राहत मिली लेकिन उलझन बरकरार….इंदौर रेलवे हॉस्टल बंद करने के आदेश पर कर्मचारी नेताओं के साथ DRM से मिले बच्चे, दिसंबर 2026 तक रोका मामला
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। इंदौर में रेलवे कर्मचारियों के बच्चों की पढ़ाई के लिए संचालित रेलवे छात्रावास (हॉस्टल) को बंद करने और इसे खाली कराने के आदेश के बाद मामला अभी भी उलझन में है। आदेश से प्रभावित बच्चे सोमवार को रतलाम पहुंचे। इन्होंने वेस्टर्न रेलवे मजदूर संघ के पदाधिकारियों के साथ डीआरएम अश्वनी कुमार तथा सीनियर डीपीओ सोमनाथ गायकवाड़ से मुलाकात की। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर बच्चों को फिलहाल दिसंबर 2026।तक हॉस्टल में रहने की राहत दे दी गई है। लेकिन इसके बाद अपनी पढ़ाई और रहने की व्यवस्था को लेकर छात्र और उनके अभिभावक बेहद चिंतित हैं।

शैक्षणिक सत्र के बीच में नोटिस से बढ़ीं मुश्किलें:- विद्यार्थियों के चालू शैक्षणिक सत्र के बीच अचानक नोटिस जारी कर हॉस्टल खाली करने के आदेश को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया जा रहा है। विरोध कर रहे रेलवे संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय लेने से पहले न तो कर्मचारियों की व्यावहारिक समस्याओं पर ध्यान दिया गया। न ही वर्षों से वहां रहकर पढ़ाई कर रहे बच्चों के भविष्य की चिंता की गई। अधिकारियों से चर्चा के वक्त मंडल मंत्री अभिलाष नागर, सहायक मंडल मंत्री नरेंद्र सिंह सोलंकी, सहायक मंडल मंत्री योगेश पाल सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
आर्थिक रूप से कमजोर कर्मचारियों पर सीधा असर:- पश्चिम रेलवे मजदूर संघ ने रेल प्रशासन पर आरोप लगाया है कि कर्मचारियों के कल्याण के लिए बनाई गई सुविधाओं को एक-एक कर समाप्त किया जा रहा है।
महंगाई का बोझ:- इंदौर जैसे शहर में ग्रुप ‘डी’ और निम्न आय वर्ग के कर्मचारियों के लिए निजी हॉस्टल या किराए का कमरा लेना आर्थिक रूप से बेहद कठिन है।
कल्याणकारी छवि पर चोट:- पदाधिकारियों का तर्क है कि यदि कोई प्रशासनिक समस्या है। तब उसका समाधान निकाला जाना चाहिए। न कि बच्चों के सिर से छत छीनकर अन्य सुविधा का विस्तार करना उचित है। यह फैसला रेलवे की कल्याणकारी छवि को धूमिल करता है।

छात्रों की सुविधा के लिए प्रमुख मांगें
सत्र पूरा होने तक राहत:- वर्तमान शैक्षणिक सत्र समाप्त होने तक हॉस्टल को यथावत संचालित रखा जाए।
हितधारकों से चर्चा:- सत्र समाप्त होने के बाद ही सभी पक्षों (कर्मचारियों व संघ) से वार्ता कर कोई अंतिम निर्णय लिया जाए।
