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लापरवाही का अड्डा बना रतलाम मंडल रेलवे अस्पताल: करोड़ों का फंड स्वाहा, एसी बंद और छुट्टियों के नाम पर मरीजों को दिखाया बाहर का रास्ता

न्यूज़ जंक्शन-18

​रतलाम। करोड़ों रुपए के सालाना फंड और आधुनिक सुविधाओं का दावा करने वाला रतलाम मंडल रेलवे अस्पताल इन दिनों बदहाली और अव्यवस्थाओं की मार झेल रहा है। रेल मंत्रालय द्वारा रेल कर्मचारियों, उनके परिजनों और सेवानिवृत्त कर्मियों के बेहतर इलाज के लिए हर साल पर्याप्त बजट भेजा जाता है। संविदा सहित नियमित डॉक्टर्स का भरपूर स्टाफ है। लेकिन धरातल पर मरीजों को सिर्फ अव्यवस्था और संवेदनहीनता ही मिल रही है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) राजेश कुमार बेन जमीनी व्यवस्थाओं में सुधार करने के बजाय पूरी तरह से बेखबर बने हुए हैं।

​गर्मी में तप रहे वार्ड, बंद पड़े हैं एसी:- अस्पताल के मेल और फीमेल वार्ड की स्थिति बेहद दयनीय है। मरीजों के आराम के लिए लगाए गए सभी एसी लंबे समय से बंद पड़े हैं। इन दिनों वर्तमान में भी उमस और तापमान में गर्मी हैं। जिससे इन हालातों में और उमस में भर्ती मरीज तथा उनके तीमारदार बेहाल होने को मजबूर हैं। सुविधाओं के नाम पर भारी-भरकम बजट ठिकाने लगाने वाले इस अस्पताल में मरीजों को बुनियादी राहत तक नहीं मिल पा रही है।

​ओपीडी में घंटों कतार, गैर-जिम्मेदार रवैया:- अस्पताल के ओपीडी का आलम यह है कि यहां प्रतिदिन मरीजों की भारी भीड़ उमड़ रही है। जांच और इलाज करने वाले डॉक्टर तथा स्टाफ अपनी जिम्मेदारियों से भागते नजर आ रहे हैं। इलाज और पैथोलॉजी जांच के लिए बुजुर्ग रिटायर्ड कर्मचारियों और परिजनों को घंटों कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है।

​3 दिन की छुट्टी आई तो बच्चे को किया रेफर, दोहरे रवैये पर उठे सवाल:- अस्पताल प्रबंधन की संवेदनहीनता का एक बड़ा मामला हाल ही में सामने आया। 11 सितंबर 2026 शुक्रवार को चाइल्ड वार्ड में गले के इंफेक्शन से पीड़ित एक मासूम बच्चा भर्ती हुआ। आगामी तीन दिनों तक अस्पताल में अवकाश (छुट्टी) होने के कारण जिम्मेदार डॉक्टरों ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना चाहा। बच्चे को सीधे काटजू नगर स्थित रेलवे अनुबंधित निजी अस्पताल रेफर कर दिया। जहां उसे साधारण जनरल वार्ड में भर्ती किया गया।

हजारों रेल कर्मचारियों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे इस अस्पताल के लचर ढर्रे पर अब तक उच्च अधिकारियों ने कोई संज्ञान नहीं लिया है, जिससे कर्मचारियों और उनके परिवारों में भारी असंतोष पनप रहा है। मामले में सीएमएस राजेश कुमार बेन से उनका पक्ष जानना चाहा। लेकिन फोन रिसीव नहीं किया।

​ दोहरे रवैये को लेकर रेल कर्मचारियों में भारी रोष:- 

– ​जब कोई गंभीर मरीज रेलवे अस्पताल से किसी निजी या टाइअप अस्पताल में रेफर किए जाने की मांग करता है, तो उसे नियमों का हवाला देकर मना कर दिया जाता है।

– वहीं दूसरी ओर, जिन मरीजों का इलाज रेलवे अस्पताल में ही सामान्य रूप से हो सकता है, उन्हें छुट्टियों का बहाना बनाकर दूसरे अस्पतालों में धकेल दिया जाता है।

-भारी भरकम वेतन के मुताबिक मरीजों का उपचार नही। वहीं रैफर किए स्थानीय निजी अस्पतालों में नार्मल डिग्रीधारी डॉक्टर्स से उपचार करवाया जा रहा। डीआरएम की पत्नी अर्चना शर्मा स्वयं मंडल चिकित्सालय में सेवा दे रही है।

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