काशी-महाकाल एक्सप्रेस में विजिलेंस का छापा, अटेंडेंट व सफाई कर्मचारी टीटीई बनकर यात्रियों को कोच में चढ़ाते मिले
-9 कोच अटेंडेंट से 20 हजार व ओबीएचएस स्टाफ से 3 हजार रुपए नगदी जब्त।
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। ट्रेनों में इन दिनों टीटीई के बजाय कोच अटेंडेंट तथा ओबीएचएस स्टाफ यात्रियों को कोच में चढ़ाकर उनसे वसूली भी कर रहे है। विजिलेंस टीम ने जब 14 जून को गाड़ी संख्या 20413 काशी-महांकाल एक्सप्रेस में बैरागढ़ से उज्जैन सेक्शन के बीच आकस्मिक जांच की गई। तब ऐसी अनियमितता तथा अवैध वसूली उजागर हो गई। 9 कोच अटेंडेंट से 20 हजार रुपए से अधिक तो सफाई करने वाले ओबीएचएस स्टाफ से 3 हजार रुपए जब्त किए गए।
यह अब तक की ट्रेन चेक में विजिलेंस की सबसे बड़ी कार्यवाही बताई जा रही है। ट्रेन वर्किंग से जुड़े सारे रेलवे कर्मचारियों और प्राइवेट कर्मचारियों को एक साथ सुनियोजित योजना बनाकर जांच की गई।
कार्रवाई में यह अनियमितताएं पाई गईं
-ट्रेन में तीनों स्लीपर कोचों की जांच में लगभग 40 अनियमित यात्री पाए गए।जिनसे लगभग 20 हजार रुपए की राशि वसूल की गई। सवाल यह है कि ट्रेन के स्लीपर कोच की मैनिग (ड्यूटी) के लिए किसी भी चेकिंग स्टॉफ को क्यों नहीं लगाया गया।
-कोच अटेंडेंट, ओबीएचएस स्टाफ अनाधिकृत यात्रियों को कोच में ले जाते हुए पकड़े गए।
-एक दूसरे मंडल का एक चेकिंग स्टाफ बिना मुख्यालय अवकाश के पेंट्रीकार में बैठा पाया गया। कोच अटेंडेंट ने उसे पैसे देना कबूल किया। तब उसकी जांच भी की गई तो टीटीई के पास निजी नकदी के रूप में 3500 रुपए से अधिक अघोषित निकली। जिसे रेल राजस्व में जमा किया।
-सभी कोच अटेंडेंट की निजी नकदी की जांच की गई। कुल 09 कोच अटेंडेंट के पास से 20 हजार रुपए से अधिक की अघोषित नकदी पाई गई। यह राशि इनके द्वारा यात्रियों को अवैध तरीके से कोच में बैठाकर लाने के लिए ली थी। अघोषित नकदी रेलवे राजस्व में जमा करवाया गया। जिन यात्रियों ने अटेंडेंट व ओबीएचएस स्टॉफ को पैसे दिए थे। उनसे अतिरिक्त किराया और दंड वसूल किया गया।
5- सफाई के लिए कार्यरत ओबीएचएस स्टाफ के निजी नकदी की जांच में 3 हजार रुपये से अधिक अघोषित पाए गए। उसने यात्री से अवैध रूप से लिए थे। इसे भी रेलवे राजस्व में जमा किया गया।
6- नियमानुसार पेंट्रीकार के सभी वेंडर को निजी नकदी घोषित करना होती है। परंतु यह राशि किसी भी वेंडर ने घोषित नहीं की गई थी। ऐसे में लगभग 5 हजार रुपए की अघोषित राशि रेलवे राजस्व में जमा की गई।
7- कुछ यात्रियों ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने कोच परिचारकों और ओबीएचएस स्टॉफ को अनुचित राशि दी थी। पर उन्हें कोई रसीद नहीं मिली।
इस पर कोच परिचारकों और ओबीएचएस स्टॉफ ने भी अपने बयान में अपनी गलती स्वीकार की।
