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मुंबई में इश्कबाज़ी, इंटर जोन में दग़ाबाज़ी, रतलाम में घूसबाजी…,थम नहीं रहा रेलवे स्टेशन वाली मेडम का चार्ज वाला विवाद…, रेल संगठनों में तो मजबूरी में बने ‘बिटटू….

जलज शर्मा, न्यूज़ जंक्शन-18 
रतलाम। भले ही कोई शख़्स आगे चलकर कितना भी नेककर्मी बनें, उनके पिछले कर्म उसका पीछा नहीं छोड़ते…।
पश्चिम रेलवे से लेकर अंतर जोन स्तर पर प्रचलित रहे ‘सर’ की कहानी भी कुछ स्थाई रूप से लोगों के मानस पटल पर अंकित हो गई। इनके चिट्ठे मुंबई व अंतर जोन से निकलकर अब मंडल कार्यालय के गलियारों तक आ पहुंचे है। ऐसे में कानाफूसी कहां रुकने वाली थी। क्योंकि दो बत्ती वाले ऑफिस की गली-गली में शोले फ़िल्म वाले हरिराम नाई घुमते रहते है। कुछ चर्चे बाबा जगन्नाथ के कानों तक भी आ पहुंचे।
दरअसल ‘सर’ कभी मुंबई में अभी जो पद है, इससे एक श्रेणी छोटे पद पर थे। वहां रौबदारी इश्क (एकतरफा) के लफड़े में पड़ गए। लेकिन ऐसे मामलों में अफ़सरी रौब कहां चलता है जनाब…। इस मामले को आगे बढ़ाना चाहा, तो बात बिगड़ने लगी। शिकायतों का दौर चला तो आनन-फ़ानन तबादलें का सहारा लेना पड़ा। इन्हें रेलवे के एकांत छोर पूर्वोत्तर सीमांत पहुंचा दिया गया। वहां पद बढ़ा तो कद भी बढ़ गया। फिर क्या था, शुरू कर दी मनमानी। ‘मामूल’ के चक्कर में कॉन्ट्रैक्टर्स को परेशान करने लगे। परेशान कांट्रेक्टर्स की जमात आक्रोशित हुई तो नौबत मारामारी तक की आ पहुंची। ऐसे में रतलाम में रहे एक बड़े साहब उस समय स्ट्रेक्चर के बड़े ओहदे पर थे। उन्होंने इन ‘सर’ की दया, याचना सुनकर इन्हें रतलाम भिजवाने की जुगाड़ लगाई। रतलाम में आकर ये ‘सर’ पूरी तरह से साहब बन गए। हालांकि यहां आए तो शुरू-शुरू में जरूर बड़े बोस ने सूत-सांवल में रखा। उनसे ज्यादा कोर्डिनेशन नहीं रख पाए। लेकिन अब ‘भोले राज’ में इन्हें बड़ा घी का कड़ाव मिल गया तो इसमें खूब डुबकियां लगानी शुरू कर दी। ‘सर’ की पांचों उंगलियों घी में व सिर कढ़ाई में रहने लगा। इतना ही नहीं साहब ने अपने सरकारी बंगले पर चौथी श्रेणी के 4 कर्मचारियों को अपनी सेवा-चाकरी में लगा लिया।
हे, प्रभु जगन्नाथम मोदी जी के रेल मंत्रालय में बैठे छुकछुक वाले मंत्री हर साल नए फ़रमान जारी कर रहे है। ये भी कह रहे कि छुकछुक गाड़ी को चलाने में सेफ़्टी का ध्यान रहे। लेकिन सेफ़्टी के ही कर्मचारी बेचारे कोई बंगले पर झाड़ू लगा रहा, कोई पौधों में पानी डाल रहा। कोई कपड़े धो रहा तो कोई बच्चों को स्कूल छोड़ने जा रहा। और हां…, साहबगिरी ऐसी कि बच्चा फ़ुद्दी वाला खेल खेलने जाएं। तब बिचारा कोच मजबूरी में दूसरे बच्चों को क्लब के हॉल में अंदर आने नहीं देता है।क्योंकि साहब का ऐसा फरमान है….।
अब इस माह शिवरात्रि आने वाली है। भगवान ‘भोले भंडारी’ का प्रसन्नाभिषेक कर ये ‘सर’ लोग बाबा को और खुश कर देंगे।

