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दृष्टिबाधित रेलकर्मियों की लाचारी का ऐसा मज़ाक….अस्पताल में मरीजों को स्ट्रेचर पर ले जाने की ड्यूटी, स्टेशन पर दे दिया चौकीदारी का काम

-रतलाम मंडल में दृष्‍ट‍िबाधितों के लिए काम निर्धारण बना अतार्किक।
न्‍यूज जंक्‍शन-18
रतलाम। रेलवे में दृष्टिबाधित कर्मचारियों को उनके अनिवार्य कोटे के तहत नौकरी जरुर दी जा रही है। लेकिन इस नौकरी के बदले उन्‍हें जो काम दिया जा रहा है, वह उनकी लाचारी के साथ किसी मजाक से कम नहीं हैं। उन्‍हें विभागों में ड्यूटी के ऐसे काम दिए जा रहे है, जिन्‍हें पूरा करने में उनकी ईश्‍वर प्रदत्त अक्षमता आड़े आ रही है। हालांकि रेल मंत्रालय द्वारा इनके लिए राहतभरी ड्यूटी कराने के प्रावधान भी है। लेकिन रतलाम मंडल में इनसे जो काम लिए जा रहे है। इसे अमानवीय भले ही ना कहे, लेकिन अतार्किक जरुर है। रतलाम मंडल के इंदौर व रतलाम मुख्यालय पर दृष्टिबाधित कर्मचारियों के चुनिंदा ऐसे उदाहरण है। किसी को चौकीदार बना दिया गया तो किसी दृष्टिबाधित महिला से महिला रनिंग रूम की चौकीदारी कराई जा रही है। वहीं एक कर्मचारी को साफ-सफाई की सफाईवाला नामक पोस्‍ट दे दी गई है। बाद में उसे मरीजों के स्ट्रेचर धकेलने तक लगा दिया गया। हालांकि कुछ कामों में इनके साथी कर्मचारी जरूर सहायता कर उन्हें राहत दे रहे है।
बता दें कि रतलाम मंडल में करीब एक दर्जन से अधिक कर्मचारी कार्यरत है। विभागों में इन्‍हें हल्‍का काम दिया गया है। वहीं कुछ पूछताछ कार्यालय में अनाउंसर की भूमिका भी बखूबी निभा रहे है। दूसरी ओर इंदौर व रतलाम स्‍टेशन पर दो से तीन कर्मचारियों को काम दिए गए। वे पूरी तरह से अतार्किक है।

(सभी कर्मचारियों के परिवर्तित नाम)
पुरुषों के प्रतिबंध का आंकलन कैसे करेगी :- इंदौर में दृष्टिबाधित महिला कर्मचारी सीता बेन को महिला रिटायरिंग रूम में ड्यूटी की जिम्मेदारी दे दी गई। इसे महिला रिटायरिंग रूम में इसलिए ड्यूटी पर तैनात किया गया कि वह ध्‍यान रखे कि अंदर किसी पुरुष की एंट्री न हो सके। यदि चुपचाप से पुरूष अंदर प्रवेश कर भी गया तो वह इसका आभास कैसे कर सकेंगी। वहीं एक अन्‍य दृष्टिबाधित कर्मचारी रमैया को इंदौर स्टेशन पर इलेक्ट्रिक पावर विभाग में चौकीदार जैसी ड्यूटी दे दी गई। वह वहां कैसे चौकीदारी करेगा यह भी समझ से परे है।

पहले सफाईवाला में दिया काम फिर भेजा रेलवे अस्पताल:- इसी तरह रतलाम मुख्यालय के दृष्टिबाधित कर्मचारी सुनिल कुमार को सफाईवाला पोस्‍ट दे दी गई है। सवाल है कि वह कैसे गंदगी देख सकेगा कि कहां कचरा फैला है। यह भी बड़ा अतार्किक पहलू है। बाद में इस कर्मचारी को रेलवे अस्पताल भेजकर वहां मरीजों के स्ट्रेचर धकेलने का काम दे दिया। हालांकि अब इसे केवल ड्यूटी पर बगैर काम बिठाया जा रहा है। लेकिन पूरे समय बेकार बैठे रहने से आत्मा कचोट रही है।

अनाउंसर के सभी पोस्ट खत्म:- रेलवे में अनाउंसर पद पर कई दृष्टिबाधित कर्मचारी बेहतरी से ड्यूटी देते आए। रेलवे ने बाद में यह काम आउटसोर्सिंग से करवाने की योजना बनाकर मंडल में अनाउंसर के सभी पद खत्म कर दिए गए। फिलहाल कुछ दृष्टिबाधित कर्मचारी पूछताछ कार्यालय में बैठक आउटसोर्स कर्मचारियों की मानिटरिंग कर समय बिता रहे है।

इनका यह कहना है
रेलवे में दृष्टिबाधित कर्मचारियों की पोस्ट के मान से क्या काम उन्हें सौंपा गया है। यह देखना पड़ेगा। यदि उन्हें अक्षमता के विपरित काम दिया गया तो यह सरासर गलत है। मामले को ट्रेड यूनियन के लिहाज से संज्ञान में लिया जाएगा।
-मनोहर सिंह बारठ, मंडल मंत्री वेस्टर्न रेलवे एम्प्लाइज यूनियन, रेल मंडल रतलाम।

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