रेलवे लॉबी में बैठे थे 7 ट्रेन क्लर्क, अब 3 से ही काम चलेगा, गार्ड को हेड क्वार्टर से बाहर ही भरना होगा सीटीआर
-चंद मिनटों के काम में पूरी ड्यूटी की मौज पर लगा प्रतिबंध।
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रतलाम रेल मंडल मुख्यालय स्थित रेलवे स्टेशन की क्रू लॉबी पर गार्ड की ड्यूटी का ट्रेवलिंग अलाउंस (टीए) से संबंधित डाटा (सीटीआर) भरने के काम में प्रशासन ने फेरबदल कर वहां ट्रेन क्लर्क (टीएनसी) के पद कम करने का फैसला लिया है। हालांकि यह काम गार्ड के टीए की गणना से जुड़ा होने से अहम है। लेकिन इसके लिए 7 क्लर्क नियुक्त थे। जबकि यह काम आधे क्लर्क ही आसानी से पूरा कर सकते है। ट्रेड यूनियन के दबाव में मंडल के शीर्ष पदाधिकारी से लेकर कर्मचारी खूब मौज करते आए। आलम यह है कि कुछ तृतीय श्रेणी पद पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी क्लर्क का काम कर रहे है। मनमानी रोकने प्रशासन ने वर्ष 2019 में ही लॉबी में पद कम करने का फैसला लिया था। लेकिन कोरोना महामारी के चलते बात आई-गई हो गई। अब डीआरएम रजनीश कुमार ने आर्थिक मितव्ययिता को देखते सख्ती से पोस्ट कम करने का फैसला लिया है। इससे वहां जुटे अतिरिक्त कर्मचारियों का उपयोग कहीं और लिया जा सकेगा। वहीं रेलवे को तकरीबन 4 लाख रुपए माह की बचत भी होगी।
हेड क्वार्टर की बजाय ऑफ ड्यूटी पर बनवाया होगा टीए
प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक रतलाम लॉबी पर टीएनसी की पोस्ट पर सीटीआर भरने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। रतलाम हेडक्वार्टर पर अब गार्ड (ट्रेन मैनेजर) को दूसरे हेडक्वार्टर पर भी रेस्ट लेकर आना होगा। रतलाम से ट्रेन छोड़कर स्पेयर में आने वाले गार्ड को ऑफ ड्यूटी करने के पश्चात वहां टीए बनावाकर ही आना होगा। सीनियर डीओएम ने इस मामले मे आदेश जारी कर दिया है। अब रतलाम रेलवे स्टेशन पर लॉबी में तीन टीएनसी कार्य करेंगे। एक बुकिंग पर और दूसरा सीएमएस और तीसरा fois पर नियुक्त रहेंगे। अगर गॉर्ड टीए बनवाकर अपने हेडक्वार्टर आएंगे तो सीएमएस टीएनसी का काम बेहद कम हो जाएगा। इसे 3 टीएनसी आसानी से पूरा कर लेंगे।
आसानी से मिल सकेगा अवकाश
रेलवे सूत्रों के अनुसार लॉबी की नई व्यवस्था में रेलवे को 4 कर्मचारी की बचत होगी। यहां काम कम होने से कर्मचारियों को भी आसानी से अवकाश मिल पाएगा। साथ ही क्लास 4 ग्रैंड के कर्मचारियों जो कि लॉबी में नियुक्त रहे है। उनको भी आसानी से उनके मूल स्थान पर भेज दिया जा सकेगा।
ट्रेड यूनियन का था दबाव
लॉबी में क्लास 4 के कर्मचारी क्लास 3 में काम करने के पीछे ट्रेड यूनियन का दबाव बताया जा रहा है। एक प्रशासनिक अधिकारी की माने तो एक शिफ्ट में टीएनसी 8 घंटे की ड्यूटी में केवल 10 से 15 सीटीआर भरते है। एक सीटीआर भरने में बमुश्किल 2 से 3 मिनिट लगते है। रतलाम मुख्यालय के उज्जैन, दाहोद, चित्तौड़, इंदौर में भी एक ही टीएनसी द्वारा यह सब कार्य सुचारू ढंग से किया जा रहा है। अधिकारी ने यह भी बताया कि उससे रेलवे को कम से कम 4 लाख रुपए प्रतिमाह और 50 लाख रुपए सालाना की आर्थिक बचत भी होगी। हालांकि यह कार्य 2019 मे करने की कोशिश की गई थी। लेकिन कुछ कोरोना ने काम बिगाड़ा तो कुछ ट्रेड यूनियन का भी दवाब था। इसलिए इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया था। अब देखना होगा कि रेलवे प्रशासन इसमें कितना सफल होता है। मामले में पीआरओ खेमराज मीणा का कहना है प्रशासनिक हित मे कुछ फेरबदल किए जाते है।
