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मानवीय असंवेदना कृत्‍य की जांच रिपोर्ट….12.55 बजे होश आया, मरीज हुआ आक्रोशित, कॉटन पट्टी से हाथ बांधने की कोशिश की

-जांच दल द्वारा तैयार रिपोर्ट में घटना से जुड़े कई बिंदूओं का समावेश
न्‍यूज जंक्‍शन-18
रतलाम। शहर के 80 फीट रोड स्‍थ‍ित जीडी अस्‍पताल के आईसीयू में भर्ती मरीज द्वारा हंगामेदार लगाए गए आरोप के बाद कलेक्‍टर के निर्देश पर गठित जांच दल ने मरीज, परिजन तथा डॉक्‍टर्स व स्‍टॉफ के कथनों की प्रक्रिया पूरी कर रिपोर्ट लगभग तैयार कर ली है। आईसीयू के उपलब्‍ध हुए फुटेज के आधार पर घटना से जुड़े कई बिंदूओं का रिपोर्ट में तथ्यात्मक समावेश किया गया है। इसमें प्रमुख तथ्‍य उभरकर आया कि घटना वाले दिन बेहोशी की हालत में मरीज भर्ती हुआ था। दोपहर 12.50 बजे उसे होश आया। 12. 55 बजे उसकी पत्‍नी ने आईसीयू में प्रवेश किया। संवादी तालमेल व समझाइश के अभाव के चलते स्‍टाफ से उसकी कहासुनी हुई। खूद को कैद समझ होश में आए मरीज ने खुद पर उपचार नलियां लगा पाया। वह नलियां निकालने लगा। इस दौरान स्‍टाफ ने सुरक्षा के लिहाज से कॉटन पट्टी से उसके हाथ बांधने के प्रयास किए। आईसीयू से बाहर निकलकर मरीज ने हंगामा मचाकर खूले रूप से आरोप लगाए।
इधर, घटना के बाद जीडी हास्‍प‍िटल प्रमुख डॉ. लेखराज पाटीदार ने रविवार को पत्रकावार्ता कर अपना पक्ष रखा। इसमें उन्‍होंने मरीज को आपराधिक प्रवृत्ति का करार दिया। क्‍योंकि घटना में मारपीट के बाद वह अस्‍पताल तक पहुंचा था। घटनाक्रम में दोष लगभग मरीज पर ही मढ़ने के प्रयास किए गए।
मालूम हो कि 3 मार्च को हुए इस वाकिए के वीडियो वायरल होने के बाद कलेक्‍टर राजेश बाथम द्वारा जांच के आदेश दिए थे। सीएमएचओ डॉ. एमएस सागर के निर्देश पर गठित टीम में चिकित्‍सा अधिकारी डॉ. प्रणव मोदी, वरिष्‍ठ सर्जन डॉ. बीएल तापड़िया व जिला विस्‍तार एवं माध्‍यम अधिकारी आशीष चौरसिया को शामिल किया गया। इसके बाद अस्‍पताल के फुटेज बुलवाकर संबंधितों से पूछताछ कर उनके कथन लिए गए।

मेडिकल कॉलेज की अव्‍यवस्‍था से उपजी स्‍थ‍िति:- पूरे घटनाक्रम में मेडिकल कॉलज की अव्‍यवस्‍था भी सामने आई। दरअसल दीनदयाल नगर थाने अंतर्गत मारपीट के बाद घायल बंटी निनामा को परिजन सीधे सिविल अस्‍पताल ले गए थे। वहां से मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। मेडिकल कॉलेज में प्रारंभिक जांच के बाद इसे इंदौर एमवाय में रैफर किया गया। इस बीच परिजन इसे बेहतर उपचार के लिए जीडी अस्‍पताल लेकर गए। बड़ा सवाल है कि मेडिकल कॉलेज से इसे गंभीर मानते हुए इंदौर रैफर किया तो जीडी अस्‍पताल में 3 घंटे में ही इसे होश कैसे आ गया। इतना ही नहीं मरीज खूद चलकर आईसीयू से बाहर निकलकर सड़क तक चला आया। जांच टीम के सदस्‍यों का मानना है कि मारपीट में मरीज बंटी के सिर में चोट आई थी। सीटी स्‍कैन भी नहीं किया गया। संभवत: वह नशे में भी था। जीडी अस्‍पताल में प्रारंभिक उपचार के बाद ही इसे होश आ गया। सामान्‍य यानी चलने-फ‍िरने की स्‍थ‍िति में आ गया। अमानवीय पहलू यह भी उजागर हुआ कि परिजन व मरीज को एक से दूसरे स्‍थान पर भटकाते रहे। जबकि उपचार मेडिकल कॉलेज में ही संभव था।

जांच में समावेश बिंदूओं के आधार पर रिपोर्ट

-मरीज से रुपए एठने के आरोप आधारहीन माना गया। करीब 3 घंटे के उपचार के मान से राशि ली गई। 18 या 20 हजार रुपए जमा राशि की रसीद दी गई है। विवाद के बाद पत्‍नी को बचे रुपए ले जाने के लिए बुलवाया। लेकिन वह लेकर नहीं गई।
-इससे पहले पत्‍नी से जीडी अस्‍पताल प्रबंधन ने कहा कि उपचार के लिए और भी राशि लग सकती है। करीब एक लाख रुपए का इंतजाम करके रखे
-मरीज ने खूद को आईसीयू में देखा तो आक्रोशित हो गया। पत्‍नी से समझाया लेकिन वह शांत नहीं बल्कि उग्र होता चला गया।
-फुटेज में देखा गया कि आईसीयू में होश में आने के बाद मरीज ने शरीर पर लगाई गई नलियां निकालने की कोशिश। तब स्‍टाफ कर्मचारी ने कॉटन पट्टी से इसके हाथ बांधने के प्रयास किए। इसे स्वयं संबंधित कर्मचारी ने स्‍वीकार भी किया।
11 बजे बेहोश हुआ तथा 12.50 बजे इसे होश आ गया था। यह बात सभी कथनों में सामने आई।

पूर्व के प्रकरण की जांच 10 माह में पूरी नहीं हुई:-  इससे पहले जीडी अस्‍पताल में उपचार के दौरान लापरवाही के आरोप लगाते हुए जावरा की पीड़िता नैना भाटी के परिजन ने शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि उपचार के दौरान लापरवाही के चलते नैना पैरेलेसिस की जिंदगी जी रही है। जावरा की मरीज के साथ लापरवाही के मामले में भी प्रशाासन ने जांच के निर्देश दिए गए थे। पूर्व सीएमएचओ के कार्यकाल की रिपोर्ट 10 माह बाद तक भी उजागर होकर सार्वजनिक नहीं हुई। अब वर्तमान घटनाक्रम के वीडियो वायरल होने के बाद मामला मीडिया सहित राष्‍ट्रीय चैनल पर प्रसारित हुआ। पीआरओ से पक्ष भी रखा। इसके बाद जांच प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शिता पूर्वक की गई। संभवत: मंगलवार या बुधवार को कलेक्‍टर को सौंपी जा सकती है।

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