-इंदौर भेजने के बाद अब टीटीई को फिर से बुलवा लिया मूल पोस्टिंग स्टेशन रतलाम।
-कमर्शियल विभाग में रिजर्वेशन व टिकिट चेकिंग में नियम विरुद्ध आदेश का मामला।
-कार्मिक विभाग की संज्ञान के बगैर जिन कर्मचारियों को मेडिकल ग्राउण्ड पर दी थी राहत, उन्हें भेज रहे मूल स्टेशन।
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रेलवे कमर्शियल विभाग में क्लर्क की मनमानी को लेकर विजिलेंस शिकायत के बाद जांच में गड़बड़ियों के काले चिट्ठे उजागर हुए। हालांकि विजिलेंस तमाम अनियमितताओं की बारीकी से जांच में जुटी है। लेकिन विभाग द्वारा भरपाई के लिए अब उन कर्मचारियों को वापस मूल स्टेशन भेजा जा रहा है। जिनका पिरियोडिकल तबादला करने के बावजूद उन्हें मेडिकल ग्राउंड (चिकित्सकीय आधार) की आड़ में अपने घर यानी पूर्ववत स्टेशन भेज दिया गया था। मंगलवार को इसी अनियमितता के चलते रतलाम तबादलें के बाद भी इंदौर भेजे गए एक टीटीई को वापस रतलाम बुलवा लिया गया है। खास बात यह है कि इन राहत भरे आदेशों की जानकारी कार्मिक विभाग के संज्ञान में ही नहीं थी।
मालूम हो कि ट्रांसफर-प्रमोशन को लेकर की गई गड़बड़ी की आशंका में कमर्शियल क्लर्क की रेलवे बोर्ड में शिकायत की गई थी। मामला अभी भी जांच की प्रकिया में है। कमर्शियल के अलावा कार्मिक विभाग (पर्सनल सेक्शन) के डिलिंग क्लर्क को भी मुंबई विजिलेंस हेडक्वार्टर पूछताछ के लिए बुलवाया गया था। कार्मिक विभाग द्वारा पर्सनल सेक्शन के डिलिंग क्लर्क को हटाने तत्काल प्रभाव से आदेश जारी कर दिया था। लेकिन कमर्शियल क्लर्क को अभी भी यथावत रखना संदेह घेरे में व चर्चा का विषय बना हुआ है।
रतलाम में उपचार सुविधा, फिर कैसे बना लिया मेडिकल ग्राउंड का आधार
दरअसल रेलवे में हर चार साल में पिरियोडिकल तबादलें के नियम है। सेंसेटिव पोस्ट पर तो हर हाल चार साल की अवधि उपरांत तबादला बेहद ही जरूरी है। कमर्शियल विभाग में जिन चेकिंग, रिजर्वेशन सहित अन्य कर्मचारियों के तबादलें किए गए। उनमें से अधिकांश ने बच्चों की पढ़ाई सहित चिकित्सा उपचार का आधार बनाकर फिर से मूल स्टेशन पहुंचने की जुगत जमा ली। इसी तरह एक चेकिंग कर्मचारी का इंदौर से रतलाम तबादला किया गया था। इसे मेडिकल आधार की आड़ में फिर से इंदौर (घर) भेज दिया गया था। विजिलेंस शिकायत व जांच के बाद इसे अब दोबारा रतलाम बुलवाकर लीपापोती की गई। मंगलवार को सीटीआई ऑफिस में इसने अपनी आमद (ज्वाइनिंग) दर्ज कराई। यहां सवाल यह है कि रतलाम के मंडल का बड़ा रेलवे अस्पताल है। यहां उपचार की बेहतर सुविधाएं भी है। बावजूद कर्मचारी की दरख्वास्त कैसे स्वीकार कर ली गई।
तबादलें करने वाले स्वयं चार साल से ज्यादा समय से डटे
रेलवे के अन्य विभागों में हाल ही में पिरियोडिकल तबादलें किए गए। इनके रिलीविंग की कार्यवाही प्रकियाधीन है। कमर्शियल विभाग में ट्रांसफर प्रमोशन की टेबल पर क्लर्क भी चार साल से अधिक समय से कार्यरत है। विभागीय सूत्र बताते है कि यही वजह है कि कर्मचारी द्वारा आदेश व फाइलों की अफरा तफरी में महारथ हासिल कर ली। इधर, रेलवे पीआरओ खेमराज मीणा का कहना है कि नियमों से आवधिक तबादलों की प्रकिया अपनाई जाती हैं।
