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रेलवे टेंडर में बड़ा खेल? तकनीकी मूल्यांकन के नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को फायदा पहुंचाने का आरोप!

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल द्वारा जारी एक बड़े सफाई व्यवस्था के टेंडर में गंभीर वित्तीय और तकनीकी अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। मामला GeM (Government e-Marketplace) पर जारी बिड संख्या GEM/2026/B/7435981 से जुड़ा है। जो रतलाम की रेलवे कॉलोनियों से डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, ड्रेनेज सफाई और सेप्टिक टैंक की गाद निकालने (Cleaning and Sanitation Work) के लिए निकाला गया है। इस टेंडर की अनुमानित लागत ₹3,06,33,663.37 (लगभग 3.06 करोड़ रुपये) है।

इस मामले में नया मोड़ तब आया जब फाइनेंशियल इवैल्युएशन के बाद D N ENTERPRISES नामक फर्म को L1 कम बोली लगाने वाली फर्म घोषित किया गया है। आरोप है कि रेलवे के संबंधित अधिकारियों ने तकनीकी मूल्यांकन (Technical Evaluation) के दौरान नियमों को दरकिनार करते हुए इस फर्म को योग्य (Eligible) घोषित कर दिया, जबकि यह फर्म टेंडर की अनिवार्य शर्तों को पूरा ही नहीं करती है।

क्या हैं टेंडर की अनिवार्य शर्तें और कहां हुआ ‘खेल’?:- टेंडर दस्तावेज के Buyer Added Bid Specific ATC (clause 1.1) के अनुसार, भाग लेने वाली एजेंसी के पास पिछले तीन वित्तीय वर्षों में समान प्रकृति के कार्य का न्यूनतम 35% मूल्य का अनुभव प्रमाण-पत्र होना अनिवार्य था।

टेंडर शर्तों के मुताबिक “समान कार्य” का अर्थ स्पष्ट रूप से निम्नलिखित था: :- रेलवे स्टेशनों, ट्रेनों, ट्रेन मेंटेनेंस डिपो, बस डिपो या एयरपोर्ट की क्लीनिंग/हाउसकीपिंग। अथवा किसी केंद्र/राज्य सरकार या PSU संगठन के तहत आने वाले नगर निकाय क्षेत्रों/कॉलोनियों की सफाई का कार्य।

गंभीर आरोप:-  सूत्रों और प्राप्त जानकारी के अनुसार, तकनीकी मूल्यांकन के दौरान नियमों के विपरीत जाकर L1 फर्म (D N ENTERPRISES) को क्वालिफाई कर दिया गया। जिसके पास टेंडर में मांगी गई ‘समान प्रकृति’ (Similar Nature) के कार्य का कोई वैध अनुभव नहीं है। नियमों के मुताबिक ऐसी फर्म को तकनीकी रूप से अयोग्य (Disqualified) किया जाना चाहिए था। लेकिन उन्हें सीधे फाइनेंशियल बिड (Financial Bid) रेस में शामिल कर न केवल योग्य बनाया गया बल्कि वे अब L1 आ चुके हैं।

निष्पक्ष दाताओं में भारी आक्रोश, पारदर्शिता पर उठे सवाल: इस टेंडर प्रक्रिया में शामिल अन्य वैध और अनुभवी ठेकेदारों में इस पक्षपातपूर्ण निर्णय को लेकर भारी आक्रोश है।

नियमों की अनदेखी :- जब रेलवे बोर्ड के स्पष्ट निर्देश हैं कि बिना आवश्यक अनुभव के किसी भी फर्म को तकनीकी रूप से योग्य नहीं ठहराया जा सकता। तब रतलाम रेल मंडल में इस नियम को क्यों शिथिल किया गया और D N ENTERPRISES को किस आधार पर आगे बढ़ाया गया?

शिकायत की तैयारी :- पीड़ित पक्षों द्वारा इस मामले की शिकायत रेलवे बोर्ड, महाप्रबंधक (GM) पश्चिम रेलवे और केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) को सौंपने की तैयारी की जा रही है। ताकि टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता बहाल हो सके।

मुख्य बिंदु जिन पर उठ रहे हैं सवाल:- अपात्रता को पात्रता में कैसे बदला? जिस फर्म के पास समान कार्य का अनुभव नहीं था। उसके तकनीकी दस्तावेजों को किस आधार पर मंजूरी दी गई?

स्क्रूटनी कमेटी की भूमिका:-  टेंडर प्रकिया से वंचित बाकी सभी फर्म के ऑनर ने सवाल उठाए गए कि क्या तकनीकी मूल्यांकन करने वाली समिति ने दस्तावेजों की ठीक से जांच नहीं की। अथवा किसी दबाव में आकर D N ENTERPRISES को हरी झंडी दिखाई गई? इस मामले में फर्म ने डीआरएम को लिखित शिकायत देने का फैसला लिया जबकि कुछ ने तो अपनी शिकायत दर्ज भी करवा दी।
बता दें कि सफाई का काम रेलवे अस्पताल के अधीन है। इसलिए अस्पताल प्रबंधन का इसमें सीधा हस्तक्षेप है। इस मामले में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक राजेश कुमार बेन को फोन लगाकर उनका पक्ष जानना चाहा। लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

राजस्व को नुकसान का खतरा:-बिना अनुभव वाली फर्म को इतने संवेदनशील और बड़े कार्य का जिम्मा मिलने से रेलवे कॉलोनियों की स्वच्छता व्यवस्था चरमरा सकती है।
इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और तकनीकी रूप से अपात्र फर्म को तत्काल रेस से बाहर कर टेंडर प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ री-इवैल्युएट किया जाना चाहिए।

ये फर्म थी टेंडर प्रकिया में शामिल:- टेंडर प्रकिया में एनाब्लेड प्राइवेट लिमिटेड, बी.आर. & कंपनी, आपके उद्यम, गतिशील उद्यम, गणेश प्रसाद सिंह, जियोग्रेविटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, वैश्विक उद्यम, ग्रुप 3 लॉजिस्टिक्स, हाइड्रोल इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड, जय गंगा इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड, जय श्री बालाजी एंटरप्राइजेज, कामथीन सुरक्षा सेवा, लंबोदर मैनेजमेंट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, लक्ष्मी फर्नीचर और पेंटिंग वर्क्स, एमएस एंटरप्राइजेज, एम/एस नीलम एंटरप्राइजेज, मालवा एंटरप्राइजेज, मोहन कुमार, पुलकित एसोसिएट्स तथा शिवम कम्युनिकेशंस फर्म शामिल थे।

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