Logo
ब्रेकिंग
रतलाम मंडल में ‘स्टोर्स एंड वेंडर मीट–2026’ का आयोजन, लगभग 120 विक्रेताओं ने लिया भाग 36 साल चुनौतियों के सिर चढ़कर बोली दिव्यांगता....अक्षमता को मात दे रेल सेवा करते रहे मुकेश तिवारी, रे... रतलाम मालगोदाम में विजिलेंस जांच से हड़कंप: डेम्बरेज-व्हार्फेज में गड़बड़ी की आशंका, कर्मचारियों पर ... रतलाम रेल मंडल में मान्यता प्राप्त यूनियनों की सदस्यता पर जंग: WRMS और WREU दोनों का नंबर वन होने का... 8लेन की सड़क बनी ओपन डीज़ल प्लांट.... दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर बायोडीजल से भरा टैंकर पलटा, चालक घाय... तबादलों के खेल में फुटबॉल बने कर्मचारी?.... रतलाम DRM ऑफिस का कार्मिक विभाग सुर्खियों में, गोपनीय शा... एमजे रेल रोड प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर एवं हम-लोग संस्था के अध्यक्ष सुभाष जैन को मिला रतलाम गौरव... लीकेज से मिली राहत: सीआईजी के निरीक्षण के बाद 50 से अधिक क्वार्टरों में शेड लगाने का काम शुरू केबिन की कहानी का ऐसा अंत, "झगड़ा झूठा, कब्जा सच्चा", बाबा सोमनाथ का ऐसा महाराष्ट्र प्रेम...चंदा उगा... राहत मिली लेकिन उलझन बरकरार....इंदौर रेलवे हॉस्टल बंद करने के आदेश पर कर्मचारी नेताओं के साथ DRM से ...

एक टीटीई यह भी …जिन्‍होंने ट्रेन में रसीद बनाकर रेलवे की अर्निंग बढ़ाई, ग्रामीणों के स्‍वास्‍थ की भी चिंता की

-22 साल तक सेवा में जुटी रही शांता बाई, अधिकारी बोले ‘दीदी’ आपने खूब रेलवे की सेवा की।
न्‍यूज जंक्‍शन-18
रतलाम। रेलवे में ऐसे बिरले ही चेकिंग कर्मचारी मिलते है, जो शासकीय काम पूरा करने के अलावा मानव सेवा के लिए भी समय निकाले। सीटीआई पद से रिटायर हुए अनिल उपाध्‍याय इसकी पुख्‍ता मिसाल है। टिकिट चेकिंग में काम के दौरान ट्रेनों में बगैर टिकट यात्रियों की धरपकड़ करते थे। शासकीय कार्य के अलावा इनकी जिंदगी का दूसरा पहलू मानवता से जुड़ा भी रहा। ये गरीबों के स्‍वास्‍थ्‍य की चिंता भी करते रहे।
वहीं लेखा विभाग में 22 साल तक काम को पूजा मानने वाली शांताबाई गुर्जर ने पूरे समय समर्पण भावना से अपने काम को अंजाम दिया। ये सेवानिवृत हुई तो अधिकारी स्‍वयं बोले कि दीदी आपने खूब रेलवे की सेवा की है।

ग्रामीण क्षेत्रों में आधा दर्जन से अधिक स्‍वास्‍थ्‍य शिविर लगाए

पहले हम बात करते हैं सीटीआई पद से इस माह सेवानिवृत हुए अनिल उपाध्‍याय की। 32 साल की नौकरी के उपरांत इन्‍होंने टिक‍िट चेकिंग में शिद्दत से काम किया। इन्‍हें बेहतर अर्निंग के लिए सामूहिक अवार्ड से भी सम्‍मानित किया गया। ट्रेन में कठोरता से बगैर टिकिट यात्रियों की जुर्माना रसीद बनाने में कोई कोताही नहीं बरती। बल्कि उन्‍हें टिकट लेकर यात्रा करने की सीख भी दी। वहीं शासकीय ड्यूटी के बाद इनका मन मानव सेवा में लगा रहा। ग्रामीण प्रेम के चलते इन्‍हें देहात एरिया में रहने वाले लोगों के स्‍वास्‍थ्‍य की चिंता रहती थी। यहीं वजह है कि उपाध्याय ने अब तक आधा दर्जन से अधिक स्‍वास्‍थ्‍य शिविर आयोजित किए है। वहीं जरुरतमंद, गरीब, किसान व आदिवासी समाज के लोगों को कपड़े सहित खाने-पीने की वस्‍तुएं भी उपलब्‍ध कराते रहे। सेवानिवृत्ति के दिन डीआरएम रजनीश कुमार ने पीठ थपथपाई।

‘दीदी’ को अधिकारियों ने दी बिदाई

अब बात हो रही है अनुकंपा में रेल सेवा में लगी शांताबाई गुर्जर की। डीआरएम ऑफिस में 22 साल तक इनकी सेवाएं सराहनीय रही। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अधिकारियों ने बिदाई में इनके लिए विशेष संबोधन दिया। इतना ही नहीं, बिदाई समारोह के आयोजन में सीनियर डीएफएम अंकित सोमानी, सीनियर डीपीओ अरिमा भटनागर, एडीएमएफ कृष्‍ण कुमार सहित स्‍टाफ कर्मचारी विशेष तौर पर शरीक हुए। सीनियर डीएफएम सोमानी ने बिदाई में कहा कि हम इन्हें दीदी कहकर संबोधित करते थे। दीदी ने खूब रेलवे की सेवा की है।  ईश्‍वर सेवानिवृत्ति उपरांत बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य प्रदान करें।

Leave A Reply

Your email address will not be published.