पश्चिम रेलवे जीएम का ऐसा निरीक्षण….नियम ताक पर, लाइट इंजन में सैलून व कोच की बनाई ट्रेन, रात 10 बजे अहमदाबाद रवाना
– रतलाम से चंदेरिया तक किया विंडो ट्रेलिंग निरीक्षण।
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। सावन मास में कुछ दिनों पहले ही उज्जैन व ओंकारेश्वर तक दौरा करने के बाद पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक रामाश्रय पाण्डेय ने 23 जुलाई रविवार को एक बार फिर रतलाम से चंदेरिया तक विंडो ट्रेलिंग निरीक्षण के लिए दिन चुना। इस दौरान उन्होंने रेलवे ट्रैक, पुलों एवं अन्य रेल संपत्तियों की संरक्षा एवं सुरक्षा का जायजा लिया। रेलवे जीएम भले ही सुबह अवंतिका एक्सप्रेस से रतलाम पहुंचे। यहां से चित्तौड़ तक निरीक्षण यान से निरीक्षण भी किया। लेकिन बताया जा रहा है कि यहां से लाइट इंजिन से सैलून सहित दो कोच जोड़कर ट्रेन बनाकर वे अहमदाबाद के लिए रवाना हुए। हालांकि रेलवे में इसे मंत्रालय नीति व नए निर्देशों से परे परिचालन के लिहाज से गंभीर माना जा रहा है।

ट्रैक व प्लेटफॉर्म का लिया जायजा:- रतलाम से रवाना होकर निरीक्षण के दौरान महाप्रबंधक पांडेय ने मंदसौर एवं नीमच, रेलवे स्टेशनों का औचक निरीक्षण भी किया। उन्होंने दोनों स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म, स्टेशन परिसर, वेटिंग रूम, पे एंड यूज़ टॉयलेट, स्टेशन प्रबंधक कार्यालय तथा निर्माणाधीन फुटओवर ब्रिज सहित विभिन्न यात्री सुविधाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माणाधीन कार्यों की प्रगति की जानकारी लेते हुए उन्हें निर्धारित समयावधि में गुणवत्तापूर्वक पूर्ण करने के निर्देश दिए।
पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि महाप्रबंधक ने यात्रियों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। स्टेशन परिसरों में संरक्षा एवं सुरक्षा के साथ स्वच्छता बनाए रखने तथा यात्री सुविधाओं की नियमित निगरानी पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को यात्रियों को बेहतर एवं सुगम सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
इसके पश्चात महाप्रबंधक रामाश्रय पाण्डेय ने चित्तौड़गढ़ रेलवे स्टेशन का निरीक्षण किया। उन्होंने स्टेशन परिसर, वेटिंग रूम एवं अन्य यात्री सुविधा क्षेत्रों का जायजा लिया। इसके साथ ही उन्होंने चित्तौड़गढ़ स्थित एकीकृत क्रू लॉबी एवं रनिंग रूम का भी निरीक्षण कर वहां उपलब्ध सुविधाओं एवं व्यवस्थाओं की जानकारी ली।
महाप्रबंधक ने रनिंग रूम में उपलब्ध भोजन की गुणवत्ता एवं व्यवस्था का जायजा लिया। स्वयं भोजन भी किया।
उन्होंने क्रू लॉबी एवं रनिंग रूम में रेल कर्मचारियों के लिए उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं, स्वच्छता एवं रख-रखाव की स्थिति का निरीक्षण करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक सुधार करने तथा व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए।
महाप्रबंधक के रतलाम से चंदेरिया तक विंडो ट्रेलिंग निरीक्षण तथा मंदसौर, नीमच एवं चित्तौड़गढ़ स्टेशन निरीक्षण के दौरान मंडल रेल प्रबंधक अश्वनी कुमार सहित रतलाम मंडल के सभी शाखाधिकारी एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

बड़ी बात है कि जीएम द्वारा खानपान स्टॉल का जायजा लेते वक्त डीसीएम राजीव मथुरिया मौजूद थे। बावजूद इंजीनियरिंग विभाग के सीनियर डीईएन पीयूष पांडेय फूड स्टॉल पर रिकॉर्ड खंगालते व पैकेजिंग डेट देखते नजर आए। जबकि इंजीनियरिंग विभाग के काम अधूरे पड़े है। जो काम हो रहे है, वे गुणवत्ताहीन है। सिंहस्थ के काम भी टाइम लिमिट के मुताबिक लंबित है।
निरीक्षण पर उठे सवाल:- पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक के निरीक्षण में नियमों की दरकिनारी को लेकर सवाल भी उठने लगे है। बताया गया कि वे रविवार रात में 10 बजे रतलाम से अहमदाबाद रवाना हुए। वहां से सम्भवतः राजकोट होते हुए धार्मिक नगरी सोमनाथ तक जाएंगे।
रतलाम से रात में एक लाइट इंजन (अकेला इंजन) में विशेष सैलून (निरीक्षण कोच) सहित दो कोच लगवाए और रवाना हो गए। सवाल यह भी कि रात में कौन सा निरीक्षण रहा है, जो स्पेशल ट्रेन बनाई गई।
इधर, रेलवे बोर्ड से जुड़े जानकारों का कहना है कि बोर्ड की स्पष्ट नीति है। इसके अनुसार, वर्तमान में अधिकारी अपने सैलून का उपयोग केवल नियमित पैसेंजर ट्रेनों में जोड़कर ही कर सकते हैं। जबकि विशेष निरीक्षण के लिए पूरी ‘इंसपेक्शन स्पेशल ट्रेन’ का प्रावधान है। केवल इंजन में सैलून जोड़कर यात्रा करना रेलवे बोर्ड की इस नीति का सीधा घोर उल्लंघन माना जा रहा है।
अन्य ट्रेनों की रफ्तार पर लग सकते ब्रेक:- रात के वक्त जब रेल ट्रैक पर मालगाड़ियों और प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनों का भारी दबाव रहता है। तब एक लाइट इंजन में सैलून चलाए जाने से पूरा ‘पाथ’ एंगेज (ब्लॉक) होने की आशंका रहती है। इसके चलते इस मार्ग पर चलने वाली ट्रेनों के समय चक्र पर असर पड़ाता है।
रेलवे के इस कदम से सवाल उठ रहे हैं कि जब बोर्ड की नीतियां स्पष्ट हैं। तब शीर्ष स्तर के अधिकारी ही इनका उल्लंघन कर अन्य ट्रेनों के परिचालन को प्रभावित क्यों कर रहे हैं? फिलहाल इस मामले को लेकर रेल महकमे में चर्चा है।
इसलिए भी नियमों के विपरीत
-रेल मंत्री भी केवल दुर्घटना विशेष मौके पर ही लाइट इंजिन व सैलून से मौका स्थल तक जाते है।
-परिचालन बाधित होने के अलावा रेलवे क्रू का भी दुरुपयोग रहता है।
-अहमदाबाद के लिए रात्रि में पैसेंजर ट्रेनों का टाइमिंग था। फिर केवल इंजिन जोड़कर क्यों पाथ एंगेज किया गया।
