-वाट्सएप पर बढ़ी हाय, गुड मॉर्निंग, गुड नाइट मैसेज की संख्या, रिझाने में जुटे।
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रेलवे जेसी बैंक के आगामी चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद से मतदाताओं के मोबाइल फोन के वाट्सएप पर अचानक हाय, गुड मॉर्निंग व गुड नाइट के मैसेज मिलना शुरू हो गए है। चुनाव लड़ने वाले संभावित उम्मीदवारों द्वारा प्रचार-प्रसार के लिए अभी से सोशल मीडिया का सहारा लेना शुरू कर दिया है। संगठन के वे उम्मीदवार जो खुद का नाम तय मानकर चल रहे हैं। वे चुनावी खेल की पिच पर बल्लेबाजी करने एडवांस में जनसंपर्क के लिए भी जुट गए है।

संगठन के कुछ प्रतिनिधि अपनी उम्मीदवारी की चाह में मंडल मंत्री या आला पदाधिकारी के बीच स्वयं अपना नाम प्रपोज़ कर रहे है। कुछ निर्दलीय के लिए कमर कसे हुए है तो कुछ टिकिट न मिलने पर खेल बिगड़ने का खम्भ ठोक रहे है।
मालूम हो कि वेस्टर्न रेलवे एम्प्लाइज यूनियन के संगठन में मजबूत उम्मीदवार है। आला पदाधिकारी द्वारा अंतर्मंथन किया जा रहा। बस नामों पर मोहर लगाने की तैयारी है।
वहीं मजदूर संघ खेमें में उम्मीदवारों के नाम अभी भविष्य के पिटारे में बंद है। यूनियन के नाम उजागर होने का इंतजार है। संभवतः एक युवा तो एक अनुभवी नाम की घोषणा किए जाने की संभावना है। दोनों संगठनों की संभावित उम्मीदवारी पर पश्चिम रेलवे कर्मचारी परिषद का संगठन नज़र गढ़ाए है। परिषद एक बार फिर जातीय आधार का वोटकार्ड खेलकर सर्वाधिक वोट अपनी झोली में डालने के लिए आशान्वित है।
सूत्रों से जानकारी निकलकर आ रही है कि नामों में कुछ उम्मीदवार निर्दलीय भी मैदान में उतर सकते है।

कर्मचारी खुद के चला रहे नाम:- जेसी बैंक चुनाव के लिए मजदूर संघ से कई कर्मचारी स्वयं का नाम चलाकर माउथ पब्लिसिटी के सहारे अपनी मंशा को संगठन सहित सदस्यों के बीच पहुंचा रहे है। जबकि कुछ ऐसे भी कर्मचारी है जो स्वयं ही कहते नजर आ रहे है कि उन्होंने मंडल मंत्री को चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया। जबकि अंदरूनी तौर पर वे चुनाव के लिए अहम दावेदारी जता रहे है। ऐसा इसलिए भी कह रहे, क्योंकि उनके नाम पर यदि विचार नहीं होता है तो सार्वजनिक रूप से किरकिरी का सामना न करना पड़े।
इधर, मामले में मंडल मंत्री मनहर सिंह बारठ व अभिलाष नागर अपने-अपने संगठनों के संभावितों को साफ कर चुके है कि जो भी होगा सर्वसम्मति से तथा केंद्रीय नेतृत्व द्वारा तय किया जाएगा।
खेल बिगाड़ने को तैयार है, बस नाम का इंतजार:- चुनाव लड़ने की आस में संगठनों में कुछ लीडर हर हाल उम्मीदवारी चाहते है। सफल न होने पर वे अपने ही संगठन का चुनावी खेल बिगड़ने की रणनीति के जुटे है। रतलाम शहर के अलावा दाहोद, उज्जैन, इंदौर, महू, चित्तौड़गढ़ के ये लीडर ‘इस बार नहीं तो कभी नहीं’ का अवसर मान रहे है। इसलिए संगठनों के लिए इस बार सर्वसम्मति या संभावित वोटर संतुलन को इग्नोर करना भारी भी पड़ सकता है।
