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सर्जरी के बावजूद मेहरबानी बरकरार, दुरुस्त नहीं हुआ मर्ज, अभी भी जमे लल्लो-चप्पो

रेलवे में एक विभाग के पिरियोडिकल तबादलें की कवायद के बावजूद अन्य विभाग में कार्रवाई नहीं।

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। पिछले दिनों कार्मिक विभाग में पिरियोडिकल (आवधिक) तबादलें की लिस्ट जारी होने के बाद रिलीविंग व ज्वाइनिंग की प्रकिया लगभग पूरी होने को हैै। अब जिन कर्मचारियों के तबादले किए गए हैं। वे अन्य विभागों में  उन अधिकारियों को भला-बुरा कह रहे है, जिनके अधीन कई कर्मचारी लंबे समय से अभी भी जमे हुए है। वे हर नए अधिकारी के आने के बाद लल्लो-चप्पो (खुशामद) के हुनर के जरिए बेहतरी से अपना समय काटते आए है। हालांकि इसका बीड़ा कार्मिक विभाग के अधिकारियों ने उठाकर अन्य विभागों के अफसरों को भी टेबलों की सफाई के रास्ते दिखा दिए है। अब देखना यह है कि दूसरे विभागों में कितने पैमाने पर सर्जरी की जाएगी, होगी या इसे अनदेखा कर दिया जाएगा।
बता दें कि करीब दो दशक के अंतराल से कर्मचारी की सर्विस सुविधा व ठेकेदारी डीलिंग सहित अन्य सेक्शनों में जमकर अनियमिता की जा रही थी। हालांकि सेटलमेंट शाखा के शिवलाल मीणा व सीपी पांडे के सिर उस दिन बुराई आनी ही थी कि रिश्वतखोरी में उनके नाम उजागर हो गए। वरना इनके कई मार्गदर्शक व गुरु खुद लेनदेन के मामलों के बड़े खिलाड़ी रहे तथा रिटायर होकर व्यवसायिक क्षेत्र में अदद मुकाम पर जा बैठे।

कार्मिक विभाग की ये शाखाएं यथावत

कार्मिक विभाग में पिछले दिनों 15 कर्मचारियों के तबादले किए गए। लेकिन अभी भी गोपनीय विभाग में 4, पॉलिसी विभाग में 4, तथा आई पास में 3 कर्मचारी लंबे समय से एक ही टेबल पर जमे है। पॉलिसी विभाग के एक कर्मचारी का तो दो बार तबादला भी कर दिया गया था। लेकिन बाद में निरस्त कर दिया गया।

लेखा सहित अन्य विभाग कार्यवाही से अछूते

सूत्रों के मुताबिक लेखा विभाग में भी आवधिक तबादले की जानकारी खंगालने के साथ ही अफ़सर द्वारा तबादला फाइल तैयार करना शुरू कर दी है। दरअसल इस विभाग की स्थापना, व्यय अनुभाग, वित्त, ऑडिट व आपत्ति निरीक्षण, बीआर-डीआर, प्रशासन, बुक्स व बजट, ई बिल्स, पीएफ, एनपीएस, सस्पेंस शाखा में पदस्थ कर्मचारियों को 4 साल से अधिक समय हो गया है। इसमें भी वित्त तथा व्यय अतिसंवेदनशील पद है। इसमें तबादलें भी बेहद जरूरी है। इसी तरह मंडल कार्यालय के वाणिज्य विभाग, इलेक्ट्रिकल विभाग, ऑपरेटिंग विभाग, मेकेनिकल विभाग, इंजीनियरिंग विभाग के कई पदों पर कर्मचारी लंबे समय से जमे है। वाणिज्य विभाग में तबादलें से बचने के लिए एक इंस्पेक्टर तो विभाग प्रमुख की भरपूर प्रशासनिक सहायता में जुटे है। इससे पहले वे पूर्व डीआरएम के भी खास बने रहे थे। इधर, पीआरओ का खेमराज मीणा का कहना है कि समय समय पर पिरियोडिकल तबादलों की प्रकिया पूरी की जाती है।

यह भी खास:- खेल टेक्निकल असिस्टेंट से शुरू

दरअसल पिरियोडिकल तबादलों से बचाने का खेल हर विभाग में पदस्थ टेक्निकल असिस्टेंट से शुरू होता है। यह कैडर पोस्ट है। जहां नहीं है उन विभागों में एसएसई बिठा रखे हैं। वे बतौर टेक्निकल असिस्टेंट काम करते है। चेन वही से शुरू होती है। विभाग का वरिष्ठ अधिकारी इसके चश्मे से जानकारियां कार्मिक विभाग में डीलिंग क्लर्क को फारवर्ड करते है। फिर शुरू होता है आपसी तालमेल से संबंधित कर्मचारी को बचाने या हटाने का खेल। पोस्टिंग, ट्रांसफर व प्रमोशन की लिस्ट में संबंधित कर्मचारियों के नाम आने पर विभागों के टेक्निकल असिस्टेंट इन्हें तलब कर लेते है। तबादलों के मामलों में दूर स्टेशन पर भेजने का भय बताकर इन्हें साधने के प्रयास में जुट जाते है। इस खेल से अधिकारी भी कई बार अनभिज्ञ रहते है। क्योंकि अधिकारी के लिए हर कर्मचारी से जानकारी लेना संभव नहीं रहता हैं।

टेक्निकल असिस्टेंट भी 10 से 12 सालों से जमे

कर्मचारियों की तरह विभागों में पदस्थ टेक्निकल असिस्टेंट भी 10 से 12 सालों से जमे हुए है। टेक्निकल असिस्टेंट या कुछ विभागों में सालों से एसएसई भी यह काम देख रहे है। उदाहरण के तौर पर इंजीनियरिंग विभाग में 10 जेई पोस्ट है। उतने या इससे अधिक कर्मचारी विभाग में अलग अलग पद भी है। चीफ टेक्निकल असिस्टेंट (सीटीए) पीवे की पोस्ट पर संजय द्विवेदी नियुक्त है। लेकिन सालों से यहां काम एसएसई ड्राईंग सेक्शन में कार्यरत अखिलेंद्र कुमार शुक्ला जेई पद से करते आ रहे है।

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