थम नहीं रहा रेलवे स्टेशन वाली मेडम का चार्ज वाला विवाद:- लोकसभा सांसद प्रियंका बाड्रा जिस तरह से लोकसभा में किला लड़ा रही है। इसी तरह रेलवे की प्रियंका भी किसी को पछाड़ने में कम नहीं पड़ रही है। क्योंकि इसकी लड़ाई में बचाव के लिए बड़े साहब जो साथ आ गए है। दरअसल रेलवे स्टेशन की साफ-सफाई की निगरानी का काम इसी रतलामी मेडम के जिम्मे था। अब इस काम को रेलवे अस्पताल के अधीन वाले इंपेक्टर को देखना है। इन्हें अस्पताल से तबादला कर स्टेशन भेज दिया गया है। अब बारी चार्ज देने की आई तो बखेड़ा खड़ा होने लगा। अस्पताल से तबादला होकर स्टेशन आए चीफ इंपेक्टर को असल में पूरा चार्ज चाहिए। जंग बस बस यही से शुरू हुई। आधे-अधूरे चार्ज को पूरा कर देने में मेडम ने आनाकानी की। तब मामला ‘मालवा’ के अस्थाई निवास वाले विभाग के बड़े साहब के पास गया। स्वाभाविक है साहब एक महिला कर्मचारी का ही पक्ष लेंगे न…। लेकिन जब सुनवाई नहीं हुई तो अस्पताल एरिया से आए चीफ इंस्पेक्टर ने हेल्थ ही ख़राब करने की मन में ठान ली। दो बत्ती आकर ये अस्पताल वाले इंस्पेक्टर ‘मालवा’ के अस्थाई निवासी साहब के चेंबर में जा घुसा। इसने साहब को खूब खरी-खोटी सुनाई। साफ शब्दों में कह दिया कि इंपेक्टर मेडम मुझे पेलेंट्री रजिस्टर सहित अन्य रिकॉर्ड नहीं सौंपेगी, तब तक चार्ज नहीं लूंगा।
हे प्रभु, हंसकर मिस्री बांटने से काम नहीं चलता है। स्टेशन की सफाई के रिकार्ड में ऐसा क्या घालमेल है, ऐसा काला-पीला है?। इसका चार्ज देने में आनाकानी की जा रहीं है। इसमें कहीं ठेकेदार को राहत देने का प्रयास तो नहीं है। मामले में बाबा जगन्नाथ की निगाहें भी लगी रहेगी।

कॉलोनी क्वाटर्स पर नहीं छूट रहे कब्जे, फिर शुरू होने लगा तोता-मैना का खेल:- रेलवे कॉलोनी के क्वाटर्स में अवैध कब्जे का दौर अभी थमा नहीं है। ऐसे में वहां अवैध गतिविधियों का संचालन भी कम नहीं हुआ है। साहब लक्झरी केबिन से बाहर तभी निकलते है। जब रेलवे स्टेशन पर ठेकेदार के कामों पर निगाहें मारनी हों। कर्मचारियों की समस्या से लेना-देना नहीं है। शिकायत हुई तो वर्क्स वाले इंस्पेक्टर को भेज दिया रेलवे कॉलोनी। सैलाना वाली यार्ड कॉलोनी में कुछ कार्रवाई की गई। लेकिन कब्जें तो और भी एरिया में है, जहां का साहब को भान तक नहीं है। सुनने में तो यह आ रहा है कि ओल्ड वाली रेलवे कॉलोनी के एक क्वार्टर में फिर से तोता-मैना आने-जाने लगे गए। 7 नंबर वाली इस गली को तोता-मैना ने स्थाई अड्डा बना लिया है।
हे प्रभु, जगन्नाथम पहले वाले सभी साहब कॉलोनी में लोगों की सुनवाई के लिए पहुंचते थे। लोगों की सुनवाई भी होती थी। अब कई क्वाटर्स में बाहरी लोग किराए से भी रह रहे है। कई क्वाटर्स गोदाम बना लिए गए है। वहां सीमेंट, मटेरियल व रंगाई-पुताई के सामान 12 माह रखे जाते है। ठेकेदारों को न तो किराया देना है। नहीं उन्हें बिजली का बिल भरना है। लगाए जाओ रेलवे को चुना….।

रेल संगठनों में तो मजबूरी में बने ‘बिटटू’:- जिस तरह से लोकसभा में भाजपा सांसद (कांग्रेस छोड़कर शामिल) रवनीत सिंह बिट्टू को राहुल गांधी ने गद्दार कह दिया। यह मुद्दा तो राष्ट्रीय हो गया….। लेकिन रेलवे जैसे महकमें के दोनों प्रमुख मान्यता वाले संगठनों में ऐसे कई बिट्टू इधर से उधर जा बैठे। अपने नए लीडर के साथ अपनी जेम-तेम गोटी फिट करने में जुटे है। इन सबके बीच संगठन के कुछ निचले पदाधिकारियों को तो मजबूरी में ही बिट्टू बनना पड़ा…। किसी को चुनाव का टिकिट नहीं मिला तो किसी को लीडर ने तवज्जों नहीं दी। किसी पर कुछ आरोप लगे, कोई इसलिए नापसंद कर दिए गए कि वो तो पहले वाले लीडर के खास थे…।
हे प्रभु, कुछ संगठन के लीडर तो पद के गुमान में अपने असल स्वभाव से ही गुम होने लगे है। समय किसी को नहीं छोड़ता है। कभी उन्हें भी बिट्टू बनना पड़ सकता है।

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