पेटी व्यवस्था बेपटरी…ड्राइवर की पेटी उठाने में लगे मजदूर आधी रात भागे, फिर से पॉइंट्समैन को लगाया, उठवाना शुरू किया
-दो माह से चल रही समस्या का निकाल नहीं करवा पा रहे जिम्मेदार।
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रेलवे में गार्ड व ड्राइवर्स की पेटियां (लाइन बॉक्स) गाड़ियों में रखने की दो माह पहले बिगड़ी व्यवस्था अभी भी पटरी पर नहीं लौटी है। तालमेल के अभाव व समस्या का ठोस निदान न होने से यह समस्या और गहराने लगी है। नए ठेकेदार ने दो माह पहले शुरू किए काम को छोड़ दिया। पूर्व ठेकेदार को विभाग के अधिकारी काम देना नहीं चाहते है। ऐसे में पॉइंट्समैन व बाहरी लेबर से पेटियां उठवाई जा रही है।
बिगड़ी व्यवस्था की बदइंतजामी यहां तक पहुंच गई कि गुरुवार को लगाए गए मजदूर आधी रात में ही काम छोड़कर चलते बने। बाद में फिर से पॉइंट्समैन को इस काम में जुटाया गया।
बता दें कि गार्ड एवं ड्राइवर की पेटी को उठाकर ट्रेनों में रखने की व्यवस्था को रेलवे ने लगभग दशक से ठेका प्रणाली से शुरू किया था। दरअसल पेटी में गार्ड ड्राइवर के टूल्स सहित अन्य जरूरी सामान रखे होते है। जिनका उपयोग वे कई बार रेल मार्ग पर आपात स्थिति में करते है।
दो माह पूर्व ठेका बदला तो बाहर की फर्म को काम दिया गया। बताया जा रहा कि फर्म ने किसी दबाव के चलते दो माह पहले काम छोड़ दिया। इसके बाद पॉइंट्समैन से पेटियां उठवानी शुरू की। विरोध हुआ तो रेलवे ने दैनिक मजदूरी के आधार पर मजदूरों से यह काम करवाना शुरू किया।
पूर्व की फर्म से प्रशासन का किनारा:- इधर, अकुशल बाहरी वमजदूरों से जब पेटियां उठवाई गई तो कई बार ट्रेनें लेट हुई। मामले में प्रशासन व विभाग के अधिकारी को आशंका है कि दिल्ली की फर्म को काम दिया था। लेकिन संभवतः पूर्व के फर्म ठेकेदार द्वारा काम न करने का दबाव बनाया। इस वजह से वह काम छोड़कर चला गया। इसी आशंका के चलते प्रशासन द्वारा पूर्व के फर्म ठेकेदार को दोबारा काम देने से किनारा किया जाने लगा। इस बीच पेटी उठाने की समस्या हर दिन बढ़ती चली गई।
पॉइंट्समैन का विरोध जारी:- हालांकि पेटियों के काम में विभाग पॉइंट्समैन को जुटाने का खामियाजा भी प्रशासन को भुगतना पड़ रहा है। दरअसल इस कैडर की भी रेलवे में कमी है। साथ ही इनके जिम्मे शंटिंग सहित सेक्शन के काम भी है। इसे देखते ये विरोध में जुटे है। मामले में यूनियन बाजी भी हुई। तब कहा गया कि पॉइंट्समैन की सेवाशर्तों में पेटियां उठाना शामिल है। इन उलझनों के चलते मामला अभी भी बेपटरी है। इसका सीधा नुकसान समयबद्ध रेल परिचालन को लेकर उठाना पड़ रहा है।
मामले में रेलवे पीआरओ खेमराज मीणा से प्रशासन का पक्ष जानना चाहा। लेकिन ऑपरेटिंग विभाग से संतोषप्रद जवाब नही ले पाए। दो घंटे में भी जानकारियां नही दे सके।
