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विजिलेंस की दोबारा कार्रवाई….ई-ऑफिस का डाटा मुताबिक जांच, यात्री सुविधा की खरीदे मटेरियल की पड़ताल

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रेलवे कमर्शियल इंस्पेक्टर (सीएमआई) की दस्तावेजी तबादले व टेबल वर्किंग को लेकर अनियमितता की धरातल पर पड़ताल करने एक बार फिर मुंबई से विजिलेंस टीम रतलाम आ धमकी। टीम ने ई-ऑफ़िस डाटा के मुताबिक सीएमआई के तबादला आदेश व उसके अनुरूप टेबल पर किए जा रहे काम की जांच की। वहीं यात्री सुविधा के नाम पर की खरीदी गई सामग्री का भी मिलान किया गया। विजिलेंस टीम की डीआरएम ऑफिस से लेकर रेलवे स्टेशन तक के मूवमेंट के चलते दिनभर चर्चाओं का दौर जारी रहा।
बता दें कि विभाग में कुछ सीएमआई लंबे समय से एक ही प्रकृति के काम में जुटाए गए है। अधिकारी के तबादलों के बाद नए अधिकारी के लिए भी ये ही सीएमआई उनके इसलिए भी चहेते बने रहे। क्योंकि शहर के मटेरियल सप्लाय फर्मों से उनका सीधा पक्का मेलजोल है। पिछले एक साल में रेलवे स्टेशन, ऑफिस से लेकर अलग-अलग प्लेटफॉर्म तक लाखों रुपए के फर्नीचर, सोफे सहित अन्य तमाम सामग्री की धड़ल्ले से खरीदी की गई है। सप्लायर से तगड़े मेलजोल की वजह से ही तबादलों की प्रकिया औपचारिक तौर पर केवल कागज़ी प्रकिया तक सीमित रखी गई है। बल्कि सीएमआई को उसकी सांठगांठ वाली प्रकृति के कामकाज में निपुणता से जुटाने का खेल जारी रखा गया है।

सुबह से ही जुटी विजिलेंस की टीम:- मुंबई से विजिलेंस की पांच सदस्यीय टीम सुबह से ही मंडल कार्यालय पहुंच गई थी। इसमें ट्रैफिक विभाग से जुड़ी तीन सदस्यीय टीम में कमर्शियल विभाग पहुंचे। विभाग में जिम्मेदारों पर दिनभर मानसिक तनाव बना रहा। टीम रेलवे स्टेशन पहुंची। जहां रिटायरिंग रम, ओआरएच सहित कुछ ऑफिस पहुंचे। सामग्रियों का मिलान भी किया गया।
वहीं कार्यालय में टेबल वर्किंग की भी जांच की गई। दरअसल विजिलेंस टीम पिछले दिनों फाइलें खंगालने आई थी। तब ई-ऑफिस का डाटा भी संग्रहित किया गया था। विजिलेंस सूत्र बताते है कि इस डाटा के मुताबिक सीएमआई की वर्किंग में अंतर दिखाई दिया।।

इसलिए भी सतर्कता:- रेल मंडल के अधीन वर्ष 2028 उज्जैन सिंहस्थ को लेकर यात्री सुविधा के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए जाने है। इसमें विजिलेंस की भी पैनी निगाहें रहेगी। इसलिए यह भी देखा जा रहा है कि ब्रांच के ही जिस कर्मचारी को मटेरियल खरीदी के काम में जुटाया गया। वह यथार्थ रूप से काम कर रहा या उसके स्थान पर कोई पृथक से डीलिंग कर रहा है।
इधर, इन्ही मामलों को लेकर आरटीआई में भी जानकारियां मांगी गई है। पुख्ता जानकारी न मिलने पर अपील की प्रकिया भी की जा रही है।

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