शहर में कल्पवृक्ष का मिला प्रमाण, होगी मनोकामना पूरी….80 फ़ीट एरिया में दिखाई दिया विलक्षण कल्पवृक्ष, पर्यावरणविद ने की पुष्टि
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। पौराणिक व औषधीय महत्व के कल्पवृक्ष की रतलाम शहर में पहचान हुई है। हालांकि जिले में इस अद्भुत प्रजाति के चुनिंदा वृक्ष मौजूद है। 80 फीट रोड पर हाउसिंग बोर्ड की कॉलोनी के आगे सड़क किनारे हनुमान ताल की ओर यह कल्पवृक्ष पाया गया है। अभी तक इस अद्भुत कल्पवृक्ष की और किसी का ध्यान नहीं गया है। इसे पर्यावरणविद ने भी इसे प्रमाणित किया। इसके बाद इसे सहेजने की मांग उठने लगी है।
बता दें कि वेद और पुराणों में कल्पवृक्ष का उल्लेख मिलता है। कल्पवृक्ष स्वर्ग का एक विशेष वृक्ष है। पौराणिक धर्मग्रंथों और हिन्दू मान्यताओं के अनुसार यह माना जाता है कि इस वृक्ष के नीचे बैठकर व्यक्ति जो भी इच्छा करता है, वह पूर्ण हो जाती है। क्योंकि इस वृक्ष में अपार सकारात्मक ऊर्जा होती है।
रतलाम प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार एवं कर सलाहकार दिलीप पाटनी ने पर्यावरणविद् डॉ. खुशालसिंह पुरोहित को हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी एरिया में अपने साथ ले जाकर यह अद्भुत वृक्ष से रूबरू कराया। डॉ. पुरोहित ने भी इसे कल्पवृक्ष प्रजाति का होना प्रमाणित किया। डॉ. पुरोहित ने और पाटनी ने जिला प्रशासन, नगर निगम आयुक्त, महारपौर से मांग की है की इस अद्भुत बिरले कल्पवृक्ष जो कि अभी प्रारंभिक अवस्था में इसे सुरक्षित एवं संरक्षित किया जाए।
यह महत्व व वृक्ष की पहचान:- वृक्षों और जड़ी-बूटियों के जानकारों के मुताबिक यह एक बेहद मोटे तने वाला फलदायी वृक्ष है। जिसकी टहनी लंबी होती है और पत्ते भी लंबे होते हैं। दरअसल, यह वृक्ष पीपल के वृक्ष की तरह फैलता है और इसके पत्ते कुछ-कुछ आम के पत्तों की तरह होते हैं। इसका फल नारियल की तरह होता है, जो वृक्ष की पतली टहनी के सहारे नीचे लटकता रहता है। इसका तना देखने में बरगद के वृक्ष जैसा दिखाई देता है। इसका फूल कमल के फूल में रखी किसी छोटी- सी गेंद में निकले असंख्य रुओं की तरह होता है।
पीपल की तरह ही कम पानी में यह वृक्ष फलता-फूलता हैं। सदाबहार रहने वाले इस कल्पवृक्ष की पत्तियां बिरले ही गिरती हैं। हालांकि इसे पतझड़ी वृक्ष भी कहा गया है।
यह वृक्ष लगभग 70 फुट ऊंचा होता है और इसके तने का व्यास 35 फुट तक हो सकता है। 150 फुट तक इसके तने का घेरा नापा गया है। इस वृक्ष की औसत जीवन अवधि 2500-3000 साल है। कार्बन डेटिंग के जरिए सबसे पुराने फर्स्ट टाइमर की उम्र 6,000 साल आंकी गई है।
