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रतलाम–धौसवास डबलिंग में लेटलतीफी का नज़ारा…. एन वक्त तक सिविल वर्क्स चलता रहा और सीआरएस निरीक्षण करते रहे

न्यूज़ जंक्शन-18

रतलाम। रतलाम-नीमच डबलिंग प्रोजेक्ट में भी आखिर ठेकेदार की मनमानी चली। सीआरएस निरीक्षण के पहले तक सभी काम पूरे होने थे। लेकिन मंगलवार को सीआरएस निरीक्षण के दौरान ही सिविल वर्क्स भी चलता रहा। इससे प्रोजेक्ट के काम को लेकर भी सवाल उठने लगे है।
मालूम हों कि पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल के अंतर्गत लगभग 133 किलोमीटर लंबे नीमच-रतलाम सेक्शन का काम चल रहा है।
31 मार्च 2026 को रतलाम-धौसवास के बीच 1.9 किलोमीटर लंबे सेक्शन का रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) ई. श्रीनिवास द्वारा निरीक्षण एवं गति परीक्षण किया गया।


इस दौरान उन्होंने सेक्शन में बनाए गए ब्रिज, ओवरहेड इक्विपमेंट (ओएचई), रेलवे ट्रैक, सिग्नलिंग सहित अन्य सभी संरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं का परीक्षण किया। निरीक्षण यान को लगभग 120 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से चलाकर ट्रैक की गुणवत्ता और संरक्षा मानकों की जांच की गई। इसके बाद इस सेक्शन में यात्री एवं मालगाड़ियों के संचालन के लिए उपयुक्तता प्रमाण-पत्र जारी किया गया।
रतलाम से नीमच के बीच कुल 133 किलोमीटर लंबे इस रेलखंड में से अब तक लगभग 117 किलोमीटर रेल लाइन का डबलिंग पूरा किया जा चुका है। इस परियोजना के शेष हिस्सों अर्थात मंदसौर–दलौदा रेल खंड पर कार्य तीव्र गति से जारी है।

निरीक्षण के दौरान ही सिविल वर्क्स चलता रहा:- सीआरएस निरीक्षण को अब हल्के में लेने का नज़ारा भी इस दिन दिखाई दिया। निरीक्षण के दौरान एलसी गेट नंबर 192 पर सिविल इंजीनियर काम किया जा रहा था।

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