Logo
ब्रेकिंग
धामनोद के अर्जुन ने पहली बार में लक्ष्य भेदा....NEET-2026 में 581अंक हासिल कर बढ़ाया जिले का गौरव, प... ​रतलाम: रेलवे कॉलोनी में विक्षिप्त युवक का उत्पात, परेशान रहवासियों ने पकड़कर GRP के सुपुर्द किया तेज बारिश ने हजारों यात्रियों को ट्रेनों में फंसाया....रेल यातायात ठप, बामनिया में हंगामा, नामली में... नशे से दूरी जरूरी.....सेंट स्टीफन बीएड कॉलेज में नशामुक्ति पर परिचर्चा: विद्यार्थियों ने लिया नशे से... रेलवे बोर्ड का बड़ा अलर्ट: स्टेशनों पर छात्रों की हलचल और दिल्ली जाने वाली भीड़ पर पैनी नजर रखने के ... 'कुंभकर्णी बाबू से जवाब तलबी' .... यह सोता रहा और छूटने लगी थी ट्रेनें, यात्रियों ने तोड़ा था काउंटर... न्यूज़ जंक्शन-18 ख़बर का असर शुरू.... ट्रेनों की गति बढ़ाने की कवायद, 300 से अधिक अनुपयोगी स्टॉपेज हों... ​ WREU की ऐतिहासिक और अभूतपूर्व सफलता: सेवानिवृत्ति से ठीक 24 घंटे पहले लोको पायलट राकेश पुरोहित को ... ऐसी भी बड़ी कार्रवाई.....कर्मचारियों पर सख्ती बरतने वाले पूर्व सहायक कार्मिक अधिकारी पर गिरी गाज: अनि... रेल कर्मचारियों के लिए वेस्टर्न रेलवे एम्प्लॉईज यूनियन की पहल, यूनियन कार्यालय में निशुल्क ITR फाइलि...

ट्रेंडर नियमों के ट्रैक पर वर्क प्रकिया बेपटरी….रेलवे में चुनिंदा फर्म को ही काम…? घालमेल भी ऐसी कि कोई पकड़ ही नहीं सके

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रेलवे में निर्माण सहित अन्य तमाम कामों की ट्रेंडर प्रकिया भले ही नियमों के दायरे में रखे जाने के दावे है। लेकिन इन्हीं नियमों की आड़ में चहेती ठेकेदार फर्म को यदि उपकृत करना हो। तब अपने प्रभाव व गोपनीयता के आड़ में अपनी करतूतों को अमलीजामा पहनाने में जिम्मेदार अफ़सर को कोई रोक नहीं सकता। सवाल यह है कि कागज़ या सिस्टम में सबकुछ दुरुस्त होने पर भी किसी एक ही फर्म या ठेकेदार को काम देने में जिम्मेदार कैसे सफल हो रहे है।
हाल ही में रतलाम व उज्जैन रनिंग रूम की ट्रेंडर प्रकिया में भी यहीं अंनदेखियां उभरकर आई है। इसे लेकर चल रही चर्चाओं को इसलिए भी बल मिल रहा है कि संबंधित फर्म रतलाम व उज्जैन रनिंग रूम का ठेका पा लिया। अन ठेकेदार खुले दावे कर रहे है कि इंदौर में भी उनकी ही फर्म को ठेका दिया जाएगा।
बता दें कि पिछले दिनों लोको पायलट व गार्ड के रनिंग रूम के लिए रेलवे के टीआरओ विभाग ने सीनियर डीईई टीआरओ महेश कुमार की देखरेख में टेंडर निकले। इसमें मालवा इंटरप्राइजेज के नाम 3 करोड़ 33 लाख रुपए तकरीबन का ठेका हुआ है। इसी फर्म के नाम उज्जैन रनिंग रूम का भी ठेका हुआ। जबकि इसी फर्म का चित्तौड़ स्टेशन के रनिंग रूम का भी ठेका है। वहां भारी खामियों के चलते फर्म के हर बिल में बड़ी राशि की पेनल्टी लगाई गई। तत्कालीन जीएम ने वहां निरीक्षण के दौरान नाराजगी भी जताई थी। सीसीटीसी पर कार्रवाई में स्वेच्छा स्वरूप सेवानिवृत्ति दिलवाई गई थी। बावजूद फर्म को दंडित (टर्मिनेट) न कर उल्टा टेंडर में शामिल होने का मौका देकर दे दिया गया। ऐसे में यहां कार्यरत ओहदेदार अफ़सर्स की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े होने लगे है।

टेंडर में चार फर्म के बीच प्रतिस्पर्धा, लिकेज हुई ऊंची दर? :- रतलाम रनिंग रूम को लेकर हुए टेंडर की प्रकिया भले ही नियमों के दायरे में होने की बात कहीं जा रही है। लेकिन संबंधित विभाग ने चहेती फर्म को लाभ दिलाया, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता हैं। दरअसल चार फर्म ट्रेंडर प्रकिया में शामिल हुई थी। ऊंची दर में मालवा इंटरप्राइजेज व डीएन इंटरप्राइजेज के बीच टेंडर टाई ओपन हुआ था। लेकिन जेम पोर्टल के सिस्टम के मुताबिक मालवा इंटरप्राइजेज को टेंडर का लाभ दिया गया। अब इस बात के भी चर्चे आम हैं कि अधिकारी स्तर पर टेंडर दर की गोपनीय सूचना फर्म को दी गई होगी। वरना एक ही फर्म का रतलाम के अलावा उज्जैन का भी ठेका हुआ। इतना ही नहीं, चित्तौड़ रनिंग रूम के अलावा रतलाम में मालवा रेस्ट हाउस का भी टेंडर इसी फर्म के नाम चल रहा है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.