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मैं हूं ‘रशोकि रमाकु”…. किशोर दा के कंठ में घुल गई थी खंडवे वाले लालाजी की जलेबी की मिठास

-रतलाम पहुंची किशोर दा वाली जलेबी, तीन दिन तक देती रही स्वाद।

जलज शर्मा की ख़ास रिपोर्ट
रतलाम (न्यूज जंक्शन-18)। अपने गानों के साथ खुशमिजाजी व मजाकिया अंदाज़ के लिए मशहूर किशोर दा का खंडवा की दूध-जलेबी से खूब वास्ता रहा। लंबे समय तक वहां की जलेबी मुंबई मंगवाकर खाते रहे। मज़ाकिया तर्ज बनाकर दादा अपने मित्रों से कहते थे कि ‘दूध जलेबी खाएंगे खंडवा में ही बस जाएंगे’।

फ़ोटो-हरीश निमावत, जवाहर नगर रतलाम।

जिन जलेबी वाले लालाजी की हम बात कह रहे है। वे रतलाम जवाहर नगर निवासी हरीश निमावत के मामा ससुर रहे है। इन्होंने अपने मामा ससुर के शहर खंडवा से जुड़े किशोर दा के किस्से शेयर किए तो लगा कि ये खत्म न हो, सुनते ही जाए।

फ़ोटो-अपने भाई के साथ लालाजी के पोते बादल शर्मा (दाएं)।

यह तो सभी जानते है कि अपने पैतृक शहर खंडवा से किशोर दा को कितना लगाव था। वहां के साथी-संगियों व ईष्ट मित्रों को भी किशोर दा कभी भूलते नहीं थे। कई बार वे गानों में या चर्चाओं में बाबूभाई रंगरेज, गोविंद जी झवर जैसे सहपाठियों का ज़िक्र कर चुके हैं। वहीं दूध जलेबी के शौकीन किशोर दा ने लालाजी जलेबी भंडार की दुकान को भी पूरे देश-दुनिया में फेमस कर दिया।
दो वर्ष पूर्व हरीश भाई आज ही के दिन किशोर दा के जन्मदिन पर खंडवा गए थे। तब लालाजी की जलेबी खाने का मुझे भी सौभाग्य मिला। जलेबी के हर स्वाद में मुझे किशोर दा के उस मजकिये लहज़े में बनाई तर्ज की सच्चाई दिखाई दी। जलेबी की शुद्धता देखिए कि मैंने शक्कर चढ़ी वह जलेबी तीन दिन तक खाई। तब भी उसका स्वाद पहले दिन से और बेहतर होता गया।

फ़ोटो- लालाजी जलेबी भंडार पर लालाजी की तस्वीर के पास लगी किशोर दा की तस्वीर। (नियमित रूप से किशोर दा को जलेबी का भोग लगाया जाता है।)

बचपन से रियाजी रहे दादा, फर्शी की कुर्सी पर बैठकर टेबल बजाते थे:- किशोर दा की यादों से जुड़े किस्सों की बात जब हरीश भाई से की तो उन्होंने दादा से जुड़े वाकियों की फोन पर कुछ चर्चाएं सांझा कराई। इनके साले बादल शर्मा बताते है कि खंडवा में हमारी दुकान के पीछे ही किशोर दा का घर था। उस समय दादाजी स्व. हीरालाल शर्मा (लालाजी) दुकान चलाते थे। किशोर दा बचपन में गली से दौड़कर दुकान तक चले आते और दुकान पर फर्शी की बनी टेबल पर बैठकर दूध जलेबी खाते थे। उस समय दूध भी गिलास भर के दिया जाता था। दुकान पर कई बार टेबल बजाकर रियाज़ भी करते थे। मुंबई में स्थापित होने के बाद भले ही किशोर दा व्यस्तता के दौर में थे। बावजूद खंडवा से मिलने आने वाले अपने मित्रों से जलेबी जरूर मंगवाते थे।
बादल बताते हैं कि वर्ष 1983 के करीब किशोर दा का खंडवा स्थित अनाज मंडी परिसर में लाइव शो प्रोग्राम था। किशोर दा दुकान के सामने कार से निकले तो आवाज़ लगाते हुए गए कि मेरे लिए जलेबी भिजवाना। हालांकि उस समय उनका गला खराब था। उनके पारिवारिक डॉक्टर ने तली चीज़े खाने से इंकार किया था। बावजूद किशोर दा मौका छोड़ने वाले कहां थे। शो से पहले उन्होंने आखिर जलेबी खाई। इसके बाद शो शुरू हुआ तो उनके गाए गानों ने लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया।

 

स्टेशनों के नाम उल्टा बोलते थे दादा:- किशोर दा की सनक मिज़ाजी से जुड़े किस्सों को लेकर बताते हैं कि दादा मीटरगेज कालीन ट्रेन में बैठकर खंडवा से इंदौर (पढ़ाई के दौर में) आते थे। तब बीच के तमाम स्टेशनों के नाम के अक्षरों को वे उल्टा जमाकर बोलते और गाना भी जोड़ देते थे। ये कला भी आगे चलकर वे अपने लाइव शो में भी दिखाते आए। शो से पहले परिचय देते वक्त वे खुद के लिए किशोर के बजाय ‘रशोकि रमाकु’ जैसे शब्दों का उपयोग कर सभी को हंसाते थे।

इस बार दूर शहरों से खंडवा पहुंचे किशोर प्रेमी:- बादल के मुताबिक वर्तमान में केरियोके सिंगिंग की सुविधा के चलते कई लोग गानों के शौकीन हो चले है। इसलिए इस वर्षगांठ पर दूर शहरों से किशोर दा के प्रशंसक खंडवा पहुंचे है। देहरादून, राजकोट, उड़ीसा, आसाम से ग्रुप बनाकर दर्जनों लोग आए है। इनके लिए दुकान के बाहर म्यूज़िक साउंड सेट लगाया है। दिनभर उत्सवी माहौल रहेगा।

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