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रेलवे कमर्शियल विभाग में मुंबई विजिलेंस टीम का धावा…..पिरियोडिकल तबादलों के बाद भी जमे सीएमआई, ख़रीदी के भी खंगाले दस्तावेज

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रेलवे कमर्शियल इंस्पेक्टर (सीएमआई) को लेकर अनियमितता की खबरें मुंबई तक पहुंचने के बाद विजिलेंस टीम गुरुवार को कमर्शियल विभाग आ धमकी। टीम ने घंटों टेबलों पर बैठकर जानकारियां निकाली। बल्कि कुछ अहम दस्तावेज भी खंगाले। मुख्य रूप से सीएमआई के पिरियोडिकल तबादलों की अवधि तथा सीएमआई के टेबलों पर वर्क की जांच की गई। साथ ही स्टेशनों पर यात्री सुविधा के नाम पर लाखों रुपये की खरीदी को लेकर भी दस्तावेज का मिलान किया गया। विजिलेंस की कार्रवाई से विभाग में हड़कंप की स्थिति बनी रही। जांच में सख्ती इतनी रही कि विभागीय काम से आने वाले लोगों को भी लंच बाद आने की समझाइश देकर भेजा गया।
बता दें कि विभाग में कुछ सीएमआई लंबे समय से एक ही प्रकृति के काम में जुटाए गए है। अधिकारी के तबादलों के बाद नए अधिकारी के लिए भी ये ही सीएमआई चहेते बने रहे। यहीं वजह है कि तबादलों की औपचारिक तौर पर फौरी कागज़ी प्रकिया कर कर्मचारियों को एक ही काम में जुटाने का खेल अनवरत जारी रखा गया।

विजिलेंस की पांच सदस्यीय टीम सुबह से ही जुटी:- मुंबई से विजिलेंस की पांच सदस्यीय टीम सुबह से ही मंडल कार्यालय पहुंच गई थी। इसमें ट्रैफिक विभाग से जुड़ी तीन सदस्यीय टीम में शामिल विजिलेंस इंस्पेक्टर संजय शर्मा, संदीप गोलवकर तथा भावेक द्विवेदी कमर्शियल विभाग पहुंचे। वहीं अकाउंट्स से जुड़ी शिकायत को लेकर विजिलेंस इंस्पेक्टर शैलेंद्र कुमार भी कमर्शियल विभाग पहुंचे। लेकिन मुख्य रूप से विजिलेंस ट्रैफिक टीम की जांच अहम रही। विभाग में जिम्मेदारों पर दिनभर मानसिक तनाव बना रहा।

सिंहस्थ के नाम पर तबादलें, बावजूद काम मटेरियल ख़रीदी का….विजिलेंस सूत्रों के मुताबिक सीएमआई के पिरियोडिकल तबादलों के बावजूद कुछ सीएमआई सालों से एक ही तरह के काम जुटे है। इसकी विजिलेंस को शिकायत मिली थी। हाल ही में एक सीएमआई को सिंहस्थ का काम सौंपा गया। इसके स्थान पर ब्रांच के ही एक क्लर्क को मटेरियल खरीदी के काम में जुटाया गया। बावजूद जिम्मेदारों की सहमति से सीएमआई का खरीदी के काम में सीधा दखल है। पूर्व में भी इसकी शिकायत की जा चुकी है। वहीं विजिलेंस टीम ने तबादलों सहित पदोन्नति आदेशों की भी जांच की है। सम्भवतः टीम शुक्रवार को भी रतलाम रह सकती है। इसके अलावा भी गुड्स सहित अन्य कामों के लिए तैनात कर्मचारियों के पदस्थ अवधि की भी जानकारियां ली गई।

राजस्व के लिए कर्मचारी से काम लेना वाज़िब लेकिन खरीदी मामले में गड़बड़ी की आशंका:- नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर मुंबई विजिलेंस सदस्य का तर्क है कि राजस्व अर्निंग के लिए किसी कर्मचारी से तबादलें के बाद भी पूर्व के काम में सहायता ली जा रही है। तब इसे अनधिकृत रूप से भले ही वाज़िब कहा जा सकता है। लेकिन सेंसेटिव वर्क में यदि कोई सीएमआई 10-20 साल से एक ही काम मे तैनात है। तब वह जांच के दायरे में आना स्वाभाविक है।

इसलिए उठने लगी उंगलियां:- दरअसल चेकिंग कर्मचारियों सहित इंदौर में कुछ कर्मचारियों पर तबादलों की सख्ती से विभाग की प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल उठे है। सूत्रों के मुताबिक इंदौर में दिव्यांग सीनियर सीएमआई के रिटायरमेंट के मात्र 6 माह शेष है। बावजूद महू तबादला कर दिया गया। जबकि इंदौर में ही कार्यरत डिप्टी एसएस कमर्शियल 10 सालों से तैनात है। दरअसल स्टेशन की सफाई का कार्य कुछ सालों से मेकेनिकल विभाग के जिम्मे है। इसलिए डिप्टी एसएस कमर्शियल का पद जिम्मेदारी विहीन रह गया है।
दूसरी ओर चेकिंग कर्मचारियों के तबादलों की परेशानियों की फेहरिस्त भी लंबी है। पहले चेकिंग से मैनिंग में तबादले किए जाते थे। अब इस प्रकिया पर भी रोक लगा दी गई। ये कर्मचारी पारिवारिक परेशानियों से जूझ रहे है। ऐसी अनियमितताओं की शिकायतें भी विजिलेंस तक पहुंची है।

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