ट्रेन में कंडक्टर बना बजरंगी भाईजान… गुम हुए बालक के माता-पिता से मिलाने कोचों में घूमता रहा, मशक्कत के बाद मिली सफलता

-संत हिरदाराम नगर स्टेशन पर परिजनों से मिलाया। आरपीएफ के माध्यम से किया सुपुर्द।
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। ऐसी कोच कंडक्टर को गुम हुए एक बालक को माता-पिता से मिलवाने ट्रेन में ही फिल्मी बजरंगी भाईजान जैसा रोल निभाना पड़ा। बच्चा ठीक से जवाब नही दे पा रहा था। अथक प्रयासों से उज्जैन स्टेशन पर सफलता मिली। इसके बाद अगले स्टेशन पर आरपीएफ के माध्यम से बालक को सुपुर्द किया गया।
दरअसल ट्रेन संख्या 19489 अहमदाबाद-गोरखपुर में ट्रेन कंडक्टर राजेंद्र चौहान की रतलाम से बीना तक की ड्यूटी थी। कंडक्टर चौहान को चेकिंग के दौरान बी-1 कोच में एक 7 वर्षीय बालक अपने माता-पिता से बिछड़ा हुआ मिला। तब कंडक्टर द्वारा स्वयं बालक को अपने साथ लिए सभी ऐसी और स्लीपर कोच में राउंड लगाकर सभी यात्रियों से उक्त बच्चे के बारे में पूछताछ की। किन्तु किसी भी यात्री द्वारा कोई जानकारी नहीं देने पर समस्या बढ़ती गई। तब कंडक्टर चौहान द्वारा वाणिज्य नियंत्रक रतलाम को सूचना दी। फोन घनघाये तथा वाणिज्य कंट्रोल द्वारा आरपीएफ कंट्रोल रतलाम एवं वाणिज्य कंट्रोल भोपाल को अवगत कराया।

उज्जैन में माता पिता खोज रहे थे:- इधर, बच्चे के माता-पिता भी उज्जैन में पहुंचकर उसे खोज रहे थे। वे उज्जैन हेड टीटीई मोनिका चौहान के पास भी गए। उन्होंने बालक का नाम नामदेव व पिता यानी खुद नाम रंजीत सोनी निवासी झांसी दर्ज करवाया। वे सपरिवार गुजरात से सफर कर रहे थे। तभी बच्चा बिछड़ गया। उक्त बालक के बारे में सहायता मांगी। तब टीटीई मोनिका उनके साथ आरपीएफ थाने में जाकर सीसीटीवी चेक करवाए।
इधर, ट्रेन उज्जैन पहुंची तो कंडक्टर चौहान इंक्वायरी विंडो पर क्लर्क से मिलने गए। पता चला कि उक्त बालक के माता-पिता ने पहले ही पूछताछ करने के लिए संपर्क किया था। इन्क्वायरी स्टाफ के माध्यम से बालक के माता-पिता के मोबाइल नंबर लिए। वहां से नंबर लेकर चौहान ने बच्चे की बात उसके पिता से करवाई। ट्रेन का समय कम होने पर गाड़ी के अगले स्टॉपेज संत हिरदाराम नगर में उक्त बालक को आरपीएफ को सुपुर्द किया गया। मामले में वेस्टर्न रेलवे मजदूर संघ के सहायक मंडल मंत्री व टीटीई महेंद्र सिंह गौतम ने कहा कि चेकिंग स्टाफ ट्रेन में अर्निंग, ड्यूटी के अलावा यात्रियों की सहायता लिए तत्पर रहते है
