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संदेह के घेरे में कार्रवाई….रेल टिकिट बुक होने के वक्त ही उजागर हो गया था फर्जीवाड़ा, फिर कार्रवाई के लिए दो माह यात्रा का इंतज़ार करते रहे?

न्यूज़ जंक्शन-18

रतलाम। देवास से लोनावाला के बीच यात्रा कर रहे 150 से अधिक विद्यार्थियों पर बिना वैध रियायती प्रमाणपत्र के नाम पर रेलवे के जिम्मेदारों ने भले ही एक लाख रुपए से अधिक की जुर्माना कार्रवाई का तमगा अपने नाम कर वाहवाही लूटी। लेकिन रेलवे सूत्र इस कहानी को ‘प्रि एक्शन प्लान’ से जोड़कर देख रहे है। बात यहां तक उड़ रही है कि दो माह पूर्व जिस दिन एजेंट के माध्यम से टिकिटों की बुकिंग हुई। तभी देवास रिजर्वेशन सुपरवाइजर को इसकी भनक लग गई थी। उस दौरान इस संबंध में मंडल के अधिकारियों को अवगत भी कराया गया। लेकिन एजेंट पर उस वक्त कार्रवाई न करते हुए बच्चों की यात्रा के दिन का इंतजार किया जाता रहा। यदि ऐसी कार्रवाई पहले ही कर ली जाती तो वैधानिक अधिकृत टिकिट बुक होते या अन्य यात्रियों को यात्रा का लाभ मिल सकता था।

बता दें कि विभिन्न श्रेणियों के लिए रियायती टिकट की सुविधा में रेलवे द्वारा विद्यार्थियों के लिए भी रियायती प्रमाण-पत्र के आधार पर किराए में छूट दी जाती है। बड़ी बात है कि एजेंट इन बच्चों के लिए आवेदन पाने तथा टिकिट बुक कराने में भी सफल रहा।

3 अगस्त को बुक हुए टिकिट:- ट्रेन में जितने भी विद्यार्थी सफर कर रहे थे, वे देवास के एक प्रतिष्ठित स्कूल के है। पूरी कार्रवाई में इस स्कूल का उल्लेख नहीं किया गया। ऑनलाइन रिकॉर्ड के मुताबिक यात्रा के लिए एजेंट के माध्यम से 3 अगस्त को 8.20 बजे टिकिट बुक हुए है। सूत्र बता रहे हैं कि जब टिकिट बुक हुए तो रिजर्वेशन सुपरवाइजर को विद्यार्थियों के वैध रियायती प्रमाण पत्र में स्कूल का नाम दर्ज होने पर शक हुआ। तब सुपरवाइजर ने निजी परिचय के आधार पर स्कूल स्टाफ को फोन पर सूचना भी दी थी। हालांकि बात यह भी सामने आई कि स्कूल प्रबंधन द्वारा यह मानने से इंकार कर दिया कि उनके स्कूल के विद्यार्थियों के टिकिट है।

मंडल के जिम्मेदारों को पहले से ही सूचना:- जिस दिन विद्यार्थियों के टिकिट बुक हुए, उसी वक्त रिजर्वेशन सुपरवाइजर द्वारा मंडल के अधिकारी को अनियमितता से अवगत करवा दिया गया था। इसके बावजूद टिकिट निरस्त की कार्रवाई नहीं की गई। बल्कि यात्रा तिथि का इंतजार कर ट्रेन में ही जुर्माना वसूले जाने की प्लानिंग बनाई गई। सवाल यह भी है कि यदि पूर्व में ही टिकिट निरस्त हुए होते तो दोबारा ये ही टिकिट वैध तरीके से बनते, या फिर 150 से अधिक दूसरे यात्रियों को सफल का लाभ मिल सकता था। आशंका जताई जा रही कि राजस्व वसूली की आड़ में अवॉर्ड पाने की प्लानिंग बनाई गई होगी।

यह था मामला:- 2 अक्टूबर 2025 को गाड़ी संख्या 22944 इंदौर-दौंड एक्सप्रेस में देवास से लोनावला तक 150 से अधिक छात्र बिना वैध रियायती प्रमाण-पत्र के यात्रा करते हुए पकड़े गए थे। बताया गया कि गुप्त सूचना के आधार पर वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्रीमती हिना केवलारामानी के निर्देशन में विशेष जांच टीम का गठन किया गया। इसमें मंडल वाणिज्य प्रबंधक राजेश मथुरिया, सहायक वाणिज्य प्रबंधक राजेश तन्ना, मुख्य वाणिज्य निरीक्षक मिक्की सक्सेना, वाणिज्य अधीक्षक अख्तर व अमित मसीह सहित 10 सदस्यीय स्क्वाड और आरपीएफ स्टाफ शामिल थे। योजनाबद्ध तरीके से रतलाम स्टेशन से ट्रेन के प्रस्थान के बाद टीम ने सभी शयनयान कोचों की जांच की गई। जांच के दौरान टूर ऑर्गनाइजर से रियायत-पत्र एवं वैध यात्रा प्रमाण मांगा गया, लेकिन वह प्रस्तुत करने में असमर्थ रहा। पूछताछ में ऑर्गनाइजर ने स्वीकार किया कि टिकट एक एजेंट के माध्यम से तैयार करवाए गए थे। ट्रेन में कुल 152 छात्रों से रेलभाड़ा वसूला गया तथा टूर ऑर्गनाइजर से 1,17,040 रुपए का जुर्माना वसूल किया गया। मामले में रेलवे जनसपंर्क विभाग के पीआरओ खेमराज के माध्यम से तमाम सूचना जारी की गई थी।

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