Logo
ब्रेकिंग
हेरिटेज ट्रेन चलाने का खेल!....वेबसाइट पर नो रूम व लंबी वेटिंग, ट्रैक पर ट्रेन चल रही पूरी खाली एक्सेस पेमेंट का टेरर...भुगतान के बाद स्टेबल की प्रकिया, अब वसूली की तैयारी एक्सेस पेमेंट का टेरर....रेलवे में बांट दिया अतिरिक्त पेमेंट, रिटायर्ड कर्मचारी के खाते में भी आता र... रक्तदान का पुण्य काम....पूर्व अध्यक्ष स्व. उमरावमल पुरोहित की याद में 55 यूनिट रक्तदान रेलवे डीजल शेड के एएमएम के खिलाफ महिला कर्मचारियों ने लगाया उत्पीड़न का आरोप ट्रेनों में चोरों की मौज....एक ही दिन में पांच ट्रेनों का निशाना, गहनें व रुपए से भरे बैग चोरी आज का एमएलए...सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार पर आखिर प्रकरण दर्ज गौरवपूर्ण इतिहास....एआईआरएफ के नाम भारत सरकार ने डाक टिकट किया जारी मिनी मैराथन के दो हीरो...एथलीट जूलियस चाको व इंदु तिवारी की सफलता को किया सलाम वार्षिकोत्सव एवं बासंती काव्य समागम... इंद्रधनुषी छटाओं से सजी रचनाओं से श्रोता हुए मंत्रमुग्ध

मैं और मेरी कविता

लेखन संसार…..

###########

ग़ज़ल

गम कुहासे को हटाने आए
प्यार की धूप दिखाने आए।

चाह अरथी की हो या दुल्हन की
फूल सबको ही सजाने आए।

ख़ुश हुए है जो किसी के जाने से
अश्क़ झूठे वो बहाने आए।

कर बहाना जो बुलाते हमको
अब बहाने से हटाने आए।

हम न तलवार चला कर लड़ते
हम क़लम से ही हराने आए।

हम निवाला जो मेरे थे अपने
खाक़ में हमको मिलाने आए।

उर्वशी फिर से हुआ दिल बच्चा
याद बचपन के ज़माने आए।

-ऊषा जैन उर्वशी
कोलकाता।
——–

तुम्हें नहीं आती याद

बहुत दिनों बाद
आज गाँव गया
मंदिर के बरामदे में
उछल-कूद करते बच्चे
सुस्ताते बुज़ुर्ग
महिलाओं का बतियाना
सब मानों जीवंत हो उठा

मंदिर से आ रही
चंदन और फूलों की महक वातावरण में गुंजित होती
घंटी व घड़ियाल की नाद
अहसास कर रही
मानों पिताजी (पंडित जी)
अभी निकले हैं आरती कर

मंदिर के सामने खड़ा
नीम का पेड़
और/ उस पर लगती चौपालों की
यादें ताज़ा हो गई

चौपाल को देख लगा
अभी भी बैठे हैं
हाकमसिंह जी, रणछोड़सिंह जी,
रतनसिंह जी, उमरावसिंह जी
शंकरलाल जी
और कर रहे हैं
ग्राम विकास की बात

मंदिर की राधा-कृष्ण मूर्तियां
मानों कह रही हो
बहुत दिनों बाद रुख किया
तुमने गांव का

क्या भूल गए यहां की
मिट्टी की सौंधी महक
नदी की कल-कल
नीम,आम, बरगद के वृक्षों पर
होने वाली पक्षियों की चहचहाहट

या बलराम, भारतसिंह
करणसिंह, ईश्वरसिंह
विक्रमसिंह
के खेतों में सिके भुट्टों की महक

क्या तुम्हें याद नहीं
बनेसिंह, दशरथसिंह के गन्ने
और उससे बने ताज़े गुड़ की मिठास
धापू, रामू, कृष्णा,
भौमसिंह,भेरू, बापूसिंह के साथ
सावन के झूले

इतनी यादों के बाद भी
तुम कैसे भूल गए?
गांव की गालियाँ
गांव की सखियाँ
गांव की बगियाँ

क्या तुम्हें नहीं आती
इनकी याद?
क्या तुम्हें नहीं आती
गाँव की याद?

-संजय परसाई ‘सरल’
रतलाम (मप्र)।
मोबा. 98270 47920
————
सपने….!

जब हम छोटे थे
सपने खिलौने पाने के
जैसे-जैसे बढती गई
जीवन की अहमियत
कुछ करने के सपने…!

सपना वो नहीं
सोते हुए नींद में देखे
सपने का अर्थ या फिर
सपने का मतलब…
जो हम खुली आखों से
पाने की चाहत रखते हैं…!

जीवन में कुछ पाने के लिए
लक्ष्य तय करना होता है…
लक्ष्य के बिना कुछ भी नहीं
लक्ष्य तब ही तय होता है
जब सपने देखते हैं…!

सफल होने का सपना
लक्ष्य के रूप में देखो
हांसिल करना ही है
तभी कुछ पा सकते हैं…!

-सतीश जोशी
संपादक 6pm
इन्दौर (मप्र)।

Leave A Reply

Your email address will not be published.