प्रमोशन का प्रशासनिक ब्लंडर: DAR झेल रहे रेलवे SSE को पहले किया प्रमोट, 24 घंटे में आदेश करने पड़े निरस्त
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। पश्चिम रेलवे के रतलाम रेल मंडल में एक ऐसा लापरवाही का मामला सामने आया है। जिसने रेलवे की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और सतर्कता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मंडल में कार्यरत सीनियर सेक्शन इंजीनियर (SSE TRD) आकाश मथुरिया को विभागीय जांच (DAR) लंबित होने के बावजूद 29 जून को पदोन्नत (Promote) कर दिया गया। लेकिन जैसे ही प्रशासन को अपनी इस गंभीर चूक का अहसास हुआ। महज 24 घंटे के भीतर 30 जून को इस पदोन्नति आदेश को आनन-फानन में निरस्त कर दिया गया।
क्या है पूरा मामला?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, SSE आकाश मथुरिया के खिलाफ पिछले कुछ समय से विभागीय अनुशासन एवं अपील नियम DAR – (Disciplinary and Appeal Rules) के तहत जांच चल रही है। रेलवे नियमों के मुताबिक, यदि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ DAR की कार्रवाई लंबित हो। तब उसका प्रमोशन तब तक रोक दिया जाता है या सीलबंद लिफाफे में रखा जाता है। जब तक कि वह जांच में निर्दोष साबित न हो जाए।
इसके बावजूद, कार्मिक विभाग के संबंधित डिलिंग क्लर्क ने मथुरिया के DAR स्टेटस को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। उनकी पदोन्नति की फाइल को हरी झंडी दे दी। परिणामस्वरुप, 29 जून को सहायक कार्मिक अधिकारी दिनेश कसेरा के हस्ताक्षरित पदोन्नति आदेश जारी कर दिए गए। इसमें एसएसई टीआरडी को टीआरडी लेवल-7 से वरि. से. इंजी. (टीआरडी) वे.रु.मान. 9300-34800-GP 4800 (लेवल-४) के पद पर पदोन्नति दी गई।
24 घंटे के भीतर मचा हड़कंप:- 29 जून को आदेश जारी होने के बाद जैसे ही यह बात रेल मंडल के उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आई। प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया। नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ती देख वरिष्ठ अधिकारियों ने तुरंत दखल दिया। इसके बाद अगले ही दिन, यानी 30 जून 2026 को एक नया आदेश जारी कर मथुरिया की पदोन्नति को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया।
क्लर्क पर गिर सकती है लापरवाही की गाज:- रेलवे के जानकारों का कहना है कि यह सीधे तौर पर मानवीय भूल और डिलिंग क्लर्क की घोर लापरवाही का मामला है। इस तकनीकी चूक के कारण रतलाम रेल मंडल की साख पर भी सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों की मानें तो जिस क्लर्क ने बिना रिकॉर्ड की ठीक से जांच किए प्रमोशन ऑर्डर तैयार किए थे। प्रशासन उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम के बाद आकाश मथुरिया को अब अपनी पदोन्नति के लिए DAR की कार्रवाई पूरी होने और उसमें क्लीन चिट मिलने का इंतजार करना होगा। लेकिन इस वाक़िए ने यह साफ कर दिया है कि मंडल में फाइलों की स्क्रूटनी (जांच) किस कदर अनदेखी की जा रही है। यह विभागीय तालमेल की कमी और गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
अनदेखी की बिंदुवार जानकारी
-चल रही थी डार्लिंग/डिसिप्लिनरी प्रोसीडिंग (DAR): आकाश मथुरिया के खिलाफ पहले से ही विभागीय जांच या डीएआर (Disciplinary and Appeal Rules) की कार्रवाई लंबित (चल रही) थी। रेलवे नियमों के मुताबिक, यदि किसी कर्मचारी पर DAR चल रही हो, तो उसकी पदोन्नति पर रोक लगा दी जाती है या उसे ‘सीलबंद लिफाफे’ में रखा जाता है।
-29 जून को पदोन्नति: संबंधित क्लर्क/प्रशासनिक स्टाफ की लापरवाही के कारण इस DAR केस को नजरअंदाज कर दिया गया। 29 जून को उन्हें प्रमोट करने के आदेश जारी कर दिए गए।
-30 जून को आदेश निरस्त: जैसे ही यह बड़ी चूक उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आई। रेलवे प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए अगले ही दिन यानी 30 जून को उनकी पदोन्नति के आदेश को निरस्त (Cancel) कर दिया।
इसके परिणाम क्या हो सकते हैं?
क्लर्क पर कार्रवाई: रेलवे में इस तरह की चूक को “गंभीर लापरवाही” माना जाता है। जिस भी क्लर्क या डीलिंग स्टाफ ने बिना DAR स्टेटस चेक किए प्रमोशन फाइल आगे बढ़ाई। उस पर गाज गिर सकती है। ऐसे मामलों में चार्जशीट दी जा सकती है।
कर्मचारी की स्थिति: आकाश मथुरिया को तब तक पदोन्नति का लाभ नहीं मिल पाएगा। जब तक कि उनके खिलाफ चल रही DAR की कार्रवाई पूरी तरह खत्म नहीं हो जाती। वे उसमें निर्दोष साबित नहीं हो जाते।
