैं कि ट्रेन परिचालन की तकनीक भी जानेंगे। इसलिए उनसे कुनबे में एक-दो साहब तो कुछ अर्दली भी साथ गए है। हालांकि ये इस तकनीकी प्रबंधन की आड़ में पुण्य की डूबकी भी लगा ही आएंगे। इधर, कुंभ में भले ही भीड़ चल रही है। लेकिन बड़े साहब की गैरमौजूदगी में मंडल कार्यालय में भीड़ कम कम दिखाई देने लगी है। टेबलों का लंच टाइम डीनर के बराबर हो चला है। वहीं लंच के बाद से पूरा टाइम ‘टी टाइम’ में तब्दील होने लगा है। नजारा देखना हो तो परिसर के बाहर की चाय होटलों पर जाइए, वहां आसानी से देखा जा सकता है।

बड़े मिया तो…छोटे मिया सुभानअल्‍लाह

रेलवे के छोटे मिया का इन दिनों बड़ा कमाल देखने को मिल रहा है। असल में कई बड़े साहब को चार पहिया वाहन की सरकार से सुविधा है। फ‍िर भी कुछ पैदल बंगले आ-जा रहे है। कुछ अधिकारी तो इस सुविधा का लाभ न लेकर बाइक से भी घर पहुंच रहे है। लेकिन छोटे मिया यानी सहायक कद के अफसरों को भी अब बड़ा बनने की जच गई है। इसलिए सरकारी वाहनों का उपयोग कर उन्‍होने बड़ा दिखना शुरू कर दिया है।
हालांकि ये भी हो सकता है कि बड़े साहब की गाड़ियों में बच्‍चों को स्कूल जाते देख इनका भी मन मचला हो। और शुरू कर दिया सरकारी वाहनों का उपयोग।
हे प्रभु, जगन्नाथम इन्हें कौन समझाए कि सरकार की निगाहें पड़ी तो सुविधाओं पर ग्रहण लगने में देर नहीं लगेगी।

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