विजिलेंस प्रकरण की सजा पूरी?… टीटीई को 9 माह बाद दी ट्रेन में वर्किंग, लगाई साबरमती एक्सप्रेस में ड्यूटी
-विवादों में घिरे टीटीई बैरवा, सिद्दीकी के बाद विभाग ने दी रावत को ट्रेन की ड्यूटी।
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। जनवरी 2025 में विजिलेंस केस में घिरे तथा बाद में प्रशासनिक तौर पर दंडित होने वाले टीटीई अरविंद रावत को वाणिज्य विभाग ने दोबारा ट्रेन में डयूटी की मंजूरी दे डाली है। साबरमती एक्सप्रेस में ड्यूटी मिलने के बाद रावत ने सोमवार से हंसी-खुशी ट्रेन में ड्यूटी शुरू कर दी है।
बता दें कि सीटीआई स्लीपर मोहन जोशी के साथ मारपीट मामले में भी सीटीआई व डीसीटीआई को महज 13 दिन में ही ड्यूटी पर चढ़ा लिया गया।
विजिलेंस जब्त कर ले गई थी एचएचटी सेट:- टीटीई रावत वाले मामले में 16 जनवरी 2925 को कानपुर-बांद्रा एक्सप्रेस में विजिलेंस प्रकरण हुआ था। प्रकरण में एचएचटी सेट (हैंड हेल्ड टर्मिनल डिवाइस) को लेकर घोर अनियमितता उजागर हुई थी। रोस्टर में इस ट्रेन में अरविंद रावत, रंजीत माने व नुरुद्दीन सि्द्धिकी की ड्यूटी थी। इस दौरान विजिलेंस ने ट्रेन में अचानक जांच की थी। तब सूचना निकलकर आई थी कि टीटीई रावत ट्रेन में अनुपस्थित पाया गया था। टीटीई रंजीत की जेब से 5400 रुपए तथा सिद्धिकी के पास 3200 रुपए निकले थे। जांच में यह आरोप लगाया गया था कि ट्रेन में अनुपस्थित टीटीई रावत अपने घर उत्तराखंड गया था। बावजूद इसका एचएचटी सेट अन्य टीटीई रंजीत के पास था। रावत के नाम से वह इसे ऑपरेट कर रहा था।जबकि अपने बचाव में रावत ने कहा था कि उसका एचएचटी सेट उसके पास ही था। वह ट्रेन में ही ड्यूटी कर रहा था। रिपोर्ट आने के बाद रावत को बतौर प्लेटफॉर्म ड्यूटी से दंडित किया गया था। 9 माह बाद इसे दोबारा ड्यूटी दी गई।
कड़ी सजा के प्रावधान:- रेलवे में अनुशासनहीन के चलते कड़ी करवाई के प्रावधान है। सीटीआई स्लीपर मोहन जोशी मामले में यदि समझौता या सांठगांठ न हुई तो ऐसी ही कार्रवाई संभावित है।
इस प्रकरण में यह निकलकर आया कि प्रशासनिक व्यवस्था के तहत स्पष्टीकरण मांगने पर यह विवाद केंद्रीत हो गया। आरोप है कि सीटीआई आरयू सिद्दीकी ट्रेन में अपसेन्ट रहे थे। वही सिद्दीकी व डिसीटीआई विजेंद्र बैरवा द्वारा बगैर सूचना के ड्यूटी एक्जेस्टमेंट किया गया। बैरवा की सीटीआई ऑफिस तलब कर इसका स्पष्टीकरण मांगा गया। तब आवेश में आकर बैरवा द्वारा सीटीआई स्लीपर जोशी को चांटे जड़ने शुरू कर दिए।
इधर, मामले में अधिकारी द्वारा समझौता कराने के प्रयास किए जा रहे है। इसके विपरित रेलवे में ऐसी अनुशासनहीनता के चलते पूर्व में इसी विभाग में कड़ी कार्रवाई की गई थी। रेलवे के अनुच्छेद के तहत “रिमूव फ्रॉम सर्विस” तक के भी प्रावधान है।
