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ये कैसी तानाशाह बाबूगिरी… त्रूटिपूर्ण कर दी वेतनवृद्धि, विभागीय आदेश के बाद भी डेढ़ साल तक नहीं की रिकवरी, रिटायर्ड के वक्त ग्रेज्जुटी से काट लिए 1.73 लाख रुपए

-सर्वोच्‍च न्‍यायालय के आदेश-रिटायरमेंट के भुगतान से नहीं कर सकते है कटौती
-काटी गई राशि पाने के लिए भटक रहा डिप्‍टी सीटीआई।

न्‍यूज जंक्‍शन-18
रतलाम। रेलवे अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद प्रशासनिक व्‍यवस्‍था को अपने हिसाब से चलाने वाले कार्यालयीन बाबू अब तानाशाही पर उतरकर कर्मचारियों के आर्थिक नुकसान करने पर आमादा होने लगे है। इसके कई उदाहरण देखने में आ रहे हैं। ताजा उदाहरण डिप्‍टी सीटीआई से रिटायर्ड हुए चेकिंग कर्मचारी अनिल उपाध्‍याय का है। इन्हें 10 साल पहले यानी वर्ष 2014 में इंक्रीमेंट दिया गया। इसमें वेतन निर्धारण की त्रूटि कर दी गई। गणना में हर माह राशि बढ़कर मिलती रही। हालांकि बाद में विभाग को जानकारी लगी तो रिकवरी के आदेश निकाले गए। लेकिन करीब डेढ़ साल की अवधि में भी रिकवरी नहीं की गई। कर्मचारी पर गाज तब गिरी जब वह वर्ष 2024 में सेवानिवृत हुआ। पूर्व की त्रूटि के कुल 1.73 लाख रुपये की रिकवरी कर्मचारी के अंतिम भुगतान से कर दी। रिटायरमेंट का पैसा जब हाथ लगा तो इतनी कम राशि मिलने पर कर्मचारी सकते में आ गया। इसी तरह से रिटायरमेंट के पूर्व नियमों से पदोन्‍नति को लेकर भी मनमानी की गई। इससे रिटायर्ड कर्मचारी को ताउम्र अपनी पेंशन से आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।
मालूम हो कि इसी तरह की कई गलतियों के लिए कर्मचारी रोज मंडल कार्यालय चक्‍कर काटने को मजबूर है।

डीआरएम को की शिकायत, अभी तक सुनवाई नहीं:- रिटायर्ड डिप्‍टी सीटीआई उपाध्‍याय ने अपने अंतिम भुगतान से 1.73 लाख रुपए की रिकवरी होने के बाद तत्‍कालीन डीआरएम को लिखित में शिकायत कर अपनी पीड़ा व्‍यक्‍त की। इसके बावजूद अभी तक मामले में सुनवाई नहीं की गई है। उपाध्‍याय ने शिकायत में बताया कि वह 31 अगस्‍त 2024 को जब रिटायर हुआ। तब कथित तौर पर रिटायरमेंट के एक माह पहले कार्मिक विभाग के संबंधित सेक्शन से पत्र द्वारा बताया गया कि 2014 में एक इंक्रीमेंट में त्रूटिवश गणना ज्‍यादा हो गई है। रिटायरमेंट के वक्त 10 साल के अंतराल की राशि की एकमुश्‍त रिकवरी कर ली। दरअसल बाबू द्वारा मेरी इच्‍छा के विरुद्ध 10 साल में मुझे यह राशि दी गई, वह भी हर माह के वेतन से। इस राशि का बकायदा इनकम टैक्स भी काटा गया। जबकि विभाग ने यह राशि ग्रेज्‍यूटी से एकमुश्‍त काटकर मुझे मानसिक प्रताड़ना दे दी। इधर, पीआरओ का कहना है कि नियम से शासकीय काम होते है।

फरवरी-23 में विभाग ने मानी त्रूटि, फ‍िर भी कटौती के बजाय सोए रहे जिम्‍मेदार:- कर्मचारी के वेतन निर्धारण में की गई त्रूटि संज्ञान में आने के बाद कार्मिक विभाग ने फरवरी 2023 में आदेश जारी किया था। इसके बावजूद कर्मचारी के रिटायर्डमेंट के पूर्व डेढ़ साल के अंतराल में भी रिकवरी नहीं की गई। बाबू की गलती का खामियाजा रिटायर्ड को उठाना पड़ा।

यह है गड़बड़ी का पूरा मामला:- कर्मचारी की सीटीआई वेतनमान 9300-34800-4200 के तहत 20.2.2015 को पदोन्‍नति हुई थी। पदोन्‍नति पर वेतन निर्धारण करते समय विभाग ने वेतनवृद्धि 15490 रुपए के स्‍थान पर 15550 रुपए कर दी है। यह त्रूटिपूर्ण गणना का भुगतान 10 साल तक यानी कर्मचारी के रिटायरमेंट वर्ष 2024 तक किया जाता रहा है।

यह है सर्वोच्‍च न्‍यायालय के निर्देश

– एक वर्ष के अंतराल में रिटायर्ड होने वाले कर्मचारी से इस तरह का कटौत्रा किया जाना नियम विरुद्ध है।
– कर्मचारी से किए जाने वाले कटौत्रा यदि कटौत्रा आदेश जारी करने के पांच वर्ष के पूर्व है तो वह अमान्‍य है।
– ग्रुप सी एवं डी के कर्मचारियों से इस तरह का कटौत्रा रिटायरमेंट के समय नहीं किया जा सकता है।

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