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धर्मनिष्ठ होकर देश, धर्म और संस्कृति से जुडे़ रहे-स्वामी श्री चिदम्बरानंद सरस्वतीजी

रविवार को होगा श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का विश्राम सत्र।
चेतन्य काश्यप फाउंडेशन एवं श्री हरिहर सेवा समिति द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का छटा दिन।
कथा में मुख्य अतिथि रहे भाजपा जिला प्रभारी प्रदीप पांडे।

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। महामण्डलेश्वर स्वामी श्री चिदम्बरानंद सरस्वतीजी महाराज ने चेतन्य काश्यप फाउंडेशन एवं श्री हरिहर सेवा समिति द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के छटे सत्र में उपस्थितजनों से आव्हान किया कि आप धर्मनिष्ठऔर देश, धर्म और संस्कृति से जुड़कर संतों के देवीक कार्य में सहभागी बने। कथा से पूर्व उड़ीसा में हुए ट्रेन हादसे में मृत आत्माओं की शांति के लिए स्वामीजी के सानिध्य में दो मिनट का मौन धारण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कथा में मुख्य अतिथि भाजपा जिला प्रभारी प्रदीप पांडे, विधायक चेतन्य काश्यप, महापौर प्रहलाद पटेल, मोहनलाल भट्ट, गोविंद काकानी, मनोहर पोरवाल, श्रीमती नीता काश्यप, श्रवण काश्यप आदि उपस्थित रहे। कथा का समापन रविवार को विश्राम होगा।

स्वामी जी ने कथा में कंस वध एवं भगवान श्री कृष्ण-रूकमणी विवाह के चरित्र वर्णन का रसपान कराया। उन्होंने कहा कि भगवान को अभिमान पसंद नहीं है क्योंकि वह अपने भक्तों को दुखी नहीं देख सकते है। जहां अभिमान है, वही दुःख है और जहां भगवान है, वहीं सुख है। जो भगवान से जुड़ता है, वह सुखी है। कथाएं भगवान से जोड़ने के लिए होती है। हमें धर्म के प्रति निष्ठावान होना पड़ेगा। हमारी संस्कृति और पौराणिक इतिहास हमारी जड़ है। इस सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, पावन परंपरा रूपी जड़ को सिंचने का सदकार्य रतलाम में विधायक चेतन्य काश्यप कर रहे है। जो कथा का दान करता है, वह सबसे बड़ा दानी है।

भगवान कथाओं में जीवंत रहते हैं

स्वामीजी ने कहा कि जिस प्रकार घर में अंधेरा होता है तो मेहमान नहीं आते है, ठीक वैसे ही जिसके मन में अभिमान हो वहां भगवान नहीं आते है। कथा के माध्यम से मन के द्वार खोलें और भगवान को मन में जाने दीजिए। इससे आपका अभिमान खत्म हो जाएगा। भगवान कथाओं में जीवंत रहते हैं। आप जब इन कथाओं को सुनते तो भगवान आपके मन में प्रवेश करते हैं। यही एक माध्यम है, जिससे आप अभिमान को नहीं भगवान को महत्व दें। भगवान और संत अभिमान को दूर करने का काम करते हैं।


भगवान पर विश्वास कम मत होने देना

स्वामीजी ने कहा कि जीवन में भले ही कितने भी कष्ट, परेशानी आए, भगवान पर विश्वास कम मत होने देना। जब तक अज्ञान का आवरण आपके सामने रहेगा, तब तक भगवान के सामने होने पर भी आप उन्हे देख नहीं सकेंगे। भक्तों के अज्ञान का पर्दा भगवान स्वयं हटाते है। भगवान की कथाएं बांसुरी के समान होती है। आप दृष्टि को सकारात्मक रखिए, सफलता आपके कदम चूमेगी। राजनीति कैसी होनी चाहिए, यह कथाओं से सीखना चाहिए। सबसे पहले राष्ट्र भावना होनी चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी जी संस्कृत भाषा को बहुत महत्व दे रहे है। संसद भवन के लोकार्पण में तीन शिलालेख पट्ट लगाए गए थे, उसमें एक संस्कृत भाषा का था। वह जानते हैं कि संस्कृत मूल भाषा है। कम्प्यूटर ने भी संस्कृत को मूल भाषा के रूप में स्वीकार किया है।
कथा के दौरान श्री आदि गौड़ ब्राह्मण समाज, श्री रविदास समाज, श्री जांगड़ा पोरवाल समाज, क्रिकेट केंद्र रतलाम, मलखंब, कबड्डी टीम, जैन सोशल यूथ, गुर्जर गौड़ महिला समिति, दर्जी समाज पुरानी पंचायत, सगर वंशीय माली समाज गढ़कैलाश, श्री गढ़कैलाश सेवा समिति ने उनका दर्शन-वंदन कर आशीर्वाद लिया गया।

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