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ये हैं दिखावे के पिरियोडिकल तबादलें…अफसरों के सिपेसालारों की नहीं हिलाई कुर्सी, नापसंदों को कर दिया दरकिनार

-रेलवे के कई विभागों में तथाकथित स्थानीय नीति पर काम कर रहे अधिकारी।

न्यूज़ जंक्शन-18

रतलाम। रेलवे बोर्ड के भले ही पिरियोडिकल तबादलों के नियमों के सख़्ती से पालन करने के निर्देश है। बावजूद रतलाम मंडल में इसका कोई असर नहीं है। यहां जिम्मेदारों द्वारा खूब मनमानियां की जा रही है। सिपेसालारी व चापलूसी ने तह तक पैठ जमा रखी है। इस सिस्टम की सेवाएं ऑफिस से लेकर बंगलों तक बरकरार है। यही वजह है कि अफसरों की पसंद के कर्मचारियों को सालों बाद भी कुर्सी से हिलाया नहीं गया।

बात पिरियोडिकल तबादले की ही करें तो यहां हर सेक्शन में कुछ खास कर्मचारियों पर ही मेहरबानी है। सालों से कर्मचारी एक ही टेबल पर जमे हुए है। जबकि तबादलों के नाम पर चुनिंदा मेहनतकश व काम में कुशल कर्मचारियों को इधर से उधर कर दिया गया है।

बता दें कि पिछले साल कार्मिक विभाग में पिरियोडिकल तबादले के आदेश जारी किए गए थे। पहली सूची में 15 मुख्य कार्यालय अधीक्षक स्तर सहित अन्य कर्मचारियों को इधर से उधर कर दिया गया था। इनमें ऐसे भी कर्मचारी है जो एक ही पद पर 14 सालों से जमें थे। पूर्व में किसी वरिष्ठ अधिकारी ने इन्हें हिलाने की जहमत नहीं उठाई। इसी तरह अन्य विभागों में छुटपुट आदेश जारी किए गए। बावजूद कई कर्मचारी अभी भी लंबे समय से डटे हुए है।

कहां का कर्मचारी कहीं और का काम:- विभागों के हालात यह है कि किसी और सेक्शन का कर्मचारी कहीं दूसरे सेक्शन में काम कर रहा है। जैसे कार्मिक विभाग के हरिकिशन बारगे व संजय सिंथेटकर लगभग 10 से 15 सालों से कम्प्यूटर सेक्शन में कार्यरत है। बड़ी बात है कि संजय वेलफेयर इंस्पेक्टर है। जिनकी मूल जिम्मेदारी फील्ड के अलावा कर्मचारियों के कल्याण से जुड़ी है। इन्हें आज तक पिरियोडिकल तबादले के दायरे में नहीं लिया गया।

इसी क्रम में गोपनीय विभाग भी शामिल है। पिछले छह माह में चुनिंदा कर्मचारियों को इधर से उधर किया। लेकिन कुछ विशेष कर्मचारी पर मेहरबानी कर राहत दी गई हैं। पिछले दिनों 4800 ग्रेडपे के मुख्य कार्यालय अधीक्षक फूलसिंह मीणा का मैकेनिकल शाखा से गोपनीय विभाग में तबादला किया गया। जबकि इसी सेक्शन में 4600 ग्रेडपे की कार्यालय अधीक्षक वंदना हैरिस 10 साल से अधिक समय से पदस्थ है। एक ही सेक्शन में दो कार्यालय अधीक्षक की पदस्थापना मेन पावर का दुरुपयोग है। कर्मचारियों का कहना हैं कि प्रशासनिक तौर पर व्यवहारिक व बेहद ईमानदार वरिष्ठ अधिकारी को निचले अधिकारी गुमराह कर मनमाने आदेश जारी करवा रहे है।

मटेरियल विभाग में मनमानी के आलम:- इधर, मंडल कार्यालय का मलाईदार माने जाने वाले मटेरियल विभाग में भी कर्मचारियों के तबादले के बाद रिलीविंग को लेकर जिम्मेदार अधिकारी उदार बने हुए है। दरअसल सहायक कार्मिक अधिकारी द्वारा फरवरी 2025 के पहले सप्ताह में जारी किए आदेश के तहत महिला कर्मचारी श्रीमती परवीन का मैकेनिकल सेक्शन में तबादला कर दिया गया है। इसके बाद भी महिला कर्मचारी पूर्व स्थान यानी मटेरियल विभाग में ही कार्यरत है। बताया जा रहा कि विभाग प्रमुख द्वारा कर्मचारी को रिलीव करने में विशेष तौर पर लेतलाली की जा रही है।

इन विभागों में भी कार्यवाही की दरकार;- इसी तरह मंडल कार्यालय के वाणिज्य विभाग, इलेक्ट्रिकल विभाग, ऑपरेटिंग विभाग, मैकेनिकल विभाग के कई पदों पर कर्मचारी लंबे समय से जमे है। वाणिज्य विभाग में पूर्व में भ्रष्टाचार के मामले में लिप्त व निलंबित रहा इंस्पेक्टर अभी भी यात्री सुविधा के लिए खरीदी के टेंडर के मूल्य निर्धारण के काम में जुटा है। केवल कागज पर तबादला है जबकि पिछले 10 साल से भी अधिक समय से एक ही विशेष कक्ष व मलाईदार टेबल पर कार्यरत है।  यहां भी वरिष्ठ अधिकारी प्रशासनिक तौर पर बेहद सख्त है। लेकिन अब तक अधिकारियों को मिसगाइड कर स्वार्थ साधा जा रहा है।

सुपरवाइजर के सेक्शन बदले गए लेकिन काम पूर्ववत ही:- रेलवे के एसएंडटी, टीआरडी व इंजीनियरिंग विभाग में भी मनमानी चरम पर है। बताया जा रहा है कि एसएंडटी विभाग के सुपरवाइजर का दाहोद तबादला हुआ है। मेलमिलाप के बाद वह पूर्ववत स्थान पर डटा है। इसी तरह टीआरडी बिल्डिंग में टीआरडी विभाग में कार्यरत कर्मचारी का डीआरएम ऑफिस में तबादला कर दिया गया। लेकिन सीनियर डीईई टीआरडी ने इसे जाने नहीं दिया। इंजीनियरिंग विभाग के ड्राइंग विभाग का कर्मचारी 10 साल से दूसरे सेक्शन में कार्यरत है। इसी विभाग में ट्रेड यूनियन संगठन से जुड़े एसएसई पीवे का तबादले के बाद भी मेलजोल से वह नीमच में ही डटा है। वावजूद रेलवे पीआरओ का कहना है कि रेलवे में नियमों से काम होता है।

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