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रतलाम की नाती ढाई साल की बेटी आर्या का विश्व रिकॉर्ड….बगैर हांफे तिरंगा लिए नेपाल के एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंची

-हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण: दुनिया में सबसे कम उम्र का रिकॉर्ड अपने नाम किया।

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम/उदयपुर। राजस्थान की आर्या सिखवाल ढाई साल की उम्र में नेपाल के एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंचने वाली दुनिया की सबसे छोटी बेटी बन गई हैं। उनके माता-पिता सौरव और नेहा सिखवाल पूरे ट्रैक के दौरान उनके साथ रहकर हौसला बढ़ाते रहे।
बता दें कि आर्या का ननिहाल रतलाम है। इसके पिता सौरभ सखवाल रिटायर्ड बिजली इंजीनियर महेंद्र व्यास व बैंक एसोसिएशन के तरनी व्यास परिवार के दामाद व मां नेहा बेटी है।
परिवाजनों ने बताया कि आर्या की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नेपाल के अधिकारियों से विशेष अनुमति ली गई थी। ट्रैक को तीन अंतरराष्ट्रीय योग्य शेरपा, एक डॉक्टर, ऑक्सीजन समर्थन और आपातकालीन स्थिति में हर घंटे हेलीकॉप्टर बचाव के साथ पूरी तरह सपोर्ट किया था। सौभाग्य से बहादुर आर्या को इनमें से किसी भी आपातकालीन सहायता की आवश्यकता नहीं पड़ी। उनके ऑक्सीजन स्तर पूरे ट्रैक के दौरान समूह के वयस्कों से अधिक बने रहे। आर्या इस अभियान से पहले पांच महीने तक प्रशिक्षण में थीं और इस दौरान कई विश्व रिकॉर्ड तोड़े।
आर्या के पिता सौरव सिखवाल ने कहा कि मेरे पिछले एवरेस्ट बेस कैंप ट्रैक के दौरान मैंने कई बच्चों को देखा, लेकिन कोई भी भारतीय नहीं था। इसने मुझे अपनी बेटी को दुनिया में सबसे छोटी उम्र में ईबीसी तक पहुंचने के लिए प्रशिक्षित करने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान प्रमुख गांवों से पहले चिकित्सा जांच बिंदु थे। हमने आर्या के स्वास्थ्य की नियमित जांच की और वह हमसे बेहतर अनुकूलित थी। उनके ऑक्सीजन स्तर समूह के किसी भी वयस्क से बेहतर थे। हमने उनकी आराम के लिए कई बार ब्रेक लिया और उनकी ऊँचाई के साथ अनुकूलन के लिए रोज़ाना फुटबॉल खेला।
वहीं आर्या की मां नेहा बताती हैं कि
हमने पिछले पांच महीनों से इस ट्रैक के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से तैयारी की थी। उदयपुर के ट्रैक ने हमें ईबीसी के लिए प्रशिक्षित करने में मदद की। आर्या की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता थी। हमने इसे संभव बनाने के लिए सभी संभव कदम उठाए।

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