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अमानवीयता के खिलाफ आक्रोश…रनिंग ड्यूटी पर गए लोको पायलट को डेथ मैसेज देना था, कंट्रोल से टालमटोल कर घंटों देरी से दी सूचना, ताबड़तोड़ परिवार सड़क मार्ग से भोपाल निकला, रास्ते में भिड़ गई कार

-घटना से आक्रोशित लोको पायलट कर्मचारियों ने अधिकारी के खिलाफ नारेबाजी कर डीआरएम को की शिकायत।
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रेलवे लोको पायलट के साथ हुई घटना के बाद डीआरएम ऑफिस में सोमवार को लोको पायलट कर्मचारियों ने सीनियर डीईई टीआरओ के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। दरअसल ट्रेन वर्किंग पर निकले लोको पायलट वसीम गौरी के परिवार के गमी हो गई थी। घरवालों द्वारा लॉबी में मैसेज देने तथा लाख प्रयास के बाद भी लोको पायलट को सूचना नहीं दी। जब बीच के स्टेशन पर मैसेज किया तो तब तक देर हो चुकी थी। आखरी विकल्प में लोको पायलट डयूटी ऑफ कर परीजनों सहित ताबड़तोड़ कार से निकले तो भोपाल के रास्ते एक्सीडेंट हो गया। विभाग की इस लापरवाही के आक्रोशित लोको पायलट कर्मचारियों ने अधिकारी सीनियर डीईई टीआरओ के खिलाफ रतलाम मंडल कार्यालय में नारेबाजी की। बाद में डीआरएम से मुलाकात कर उन्हें अमानवीय व्यवहार शिकायत दर्ज कराई।

लोको पायलट के घर से 15 फरवरी को दे दिया मैसेज:- कर्मचारियों ने डीआरएम अश्वनी कुमार को बताया कि लोको पायलट वसीम गौरी के घर से 15 फरवरी रात में 11 बजे डेथ केस का मैसेज लॉबी को दिया गया था। उस समय गौरी रतलाम से उज्जैन गाड़ी वर्क कर रहे थे। लॉबी के द्वारा ये मैसेज डीआरएम ऑफिस स्थित कंट्रोल में पीसीआर (पावर कंट्रोलर) को नोट करवाया गया। कुछ समय पश्चात गौरी के घर से पुनः लॉबी से कॉल पर संपर्क करने का प्रयास किया गया। लेकिन लॉबी से कॉल उठना बंद कर दिया गया। उसके पश्चात उनके घर से सीधे पीसीआर से संपर्क किया गया। तब पीसीआर का कहना था कि हमें ऐसा कोई मैसेज लॉबी से नोट नहीं करवाया गया है। बाद में फिर से पीसीआर को डेथ केस का मैसेज नोट करवाया गया। मैसेज की इस प्रकिया में रात के
1.50 बज गए। बाद में उन्हेल स्टेशन पर गौरी को स्टेशन मास्टर द्वारा बोला गया कि आप पीसीआर से बात कर लीजिए। बात करने पर उन्हें डेथ केस का पता चला। पीसीआर ने बोला कि कंट्रोलर से बात हो गई है। आपको जल्दी ही उज्जैन पहुंचा कर पहली पैसेंजर ट्रेन से रतलाम ले आया जाएगा। परंतु उन्हेल में ही उनकी गाड़ी को खड़ा रख कर 3 गुड्स ट्रेन को निकला गया, फिर चलाया गया। उसके बाद फिर से असलावदा स्टेशन पर गाड़ी को खड़ा किया गया। वहां फिर से 2 गुड्स ट्रेन और 1 पैसेंजर ट्रेन को निकली, इसके बाद चलाया गया। उज्जैन आउट साइड रोककर रतलाम की पैसेंजर ट्रेन को निकाल दिया गया। फिर वो वहां से गुड्स ट्रेन से रतलाम पहुंचे। रतलाम में 06.50 पर ऑफ ड्यूटी हुई।

सीहोर के पास आष्टा में भिंडी कर:-कर्मचारियों का कहना है कि लोको पायलट गौरी की भोपाल जाने की सभी ट्रेन निकल चुकी थी। इसलिए वो अपने निजी वाहन कार से सुबह 07.15 भोपाल के लिए निकले। भोपाल पहुंचने से पहले सीहोर के पास आष्टा में उनकी कार का एक्सीडेंट हो गया। कार में उनकी पूरी फैमिली बैठी हुई थी। एक्सिडेंट में सभी को चोट आई है। गनीमत है कि कोई जनहानि नहीं हुई सभी सुरक्षित है। यदि प्रशासन अपना कार्य सही से यह घटना नहीं होती।

वाट्सएप ग्रुप पर ऐसे मैसेज (हूबहू), जताया आक्रोश:-एक तरफ कंट्रोलर अपनी मनमानी कर रहा है। नित प्रतिदिन 11-12 घंटे की नौकरी के बाद भी वह क्रू के साथ अमानवीय व्यवहार कर रहा है। पिछले दिनों जो घटना घटित हुई, वह कोई पहली घटना नहीं है। उन्हें सिर्फ और सिर्फ गाड़ी चलने से मतलब है। आपके तथा आपके परिवार के दुख दर्द से कोई वास्ता नहीं है।
इसके साथ साथ हमारे Sr DEE (TRO) साहब के नित प्रतिदिन नए नए आदेश आ जाते हैं। अपना TRO विभाग तो ऑपरेटिंग का गुलाम बन कर रह गया है। ऊपर से नीचे तक के लोग सिर्फ उनकी जी हुजूरी में ही लगे रहते हैं। रतलाम का रनिंग स्टाफ बहुत ही भोला है। जो इनके हर अमानवीय आदेशों को भी दिल पर पत्थर रखकर मान लेता है। अब आपके घर पर चाहे कोई मर भी जाए,तो भी आपको रनिंग रूम में आराम करना है। क्योंकि बगैर 06-08 घंटे रेस्ट किए आपका TA ही नहीं बनेगा, और उस समय भी उस लॉबी की ही मर्जी चलेगी।
अब तो प्रशासन को सीधे सीधे यह कर देना चाहिए कि सभी रनिंग स्टाफ के परिवार जनों को जहर दे दें। सारी झंझट ही खत्म हो जाएगी।
कल की घटना में यदि कंट्रोलर इंसान होता तो जब उसे जानकारी मिली,वह तुरंत उस गाड़ी को उसी स्टेशन पर स्टेबल करवा देता। उस लोको पायलट को पहली गाड़ी से रतलाम भेज देता।लेकिन दुर्भाग्य है कि रतलाम के कंट्रोलरों में मानवता ही नहीं बची है। आईसीआर भी उन्हीं की गुलामी करता है।
अब आज की स्थिति में अनुरोध है कि कोई भी रनिंग स्टाफ रेस्ट कैंसल में गाड़ी नहीं जाए और न ही कंटिन्यूशन में गाड़ी ले आए। +WORK TO RULE+ लागू कर दो। अगर मेमो मिला तो आपकी क्षमता के अनुसार 11 घंटे, वरना 09 घंटे में गाड़ी बंद कर दो।

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