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ऐसी भी बड़ी कार्रवाई…..कर्मचारियों पर सख्ती बरतने वाले पूर्व सहायक कार्मिक अधिकारी पर गिरी गाज: अनियमितता के मामले में थमाई गई SF-5 चार्जशीट

न्यूज़ जंक्शन-18

रतलाम। निचले कर्मचारियों की छोटी-छोटी गलतियों पर सख्त कार्रवाई कर कड़ा रुख अपनाने वाले रेलवे के एक अधिकारी अब खुद ही विभागीय जांच के शिकंजे में फंस गए हैं। डीआरएम ऑफिस में  कार्यरत रहे और हाल ही में मुंबई स्थानांतरित हुए सहायक कार्मिक अधिकारी (APO) एएल लबाना को विभागीय जांच के दौरान गंभीर अनियमितताएं उजागर होने के बाद SF-5 (मेजर पेनल्टी) चार्जशीट जारी की गई है।

विजिलेंस जांच और वित्तीय लेन-देन का मामला :- विभागीय सूत्रों के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई कार्मिक विभाग में पूर्व में हुई विजिलेंस रेड से जोड़कर देखी जा रही है। लगभग 6 महीने पहले कार्मिक विभाग के ही कर्मचारी हरिकृष्ण बारगे पर विजिलेंस विभाग ने कार्रवाई की थी। उस दौरान जांच टीमों ने संबंधित कर्मचारी के बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन को गहराई से खंगाला था।
जांच के तार जब आगे बढ़े, तो तत्कालीन सहायक कार्मिक अधिकारी की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई। बताया जा रहा है कि जांच में अधिकारी के खाते से लाखों रुपए संदिग्ध बैंक ट्रांजेक्शन की बात सामने आई है। वित्तीय अनियमितताओं और संदिग्ध लेन-देन के मजबूत सबूत मिलने के बाद ही प्रशासन ने अधिकारी के खिलाफ यह कड़ा रुख अपनाया है।

दूसरों को दंडित करने वाले खुद कार्रवाई के घेरे में :- बता दें कि अधिकारी दाहोद में भी पदस्थ रहे है। दाहोद से रतलाम तक चर्चाओं में रहे। अधिकारी के रतलाम रेल मंडल में कार्यकाल के दौरान की कार्यप्रणाली को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कर्मचारियों का कहना है कि अपने कार्यकाल के दौरान यह अधिकारी मातहतों और कर्मचारियों को हर छोटी से छोटी गलती पर दंडित करने और अनुशासनात्मक कार्रवाई करने से कतई नहीं चूकते थे। लेकिन कल तक नियमों का हवाला देकर कर्मचारियों पर कड़ाई करते थे। आज वही खुद अनियमितता के गंभीर आरोपों में घिर चुके हैं।
विभागीय स्तर पर मेजर पेनल्टी (SF-5) की चार्जशीट मिलने के बाद अब अधिकारी पर बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की तलवार लटक रही है। मामले में सीपीआरओ विनीत अभिषेक से जानकारी लेना चाही। लेकिन फोन पर संपर्क नहीं हो पाया।

रेलवे में मेजर पैनल्टी कहलाती है SF-5 चार्जशीट:- रेलवे की प्रशासनिक कार्यशैली में SF-1 से SF-11 तक के रेलवे फॉर्म्स में SF-5 चार्जशीट को सबसे सख्त माना जाता है। क्योंकि यह साधारण चेतावनियों या छोटी शास्तियों (जैसे SF-11) के विपरीत सीधे नौकरी, वेतन और करियर पर स्थायी असर डालता है।
<span;>रेलवे सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1968 (D&A Rules) के तहत, जब किसी अधिकारी या कर्मचारी पर बेहद गंभीर आरोप (जैसे भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता, धोखाधड़ी, कर्तव्य में बड़ी लापरवाही) लगते हैं। तब उन्हें SF-5 जारी किया जाता है।

​SF-5 क्यों और कब दिया जाता है, क्या करवाई संभव?  

गंभीर वित्तीय अनियमितता: रिश्वतखोरी, संदिग्ध बैंक लेन-देन या गबन के मामलों में।
– गंभीर कदाचार: कार्यक्षेत्र में शक्ति का दुरुपयोग करना, रिकॉर्ड्स में हेरफेर या संरक्षा (Safety) से जुड़े मामलों में गंभीर लापरवाही बरतना।
– सेवा से बर्खास्तगी: कार्रवाई में नौकरी से निकाल देना और भविष्य में किसी भी सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य घोषित करने जैसे प्रावधान शामिल है।
-सेवा से हटाना (Removal): नौकरी से निकाल देने (लेकिन भविष्य की सरकारी नौकरियों के लिए पूरी तरह प्रतिबंध नहीं)। तथा समय से पहले जबरन रिटायर कर देने जैसी कार्रवाई शामिल है।
– पद अवनति: उच्च पद से घटाकर निचले पद या वेतनमान पर डिमोट कर देना।
– भविष्य की वेतन वृद्धियों पर रोक लगाना: लंबे समय या स्थायी प्रभाव के साथ इंक्रीमेंट रोक देना।

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