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नहीं दबा सकेंगे अब महिला रेलकर्मियों की आवाज़….. यौन उत्पीड़न की शिकायत मोबाइल पर ही दर्ज करा सकेंगी…. रेलवे लांच कर रहा ‘मॉड्यूल’

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। महिला रेलकर्मी अपने कार्यस्थल पर होने वाले यौन उत्पीड़न की शिकायत अब सीधे मोबाइल एप के माध्यम से रेलवे के शीर्ष मैनेजमेंट तक पहुंचा सकेंगी। रेलवे बोर्ड इसके लिए ‘सेक्सुअल हैरेसमेंट इंसीडेंट नोटिफिकेशन फार इंपावरमेंट’ (SHINE- शाइन) मॉड्यूल तैयार किया है। यह ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम (HRMS) से संचालित होगा। इस मॉड्यूल के माध्यम से सभी महिला रेलकर्मी कार्यस्थल पर होने वाले यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज करा करा सकेंगी। आठ मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रेलवे इस मॉड्यूल को लांच कर रहा है। इसके लिए रेलवे बोर्ड ने जोनल से लेकर डिवीजन स्तर पर दिशा-निर्देश जारी किया है। रतलाम मंडल में कई मामलों में समझौता प्रणाली अपनाई गई। लेकिन अब मामला गोपनीय तरीके से सीधे बोर्ड स्तर पर संज्ञान में आएगा।

ऐसे आगे बढ़ेगी शिकायत :- ‘सेक्सुअल हैरेसमेंट इंसीडेंट नोटिफिकेशन फार इंपावरमेंट’ मॉड्यूल पर मिलने वाली शिकायतें नामित कमेटी को आनलाइन चली जाएगी। इस सिस्टम में महिला रेलवे कर्मचारियों के अलावा दूसरे लोगों के लिए भी शिकायत का विकल्प मौजूद है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस माड्यूल का इस्तेमाल कर कान्ट्रैक्टर पर काम करने वाले कर्मचारी, मजदूर आदि भी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। रेलवे बोर्ड ने जोनल रेलवे और उत्पादन इकाइयों को यथाशीघ्र आंतरिक शिकायत समिति का गठन करने और यौन उत्पीड़न मामलों के निष्पादन के लिए अधिकारियों को नोमिनेट करने को कहा है। माड्यूल पर आयी शिकायतों के निष्पादन की प्रक्रिया भी एचआरएमएस पोर्टल पर उपलब्ध रहेगी।
वर्तमान में महिला कर्मचारियों को होने वाले यौन उत्पीड़न की शिकायतों को दूर करने के लिए विभागीय स्तर पर अलग-अलग कमेटियां संचालित हैं. रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि सभी जोन व इकाइयां नई सुविधा की जानकारी कर्मचारियों, विशेषकर महिला कर्मचारियों के बीच साझा करें, ताकि जरूरत पड़ने पर वे इस प्रणाली का उपयोग कर शिकायत दर्ज करा सकेंगी।

महिलाओं से समझौते कर शिकायतें लेने का दबाव:- अब तक मंडल स्तर पर कमेटियां बनी है। सेक्सुअल हैरेसमेंट की शिकायतें आने के बाद अधिकारी स्तर पर समझौते के लिए दबाव बनाया जाता है। रतलाम मंडल में विभिन्न सेक्शनों में एक साल में लगभग आधा दर्जन पीड़ित महिलाओं द्वारा शिकायतें की गई है। लेकिन इसमें पीड़ित पक्ष को समझा दिया गया। दूसरी ओर शिकायत के आरोपित पुरुषों द्वारा यह बयान में दावे किए जाते रहे कि शासकीय काम को समय पर पूरा न करने, लेट ऑफिस आने को रोकटोक के चलते उनकी शिकायत की गई। ऐसे झूठे बयानों के जरिए मामला अपने पक्ष में करने के जांच अधिकारी पर दबाव डाला जाता रहा है।

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