विजिलेंस एजेंसी पर अफसरशाही भारी….धरपकड़ के बावजूद विभागों में कार्रवाई बेअसर, कई कर्मचारी यथावत जमे, लेंड फ़ॉर जॉब वाला तो जीएम अवॉर्ड लिस्ट में
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रेलवे में भ्रष्टाचार सहित विभागीय अनियमितता पर अंकुश के लिए नियुक्त एजेंसियों की कार्रवाई अफसरशाही के चलते बेअसर साबित होने लगी है। पुख्ता सबूत के साथ विजिलेंस की धरपकड़ के बावजूद कर्मचारियों को विभागों में जिम्मेदार अफसरों द्वारा बचाया जा रहा है। यहीं वजह है कि विजिलेंस रिपोर्ट के बाद भी कोई बेख़ौफ़ ट्रेनों की वर्किंग कर रहा है। कोई कर्मचारी पिरियोडिकल समय पूरा होने के बावजूद यथास्थिति सेक्शन में रहकर चांदी काट रहा है। आलम यह है कि लेंड फ़ॉर जॉब वाले मामले की जांच में शामिल एक कर्मचारी को तो अब जीएम अवॉर्ड तक से पुरस्कृत करने की तैयारी चल रही है।
बता दें कि रेलवे में विजिलेंस सहित कई मामलों में सेंट्रल एजेंसी सीबीआई द्वारा भी कार्रवाई की गई है।
कार्मिक विभाग में कार्रवाई बेअसर:- बड़ा मामला कार्मिक विभाग से निकलकर आया था। जब विजिलेंस द्वारा मुख्य कार्यालय अधीक्षक हरिकृष्ण बारगे, वरिष्ठ लिपिक विनय तिवारी तथा अन्य पर कार्रवाई की थी। बाद में विभाग ने संयुक्त तबादला आदेश जारी कर बारगे का तबादला आई पास सेल से नीति अनुभाग में किया गया। वरिष्ठ लिपिक गजेंद्र सिंह छोकर का ईडी अनुभाग से ईएम अनुभाग तथा बदले में वरिष्ठ लिपिक तिवारी का ईएम अनुभाग का ईडी अनुभाग में तबादला किया गया। इस आदेश के मान से इन कर्मचारियों को अपने अनुभाग से हटकर तबादला वाले पद पर काम करना था। लेकिन वर्तमान में तीनो कर्मचारी यथास्थिति यानी अपने पूर्ववत अनुभाग में बने हुए है। विजिलेंस की कार्रवाई को ठेंगा दिखा दिया गया।
ट्रेन में विजिलेंस मामले में कार्रवाई धीमी:- इधर, ट्रेन में विजिलेंस धरपकड़ के बावजूद तीन टीटीई पर कार्रवाई प्रकिया की गति बेहद ही धीमी है।
बता दें कि गत गुरुवार रात ट्रेन संख्या 14801 जोधपुर-इंदौर एक्सप्रेस में विजिलेंस इंस्पेक्टर दिलीप जाधव व विनीत जैन ने कोच में टीटीई (सीटीआई) एमआर सिलावट, कृष्णा व मुनीश मीणा से पूछताछ कर केश की जांच करना चाही। लेकिन टीटीई मुनीश मीणा सहित दो अन्य ने सहयोग करने से साफ इंकार कर दिया। तीखी बहस के बाद विजिलेंस इंस्पेक्टर और टीटीई के बीच झूमाझटकी शुरू हो गई। बात बढ़ने पर विजिलेंस इंस्पेक्टर ने तीनों टीटीई को रतलाम नहीं उतरने दिया तथा तीनों को इंदौर ले गए। वहां पूछताछ कर लिखित प्रकरण तैयार किया गया। एक टीटीई के पास राशि कम निकली थी। अब इस मामले की पुख्ता जानकारी विभाग के अफसरों को बखूबी है। बावजूद फिलहाल कार्रवाई की गति कछुआ चाल के समान है।
यह मामला दबा नहीं कि इंदौर-पुणे एक्सप्रेस में एक और विजिलेंस जांच में अनियमितता उजागर हो गई। ट्रेन वर्किंग में कार्यरत इंदौर हेडक्वार्टर के टिकिट चेकिंग स्टाफ इमरान अली काजी, जितेंद्र उबनारे एवं विजय यादव की ड्यूटी थी। इन्हें हेड टीसी ऑफिस बड़ौदा में चेक किया गया। विजय यादव नदारत मिला। बताया गया वह सिक पर था। इमरान एवं जितेंद्र के पास एक्सिस मनी यानी रेलवे राजस्व से अधिक राशि मिली। हैरत की बात है कि ट्रेन में एक टीटीई सिक पर था। तब इंचार्ज द्वारा इसके स्थान पर अन्य टीटीई की ड्यूटी क्यों नही लगाई। दो टीटीई द्वारा ही वर्किंग करने से यात्री सेवा प्रभावित हुई होगी। मामले में विभागीय कार्रवाई सुस्त है। मामले में नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर एक विजिलेंस इंस्पेक्टर ने बताया कि दूसरे मंडल में हमारी रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होती है। रतलाम में कर्मचारियों को विभागों में क्यों बचाया जा रहा है, यह समझ से परे है। मामले में विजिलेंस प्रमुख द्वारा जल्दी ही जीएम सहित मंत्रालय में मीटिंग कर चर्चा की जाएगी।
लेंड फ़ॉर जॉब की जांच जारी और कर्मचारी पुरस्कार के दायरे में:- लैंड फॉर जॉब के मामले की जांच में रतलाम मंडल के स्टोर विभाग में कार्यरत कर्मचारी अवधेश कुमार का नाम भी शामिल है। अब इसे वेस्टर्न रेलवे मुख्यालय मुंबई में जीएम अवार्ड देने की तैयारी हो रही है। इसके लिए बाकायदा विभागवार लिस्ट जारी की गई। इसमें स्टोर विभाग में पहली पायदान पर कर्मचारी अवधेश का नाम चढ़ा है। 29 जनवरी को जीएम साहब सम्मानित करेंगे।
बता दें कि पिछले माह अवधेश सहित सीबीआई जांच में शामिल मंडल के कुछ और कर्मचारियों की जन्म दिनांक सहित अन्य जानकारियां मांगवाई गई थी।
अफसरी कार्रवाई में दबा फ़ख़रे आलम:- इधर विजिलेंस कार्रवाई के बावजूद विभागों में संबंधित कर्मचारियों पर इसका कोई असर नहीं है। दूसरी ओर अफ़सरी कार्रवाई में मुख्य कल्याण निरीक्षक व इंदौर होस्टल के इंचार्ज रहे फ़ख़रे आलम पर कुछ गलतियों की कड़ी सजा की कार्रवाई कर दी गई। कर्मचारी फ़ख़रे को पहले छह माह के लिए निलबिंत किया गया। लेकिन अगले छह माह और निलंबन बढ़ाने में अफसरों ने तमिक भी देरी नही ही।
