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रतलाम माटी के कलाकार की कला का अवसान…प्रख्यात हारमोनियम एवं तबला वादक पंडित जितेन्द्र शर्मा का निधन

न्यूज़ जंक्शन-18

रतलाम/ भोपाल। शास्त्रीय संगीत जगत के वरिष्ठ हारमोनियम संगत कलाकार पंडित जितेन्द्र शर्मा का निधन संगीत क्षेत्र की अपूरणीय क्षति है। रतलाम की माटी से निकलकर अपनी प्रतिभा, कला और साधना से भोपाल में स्थापित हुए शर्मा ने अपनी मेहनत, अनुशासन और लगन से शास्त्रीय संगीत में संगत कलाकार के रूप में एक विशिष्ट स्थान प्राप्त किया।

शर्मा ने तबले की विधिवत शिक्षा श्रद्धेय गुरु स्व. भेरूलाल जी ‘रेडा साहब’ से प्राप्त की। रतलाम स्थित नभेंदु बनर्जी की ‘सप्तरंग’ सांस्कृतिक संस्था एवं गुजराती समाज संगीत विद्यालय में उन्होंने तबला वादन का प्रशिक्षण दिया। कालांतर में हारमोनियम को अपनाकर शर्मा ने संगत कला को नई परिभाषा दी।

प्रदेश के प्रतिष्ठित मंचों भारत भवन, उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी, रवीन्द्र भवन, हिंदी भवन, तानसेन समारोह से लेकर भारत सरकार द्वारा विदेशों में आयोजित सांस्कृतिक दलों, विद्यालयीन-महाविद्यालयीन कार्यक्रमों, नृत्य प्रस्तुतियों, सामाजिक आयोजनों, आकाशवाणी एवं दूरदर्शन पर उन्होंने उत्कृष्ट संगत से अपनी पहचान बनाई। वे आकाशवाणी एवं दूरदर्शन के ‘बी हाई ग्रेड’ कलाकार थे।

व्यक्तिगत जीवन में अत्यंत मिलनसार, गुरुजनों के प्रति श्रद्धावान और कनिष्ठ कलाकारों को प्रोत्साहित करने वाले शर्मा नवोदित से लेकर वरिष्ठ कलाकारों तक सभी में समान रूप से लोकप्रिय थे। भोपाल में उन्हें ‘सिद्ध हारमोनियम वादक’ के रूप में विशेष पहचान मिली, किंतु आवश्यकता पड़ने पर वे तबला संगत से भी पीछे नहीं हटते थे। उनकी सादगी और कला के प्रति समर्पण अनुकरणीय था।

कला-समीक्षकों के अनुसार उनकी थाप में गणित, हारमोनियम के सुर में कविता, बोलकारी और गायकी अंग का अद्भुत समन्वय था। जिसने उन्हें ‘कलाकारों का कलाकार’ बनाया। उनका निधन केवल एक व्यक्ति का नहीं, ‘संगत-शास्त्र’ के एक अध्याय का अवसान है।

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