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ये कस्टमर नहीं, लेकिन रोज आती है रेस्टोरेंट, ऑनर खुद मां समझ करते नमन, फिर कराते है नाश्ता

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। वर्तमान दौर में स्वार्थ, अविश्वास व संवेदनहीनता चरम पर है। मूक प्राणियों की अनदेखी भी आमतौर पर देखी जाती है। ऐसे माहौल में रतलाम के एक रेस्टोरेंट मालिक व गौमाता के बीच अटूट विश्वास व प्रगाढ़ स्नेह का दृश्य मूक प्राणियों के प्रति दया मानवता के लिए बड़ा संदेश है।
दरअसल मूक प्राणी के प्रति आप थोड़ा सा स्नेह दर्शाओ तो वह आप पर भरोसा करते है। बल्कि भरपूर प्यार भी लुटाते है। ऐसा ही नज़ारा रतलाम शहर के अल्कापुरी चौराहा पर स्थित अपना रेस्टोरेंट पर लगभग रोज़ शाम को दिखाई देता है।


यहां रेस्टोरेंट मालिक ने दो साल पहले गौमाता को प्यार देना शुरू किया। तब मां-बेटे की भांति इनका नियमित मिलन प्रगाढ़ होता गया। हालात यह है कि गौमाता नियमित रूप से शाम को रेस्टोरेंट मालिक से मिलने चली आती है। इतना ही नहीं वह बेहिचक रेस्टोरेंट के अंदर तक प्रवेश करती है। इसे ज्यादा वास्ता नहीं कि रेस्टोरेंट पर भीड़ कितनी है। वह ग्राहकों के बीच बगैर किसी को नुकसान पहुंचाए, सिर नीचे कर सीधे काउंटर तक पहुंचती है। इसके बाद रेस्टोरेंट मालिक काउंटर से बाहर आकर बकायदा गौमाता को दुलार करते है। बल्कि अपने हाथ से इसे नाश्ता भी कराते है।


रेस्टोरेंट मालिक हितेश सोलंकी बताते है कि गौमाता रोज शाम के समय ही रेस्टोरेंट पर आती है। वह न तो कुक एरिया की ओर जाती, नहीं किसी खाद सामग्री को मुंह लगाती है। केवल दुकान के अंदर आकर काउंटर के नजदीक खड़ी हो जाती है। बाद में वे इसे अपने हाथों से खाने का देते है। तब कभी तो वह खाती है और कभी पीछे बाड़े में जाकर खड़ी हो जाती है। करीब एक एक घंटा रहने के बाद अपने नियत स्थान की ओर चल पड़ती है।
सोलंकी बताते है कि यह सिलसिला पिछले दो साल से चल रहा है। उन्हें यह पता नहीं कि गौमाता का मूल स्वामी कौन है।

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