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भ्रष्टाचार का नायब खेल….रिजल्ट शीट टेबल पर, गुपचुप हुआ चयनितों से संपर्क? डील पूरी होने पर ताबड़तोड़ लिस्ट जारी

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। असिस्टेंट लोको पायलट (एएलपी), एलडीसीई 50 प्रतिशत रेंकर कोटे के पदों के लिए हुई चयन प्रक्रिया में भले ही चयनितों की लिस्ट जारी कर ताबड़तोड़ ट्रेनिंग की तारीख तय कर ली। लेकिन इसमें आम से खास स्तर के जिम्मेदारों की मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है। भ्रष्टाचार व इसके लिए हुए नायब खेल की चर्चाएं केबिनों और सेक्शन से निकलकर बाहर तक आ पहुंची है। बताया जा रहा है कि असिस्टेंट लोको पायलट की परीक्षा में क्वेश्चन शीट से लेकर पूरी परीक्षा की प्रकिया में जरूर पारदर्शिता रही है। लेकिन इसके रिजल्ट शीट आने व इसे सार्वजनिक करने के बीच में ही डील की गई हैं…? जो अभ्यर्थी अपनी मेहनत से पास हुए। लिस्ट से ही नाम उठाकर उनके संपर्क किया गया। तब तक उन्हें रिजल्ट शीट को लेकर अंधेरे में रखा गया। पास करने की शर्त की बेवजह डील का उन्हें खामियाजा उठाना पड़ा।

ताबड़तोड़ फाइनल लिस्ट जारी करने पर संदेह, कर्मचारियों ने किया था विरोध:- असिस्टेंट लोको पायलट की परीक्षा की ताबड़तोड़ लिस्ट किए जाने को लेकर चयन से प्रभावित कर्मचारियों ने कई सवाल खड़े किए थे। आरोप लगाया था कि रेलवे बोर्ड के आदेश के विपरीत लिखित परीक्षा और साइको एप्टीट्यूड टेस्ट के अंक बताए बिना सीधे फाइनल पैनल घोषित कर दिया गया। कर्मचारियों ने मंडल रेल प्रबंधक अश्वनी कुमार को पत्र भी दिया था। इसके बावजूद रेलवे ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। उल्टें चयनित कर्मचारियों का प्रशिक्षण शुरू कर दिया गया है। बताया जा रहा कि इस भ्रष्टाचार में कार्मिक विभाग के एक अधिकारी की खास भूमिका रही है। रिजल्ट टेबल पर आने व सार्वजनिक करने से पहले एक सेक्शन के ही तृतीय श्रेणी कर्मचारी ने चयनितों से संपर्क करने सहित आर्थिक डील में मध्यस्थता करने की आशंका जताई जा रही है।

शंटिंग मास्टर का पैनल निरस्त करना बड़ी त्रुटि:- शंटिंग मास्टर-दो की परीक्षा को लेकर भी विवाद भी चर्चा में है। बताया जा रहा है कि पैनल के चयन में तकनीकी या प्रशासनिक खामियों के अलावा इसमें भी भ्रष्टाचार की बातें की जा रही है।
दरअसल रेलवे ने शंटिंग मास्टर परीक्षा का 1 अप्रैल को घोषित परिणाम को निरस्त कर दिया है। अब रेलवे यह परीक्षा दोबारा आयोजित करने की तैयारी में है। हालांकि जांच का ढिंढोरा पीटा जा रहा है। यहां से पदोन्नत तबादला होकर गए पूर्व एपीओ को भी पूछताछ के लिए बुलवाया गया। लेकिन इसकी लिप्तता विभाग के जिम्मेदारों के भलीभांति संज्ञान में है।

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