नाम वापसी का पर्चा, चुनावी आम चर्चा… 3 उम्मीदवार ने नाम वापस लिए, मैदान में बचे 10, तगड़ी रहेगी जोर आजमाइश
-संगठनों के कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों ने प्रचार में कमर कसी।
न्यूज जंक्शन-18
रतलाम। जेसीस बैंक डायरेक्टर पद के चुनाव में नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब अधिकृत लिस्ट सामने आने के बाद उम्मीदवारों के चेहरे भी साफ हो गए है। चुनावी बिगुल तकरीबन बजने के बाद मैदान का घमासान भी शुरू हो गया है। नामांकन के आखरी दिन तक 13 उम्मीदवारों ने अपने संगठनों तथा निर्दलीय उम्मीदवारों ने अपने फॉर्म जमा किए थे। नाम वापसी की प्रकिया में 3 उम्मीदवारों के नाम सूची से कटे है। इसके बाद 10 उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी की गई।
हालांकि संगठनों की ओर जो अधिकृत उम्मीदवार घोषित किए थे। उन्होंने अपना जनसंपर्क पहले ही शुरू कर दिया था। बावजूद पूर्व डायरेक्टर के पेंज से माहौल को पलट दिया। ऐसे में विभाजित वोट के आधार पर आमतौर पर हार-जीत के अभी से कयास लगाने शुरू कर दिए है।
मंडल मंत्री नागर सहित 3 उम्मीदवार के नाम वापसी:- प्रशासनिक तौर पर मिली जानकारी के मुताबिक नाम वापसी में वेस्टर्न रेलवे मजदूर संघ से मंडल मंत्री अभिलाष नागर व ललित मीणा (दाहोद) ने अपने नाम वापस लिए है। इसी तरह वेस्टर्न रेलवे एम्प्लाइज यूनियन की ओर धर्मेंद्र कुमार ने अपना नामांकन वापस लिया है। यूनियन से पूर्व डायरेक्टर वाज़िद खान का तकनीकी पेंच के चलते नाम स्वतः निरस्त ही गया। वहीं नामांकन के साथ जमा डिमांड ड्राफ्ट में मैनेजर के हस्ताक्षर न होने से पूर्व डायरेक्टर नीलम कौर का फार्म निरस्त कर दिया गया। इस तरह रतलाम मंडल में कुल 10 उम्मीदवार अपना भाग्य आजमा रहे है।
तीसरे विकल्प का भी जोर:- चुनाव के इस बार भी तीसरे विकल्प को लेकर खासी चर्चा है। दरअसल, इस बार जोन की रिजर्व सीट से भी संगठनों द्वारा उम्मीदवार उतारे गए है। कुछ उम्मीदवार भले ही जीत के लिए आश्वस्त होकर आत्ममुग्ध है। बावजूद दूसरे मंडल में भी ताकतवर उम्मीदवार होने से इनके बीच भी संघर्ष कड़ा रहने की पूरी संभावना है।
दूसरी ओर मंडल के डायरेक्टर पद की बात की जाए तो इस बार 10 उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर रहेगी। मतदाता अपने बेस्ट डायरेक्टर के चयन पर अपना मन तैयार करने में जुटे हैं। वहीं उम्मीदवार भी मतदाताओं का मुड़ भांप रहे है। इसमें स्वच्छ छवि, ईमानदार कार्यशैली तथा काम के प्रति निष्ठा व निपुणता उम्मीदवार की जीत का अहम पहलू रहेगा।
इधर, पूर्व में इंस्टीट्यूट चुनाव में एकतरफा तो मान्यता के चुनाव में तीसरे विकल्प की ओर मतदाताओं का रुझान देखा गया था। इसी तरह बैंक डायरेक्टर चुनाव में जहां संगठनों ने सघन जनसंपर्क की ताल ठोक दी। वहीं तीसरे विकल्प के संगठन भी कड़ी मेहनत में जुटे है। जातिगत वोट भी हार- जीत का अंतर तय करने में अहम भूमिका निभा सकते है।
