ये हैं परेशानियों की इंतहा…रेलवे बोर्ड के आदेशों की भी हवा, सुकून के बजाय रिटायर्ड को करना पड़ रही मशक्कत
-रिटायर्ड डिप्टी सीटीआई के कटौत्रा मामले में परिषद पदाधिकारी हुए सक्रिय
न्यूज जंक्शन-18
रतलाम। पेंशन के बाद सीनियर सीटीजन वर्ग के दायरे में आने वालों के लिए पेंशन अदालत सहित अन्य योजनाएं लगता है कोरी ढकोसला है।
ऐसी सुविधाओं के ढोल पीटने व नगाड़े बजाकर राहत की मुनादी करने वाला रेलवे सिस्टम पेंशनर्स के लिए ही उदार नहीं है। यहीं वजह है कि रिटायरमेंट के बाद जमा छुट्टियों की अनुचित गणना, इसके नगदीकरण लाभ में विसंगतियां व एकमुश्त राशि भुगतान में कटौती कर पेंशनरों की स्वछंद खुशी पर पलों में विराम लगा दी जाती है। रिटायर्ड डिप्टी सीटीआई अनिल उपाध्याय के मामले में अब परिषद के पदाधिकारियों ने मोर्चा खोला है। मामला रेलवे बोर्ड के जिम्मेदारों के संज्ञान में देने का मन बनाया है। उनका कहना है कि मंडल कार्यालय में तानाशाह बाबूराज चरम पर है। प्रचलित नियमों से छेड़छाड़ की जा रही, बल्कि बोर्ड के नियमों की भी अनदेखी की जाने लगी है।

पाठकों को बताते चले कि डिप्टी सीटीआई पद से रिटायर हुए उपाध्याय के 10 साल पूर्व वर्ष 2014 में लगे इंक्रीमेंट की गणना में त्रूटि कर दी गई थी। गणना में हर माह कुछ राशि बढ़कर मिलती रही। हालांकि बाद में विभाग को जानकारी लगी तो रिकवरी के आदेश निकाले गए। लेकिन लापरवाही बरतते हुए करीब डेढ़ साल की अवधि में भी यह रिकवरी नहीं की जा सकी। उल्टे वर्ष 2024 में कर्मचारी रिटायर्ड हुआ तो कर्मचारी के रिटायरमेंट के अंतिम भुगतान से 1.73 हजार रुपए की रिकवरी कर दी।

स्क्रीनशॉट- फरवरी 2023 में विभाग ने निकले थे रिकवरी के आदेश। डिप्टी सीटीआई 2024 में रिटायर हुआ। डेढ़ साल में भी नही की त्रुटि पूर्व इंक्रीमेंट की रिकवरी।
दोषी बाबू से की जाए रिकवरी:-मामले में पश्चिम रेलवे कर्मचारी परिषद के जोनल संगठन मंत्री शिवलहरी शर्मा ने कहा कि डिप्टी सीटीआई के रिटायरमेंट के भुगतान के दौरान 1.75 लाख रुपए का जो कटौत्रा किया है। इसमें पूरी तरह से विभाग एवं बाबू की गलती है। ऐसे में पूरी रिकवरी बाबू से की जाकर कर्मचारी का काटा गया रुपया ब्याज सहित लौटाना होगा। इस प्रकरण को बोर्ड के अधिकारियों के संज्ञान में भी दिया जाएगा। क्योंकि इसमें बोर्ड के भी साफ नियम है कि कर्मचारी के रिटायरमेंट की राशि से इस तरह कटौती नहीं की जाए। क्लॉस 3 व क्लॉस 4 के कर्मचारी से रिटायरमेंट के वक्त रिकवरी का तो कतई सवाल नहीं उठता है।
एक से दूसरी टेबल पर भटकाना आम बात:- सीनियर सिटीजन अपनी समस्या लेकर आते है। इन्हें एक से दूसरे टेबल पर भटकाना आम बात है। वहीं कई कामों में ‘चाय -पानी” की रस्म पूरी करना भी अनिवार्य करना होता है।
