यूपीएस नहीं चाहिए, यह भी छलावा…एजीएम में उठी आवाज़, योजना के विरोध में 30 सितंबर को दिल्ली में धरने का फैसला
-यूपीएस अभी अच्छी लग रही बाद में एनपीएस जैसे दुखदायी होगी।
-राष्ट्रीय कार्यकारिण की बैठक में पदाधिकारियों ने नई पेंशन योजना को नकारा।
न्यूज जंक्शन-18
रतलाम। हमें एनपीए की तरह यूपीएस भी नहीं चाहिए। यह भी छलावा है। इस भी एनपीएस की तरह आगे चलकर कर्मचारियों के लिए दुखदायी साबित होगी। यह आवाज 31 अगस्त को भारतीय रेल कर्मचारी पुरानी पेंशन संघर्ष समिति (आईआरएमओपीएस) की राष्ट्रीय कार्यकरणी की वार्षिक हुई बैठक (एजीएम) में उठाई गई। यह बैठक उत्तर प्रदेश के आगरा (उत्तर मध्य रेलवे) में हुई। इतना ही नहीं 30 सितंबर को इस योजना के विरोध में दिल्ली में धरना प्रदर्शन का फैसला लिया गया है।
इस बैठक में वेस्टर्न रेलवे से कोषाध्यक्ष नवीन बोकाडिया शामिल हुए। उन्होंने रतलाम लौटकर बताया कि बैठक में आईआरएमओपीएस के सभी रेलवे, मंडलों और वर्कशॉप के सैकड़ों कार्यकर्ताओं में भाग लिया। वहां एनपीएस और यूपीएस के बारे में विस्तार पूर्वक चर्चा हुई। सभी ने एक स्वर में नई पेंशन योजना को नकार दिया है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार 2004 में न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) को लागू किया गया था। तब एनपीएस को तत्कालीन सरकारों और कर्मचारी संगठनों के नेताओं द्वारा बहुत अच्छा बताया गया था। 20 वर्ष के बाद एनपीएस के परिणाम बहुत ही दुखदाई और कष्टदायक साबित हुए है।
ठीक उसी तरह यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) भी कर्मचारियों के लिए अच्छी योजना नहीं है। इसलिए एनपीएस और यूपीएस के विरोध में 30 सितंबर को जंतर मंतर नई दिल्ली में विशाल धरना प्रदर्शन आयोजित करने का निर्णय लिया गया।
बैठक को ऑल इंडिया एनपीएस एम्पलाई फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल और आईआरएमओपीएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशांत पंडा, कोषाध्यक्ष नवीन बोकाडिया (डब्ल्यूआर), महासचिव नेत्रपाल डागर, अल्फ्रेड डेनियल (एससीआर), चुलबुल पांडे(एनबार), राजवीर मीना(एनसीआर), जाहर सिंह यादव (एनसीआर), प्रवीण कुमार (एसआर), राम कुमार (एसइसीआर), महेंद्र सिंह (डब्ल्यूसीआर), अमित मलंगी (ईआर) कृष्ण कांत (सीआर) संजीव सिंह (एसडब्ल्यूआर) इत्यादि ने संबोधित किया।
