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पोहा, कचौरी, भजिए के रेट बढ़ाते ही चढ़ी त्यौरियां, चेहरे हुए लाल… रेलवे डीजल शेड केंटीन के मामले में रेलकर्मियों का विरोध शुरू

-केंटीन प्रबंधन के चुनाव कर पदाधिकारी बदलने को लेकर बहस छिड़ी।

न्यूज जंक्शन-18
रतलाम। रेलवे डीजल शेड में संचालित केंटीन में खानपान सामग्री के रेट बढ़ा दिए जाने के बाद कर्मचारियों द्वारा शुरू किए गए विरोध ने केंटीन प्रबंधन के तख्तापलट की मांग का रुख कर अख्तियार लिया है। कर्मचारियों के वाट्सएप ग्रुपों पर विरोध को लेकर बहस भी छिड़ गई है। बात शेड के अधिकारियों तक पहुंची। इसके बाद संगठन के पदाधिकारी भी सक्रिय हो चले है।
ऑल इंडिया ओबीसी रेलवे एम्प्लॉइज एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मांग की है कि डीजल शेड में संचालित खानपान केंटीन के संचालन सदस्यों का पांच सालों से कब्जा है। इसे आउटसोर्सिंग से संचालित किया जाए।
बता दें कि इस माह से केंटीन में खानपान सामग्रियों के दाम में बढ़ोतरी कर दी गई है।


यह भी बता दें कि जैसी बैंक की तरह ही डीजल शेड केंटीन के चुनावों में मान्यता प्राप्त संगठन का सीधा दखल नहीं है। नहीं वे शासकीय प्रकिया के तहत अपना प्रतिनिधि खड़ा कर सकते है। बावजूद अब तक इन्हीं संगठनों द्वारा कर्मचारी के रूप में अपने-अपने प्रतिनिधि चुनावों में उतारते चले आए हैं। संगठन से जुड़े कर्मचारियों के सर्वाधिक वोट होने से जीत भी इन्हीं संगठनों के किसी उम्मीदवार की होती है।

हर दो साल में केंटीन चुनाव के नियम: मामले में ऑल इंडिया ओबीसी रेलवे एम्प्लॉइज एसोसिएशन के मंडल मंत्री अजय सिंह का कहना हैं कि नियमों से डीजल शेड केंटीन के चुनाव हर दो साल में होना आवश्यक है। पिछला चुनाव पांच साल पूर्व हुआ था। इसमें वेस्टर्न रेलवे मजदूर संघ से गौरव सिंह तथा वेस्टर्न रेलवे एम्प्लाइज यूनियन से भूपेंद्र सिंह गुर्जर सदस्य चुने गए थे। इसके बाद से चुनाव नहीं कराए गए। इस अनदेखी के चलते पिछले साल कमेटी द्वारा प्रशासन से चुनाव कराने की मांग भी की थी। लेकिन दबाव के चलते प्रशासन द्वारा ध्यान नहीं दिया।

अब शेड का केंटीन ठेके पर देने मांग:-
एसोसिएशन के मंडल मंत्री सिंह ने डीआरएम को लिखित में मांग की है कि डीजल शेड केंटीन को भी बड़ौदा टीआरएस केंटीन की तर्ज पर ठेके पर दिया जाए। जब प्रशासन बार-बार केंटीन चुनाव कराने से कतरा रहे है तो इसे ठेके पर दे देना चाहिए। तांकि कर्मचारियों को गुणवत्तापूर्ण खानपान की सुविधा मिल सके।

वाट्सएप ग्रुपों में विरोध शुरू:- खानपान सामग्री के रेट बढ़ाए जाने का कर्मचारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का सहारा लेकर विरोध जता रहे है। कोई इसे तानाशाही बता रहा तो कोई पदाधिकारी की मनमानी। वहीं अधिकांश कर्मचारी चुनाव कराने की मांग पर अड़ गए है।

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