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34 साल 4 माह की रेल सेवा का सुखद पड़ाव….शासकीय कामों में अजय, खेलों में विजय व यारों के ठाकुर रहे

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। कोई अधिकारी यदि अपने शासकीय कामों से पहचाना जाए। यह कहने को आम बात हो सकती है। लेकिन इन कामों के अलावा खेलों में अव्वल, यारों में खास पहचान तथा अपनों व रिश्तेदारों में अपनी पैठ जमाए रखे। तब ऐसे व्यक्ति को हरफनमौला कहना अतिश्योक्ति नहीं कही जा सकती हैं।
रेलवे में विभिन्न पदों पर रहकर सीनियर डीओएम पद से रिटायर हो रहे अजय बी ठाकुर कुछ ऐसे ही व्यक्तित्व के धनी रहे है। इन्होंने रेलवे में 34 साल 4 माह की सफलतम सेवा पूरी की है। 31 अक्टूबर 2025 को ये अपने कर्तव्यों से सेवानिवृत्त होकर ये अपने सामाजिक कामों की शुरुआत करेंगे। बल्कि पारिवारिक जिम्मेदारियों के निर्वहन में बेहतर समय व्यतीत कर सकेंगे।
इनकी विभागों में मिलनसारिता का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 4 दिनों से अलग-अलग विभागों के कर्मचारियों सहित अधिकारी वर्ग द्वारा इन्हें फ़ेरवेल पार्टी दी जा रही है। फ़ोन पर दिनभर बधाई देने वालों की फेहरिस्त लंबी है।

हर बार सीनियर अफ़सर्स ने रुकवाया तबादला:- ठाकुर जब से रेल सेवा में आए है। अपने सीनियर अधिकारी के चहेते रहे है। अधिकारी को किसी भी तरह की परेशानी आती। तब वे ठाकुर को ‘हर ताले की मास्टर चाबी’ मानते हुए इन्हें वह बेहिचक काम सौंप देते थे। गारंटी से काम हो भी जाते थे। ऐसे में जब भी इनका तबादला हुआ होता तो स्वयं इनके अधिकारी इसे रुकवाने की पहल को अंजाम देने आगे आते रहे। यहीं वजह है कि इन्होंने पूरी नौकरी लगभग रतलाम रेल मंडल में ही पूरी की।

मैकेनिक से लेकर पहलवान व पुलिस मिलने को आतुर:- रेलवे में निचले पदों से नौकरी की शुरुआत कर ओहदेदार सीनियर डीओएम तक के पद पर रहते भी अजय ठाकुर पद के गुमान में अपनों से कभी गुमनाम-जुदा नहीं रहे। शहर का मैकेनिक हो, कोई व्यायामशाला का पहलवान, संचालक या फिर कोई पुलिस विभाग का हवलदार से लेकर अफ़सर। सभी इनसे मिलने को आतुर रहते आए। जीवंत संबंध के चलते सभी के काम आना व्यवहार में शामिल रहा। चाहे वह काम शहर से जुड़ा हो, शहरवासी के वीआईपी हो या किसी पुलिस थाना से जुड़ा कोई मामला रहा हो। इन्हें प्राथमिकता से हल करवाते। बल्कि मौकों पर भी पहले पहुंच जाते थे। दूसरी ओर मीडिया फ्रेंडली रिलेशनशिप का भी रेलवे को लाभ मिला। इंदौर कार्यकाल में पीआरओ के रहते पत्रकारों की समस्या का निदान ठाकुर ही करते थे। वहीं जनप्रतिनिधियों से जुड़ी समस्याएं भी इन्ही के माध्यम से निदान की जाती रही।

पारिवारिक जिम्मेदारियों की प्राथमिकता:- सामाजिक सरोकार होने के बावजूद अजय की पारिवारिक जिम्मेदारियों की प्राथमिकता बरक़रार रही। इसी के चलते माता-पिता के साथ रहते इन्होंने बच्चों की बेहतर पढ़ाई के लिए इन्हें तकनीकी सुविधाएं मुहैया कराई। बेटी मप्र लोक सेवा आयोग की परीक्षा क्लियर कर तहसीलदार पद पाने में सफल रही। बेटा तैयारियों के बाद भेल उपक्रम भोपाल में कार्यरत है।

कोरोना में रेलवे के मददगार बने, रेलकर्मियों की सेवा में सहभागी:- कोरोना काल संकट लेकर आया तब रेल प्रशासन व जिला प्रशासन के बीच सहयोगी बनकर ठाकुर ने रेलवे कर्मचारियों की सेवा का लाभ लिया। दरअसल रेलवे अस्पताल में रेमडेसिविर इंजेक्शन की मारामारी चल रही थी। तब तत्कालीन डीआरएम विनित गुप्ता की चिंता को दूर करते हुए ठाकुर ने तत्कालीन कलेक्टर गोपालचंद्र डाड से आग्रह किया। इस पर 200 रेमडेसिविर इंजेक्शन उपलब्ध करवाए गए। साथ ही विधायक रहे चेतन्य काश्यप से गुजारिश कर रेलवे अस्पताल में 40 लाख रुपए खर्च से ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करवाया गया। वर्तमान में भी प्लांट बेहद उपयोगी साबित हो रहा है।
अजय ठाकुर के दो दिन की शेष सेवा में गुरुवार को कमर्शियल विभाग द्वारा बिदाई दी जाए।
बता दें कि इसी विभाग में यह लंबे समय तक एसीएम इंदौर व डीसीएम रतलाम में पदस्थ रहे। ठाकुर का कहना है कि उन्हें एक साल की आखरी सेवा में डीआरएम अश्वनी कुमार का बेहतर सहयोग रहा है। सौम्य व्यक्तित्व के चलते डीआरएम ने मंडल में बेहतर तालमेल जमाया। यहीं वजह है कि सभी स्वस्थ माहौल में रेलवे को आगे बढ़ा रहे है।

ठाकुर के मुताबिक रेलवे से ही उनकी पहचान स्थापित हुई है। इसलिए रेलवे के किसी काम को आगे भी पूरा करने में तैयार रहूंगा।
न्यूज़ जंक्शन-18 द्वारा इनके उज्जवल भविष्य की कामना करता है।

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