-श्री महालक्ष्मी मंदिर के पुजारी संजय दवे ने कमिश्नर से की दरख्वास्त।
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। महालक्ष्मी के महापर्व दीपावली के दौरान नोटों व आभूषण की सज्जा के लिए प्रदेश सहित देशभर में प्रख्यात रतलाम के माणक चौक स्थित श्री महालक्ष्मी मंदिर अब पुजारी की नियुक्ति को लेकर दोबारा चर्चा में आ रहा है।
दरअसल मंदिर सज्जा के दौरान ही मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित संजय दवे को परिवार में सूतक के चलते व शिकायत के आधार पर प्रशासन ने हटा दिया था। अस्थाई पुजारी द्वारा देखरेख के बाद अब मुख्य पुजारी की पुनः मंदिर के लिए नियुक्ति नहीं की गई। पंडित दवे ने प्रशासन स्तर पर सुनवाई नहीं होने पर कमिश्नर को पत्र लिखकर दोबारा नियुक्ति की गुहार लगाई है।

इस संबंध में पंडित दवे व अखिल भारतीय पुजारी संघ के सदस्य पंडित मनोज मिश्रा द्वारा पत्रकार वार्ता आयोजित की है। आरोप है कि उसे कुलदीप त्रिवेदी नामक शख्स के इशारे पर षड्यंत्रपूर्वक हटाया गया है। बल्कि सरस्वती मूर्ति की वीणा खंडित कर उसे बदनाम करने के प्रयास किए गए। बाद में वीडियो में सच्चाई उजागर हुई है।
पंडित संजय दवे ने कहा कि विगत चार पीढ़ी से हमारे परिवारजन महालक्ष्मी मंदिर की पूज़ा-अर्चना करते आए है। 17 अक्टूबर 2024 को बड़े भाई का स्वर्गवास हो जाने से सूतक लग गया था। बड़े भाई वर्षों से इंदौर निवासी रहे है। वे हमारी नानी के दत्तक पुत्र के रूप में रहे थे। जिसका हमारा सीधा पारिवारिक संबंध नहीं था।
इधर, प्रशासन से 18 अक्टूबर 2024 को शाम को प्राप्त हुआ। उल्लेख था कि आपके भाई का स्वर्वास हो गया है इसलिए आपको हटाकर अस्थाई पुजारी की नियुक्ति की गई। प्रशासन द्वारा एक अन्य पत्र प्रात हुआ जिसमें पुजारी को वहां के सोना-चांदी का हिसाब-किताब देने को कहा गया। 21अक्टूबर 2024 को प्रशासन द्वारा चाबी एवं हिसाब-किताब लिया गया।
इससे पहले 20/10/2024 को शाम श्रीमाली समाज के कुलदीप त्रिवेदी ने कहा कि आपके यहां सूतक हैं। प्रशासन के नियम के अनुसार अस्थाई पुजारी नियुक्त कर रखा है। तब त्रिवेदी को जवाब में कहा कि प्रशासन का कोई जिम्मेदार व्यक्ति आएगा तो उसको यह सारा रूपए सहित हिसाब सौंपा जाएगा।
दोबारा नहीं दिया पूजा का काम
पंडित संजय दवे ने कहा कि 13/11/2024 प्रशसन द्वारा पत्र प्राप्त हुआ। उसमें उत्लेख किया गया कि आपको पुजारी के पद से हटा दिया गया है। इस संबंध में मेरे द्वारा प्रशासन को अवगत कराया गया कि मेरे परिवार का सूतक खत्म हो गया है। मुझे पुजारी के पद पर पुनः पद दिया जाए। मगर मेरी कोई सुनवाई नही की गई। मुझ प्राथी ने उज्जैन कमिश्नर से मुलाकात कर उनको इस स्थिति से अवगत कराया गया।
परिवार पर रोजी रोटी का संकट
पंडित दवे ने कहा कि हमारा पीढ़ियों से मंदिर की पूजा का मुख्य काम रहा है। इसी से घर परिवार चलता आया। प्रशासन द्वारा पुनः नियुक्ति नहीं करने से हम पर रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। सुनवाई नहीं होने पर न्याय के लिए धरने पर बैठना पड़ेगा।
