रतलाम मालगोदाम में विजिलेंस जांच से हड़कंप: डेम्बरेज-व्हार्फेज में गड़बड़ी की आशंका, कर्मचारियों पर रिकवरी की तलवार
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रेलवे मालगोदाम पर जुलाई 2026 माह का आखिरी सप्ताह विजिलेंस जांच की भारी गहमागहमी में बीता। विजिलेंस इंस्पेक्टर विनीत जैन द्वारा अलग-अलग तारीखों में दो बार की गई पड़ताल और कर्मचारियों के बयानों के बाद मालगोदाम से लेकर डीआरएम कार्यालय तक हड़कंप मचा हुआ है। आशंका जताई जा रही है कि माल लदान से मिलने वाली अतिरिक्त आय के मुख्य स्रोतों विलंब शुल्क (Demurrage) और स्थान शुल्क (Wharfage) में बड़े पैमाने पर अनियमितता हुई है।
जांच के दौरान मालगोदाम का रिकॉर्ड भी पूरी तरह अस्त-व्यस्त पाया गया। इस बीच, कर्मचारियों की कमी का हवाला देते हुए मुख्य माल पर्यवेक्षक (CGS) अनिल नेका को स्थाई ड्यूटी के लिए डीआरएम ऑफिस भेज दिया गया है।
बता दें कि न्यूज़ जंक्शन-18 द्वारा जुलाई 2026 में ही विलंब शुल्क (Demurrage) में अनियमितता की आशंका को लेकर खनर का प्रकाशन किया था।
16-17 जुलाई: पहली जांच में मिले कई सुराग:- विजिलेंस की पहली कार्रवाई 16 और 17 जुलाई 2026 को हुई। जब इंस्पेक्टर विनीत जैन ने खुद मालगोदाम पहुंचकर मौके का मुआयना किया। जांच के दौरान प्रथम दृस्टिया ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी नीलेश जायसवाल नदारद मिला। (जिसने बाद में पारिवारिक समस्या का हवाला दिया)। सूत्रों से सूचना मिली कि मौके पर प्राइवेट कैश भी तय सीमा से कम पाया गया। जिसके बाद नीलेश को तलब किया गया।
27 जुलाई को बयानों का दौर और गंभीर खुलासे:- 27 जुलाई को विजिलेंस इंस्पेक्टर ने दोबारा दबिश दी और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। दिन में कर्मचारी नीलेश जायसवाल और रात की पाली में राहुल जाट से पूछताछ की गई। इस क्रम में अगले दिन विजिलेंस इंस्पेक्टर जैन द्वारा स्टेशन बुलाकर कर्मचारी राहुल कटारिया और योगेंद्र बघेल के बयान लिए गए।
पद कहीं, ड्यूटी कहीं: कमर्शियल विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर:- जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, हैरत अंगेज अनियमितताएं सामने आईं। विजिलेंस को पता चला कि कमर्शियल विभाग द्वारा मालगोदाम में पदस्थ कर्मचारियों से डीआरएम ऑफिस में सेवाएं ली जा रही थीं। कर्मचारी हर्षा चौहान कागजों में मालगोदाम में नियुक्त हैं। लेकिन उससे कैश ऑफिस में ड्यूटी ली जा रही हैं। कर्मचारी अब्दुल फरीद की भी पदस्थापना मालगोदाम की है। लेकिन कार्य डीआरएम ऑफिस कंट्रोल में लिया जा रहा। जबकि पुराना रिकॉर्ड खंगालने पर अन्य कर्मचारी विश्वम्भर दयाल के बारे में पता चला कि ये भी लंबे समय तक अन्य स्थान पर कार्यरत रहे। (हाल ही में इनका ट्रांसफर पार्सल ऑफिस किया गया है)।
कर्मचारियों पर रिकवरी का खतरा:- प्रशासनिक आदेशों के तहत इन कर्मचारियों ने अन्य स्थानों पर सेवाएं दीं, लेकिन अब रेलवे द्वारा भुगतान किए गए ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) की रिकवरी का खतरा इन्हीं बेकसूर कर्मचारियों पर मंडरा रहा है।
CMI गुड्स की भूमिका पर उठे सवाल:- जांच के दौरान मालगोदाम के रिकॉर्ड्स का रखरखाव बेहद खराब पाया गया। नियमानुसार, डीआरएम ऑफिस में कार्यरत सीएमआई (CMI) गुड्स योगेश पाटिल की जिम्मेदारी मालगोदाम जाकर नियमित जांच-पड़ताल करने की है। आरोप हैं कि सीएमआई पाटिल पिछले लगभग एक दशक के अधिक समय से एक ही टेबल पर जमे हुए हैं। यह भी सामने आया कि ये अधिकांश समय डीआरएम ऑफिस में बैठकर ही व्यवस्थाएं संचालित कर रहे हैं। जिससे जमीनी स्तर पर निगरानी का अभाव बना रहा। विजिलेंस की इस पूरी कार्रवाई के बाद अब देखना यह होगा कि इस मामले में गाज किस पर गिरती है और प्रशासनिक स्तर पर क्या सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं।
