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मलाईदार ट्रेनों का तगड़ा तालमेल….लगी ड्यूटी हटवा देते है, मलाई के लिए ऐसी मिलीभगत, खूद बुक हो रहे सेटिंगबाज

-चुनिंदा टीटीई को प्रमुख ट्रेनों की वर्किंग दिए जाने से उठने लगे सिस्‍टम पर सवाल
न्‍यूज जंक्‍शन-18
रतलाम। रतलाम मंडल में ट्रेनों की वर्किंग में ऐसा क्‍या तालमेल है कि चुनिंदा टीटीई का रतलाम से लेकर मुंबई तक गहरा प्रभाव है। यहां हालात यह है कि मुंबई जाने वाली प्रमुख ट्रेनों में यदि किसी और टीटीई की ड्यूटी लगाई भी दी जाती है। तब ये मेलजोल वाले सेटिंगबाज टीटीई उन्‍हें हटवाकर स्‍वयं की ड्यूटी लगवा लेते हैं। इतना ही नहीं यदि किसी अन्‍य की ड्यूटी लगी भी। वह टीटीई ट्रेन में चला भी गया। तो विजिलेंस या सीसीएम स्‍क्‍वॉड द्वारा कैसे धरपकड़ हो जाती है। यह भी विचारणीय प्रश्न है।
इन मलाईदार ट्रेनों से अवैध कमाई की चाह में ही पिछले दिनों सीटीआई ऑफ‍िस में सीटीआई स्लीपर (ड्यूटी लगाने वाले प्रमुख) के समक्ष ही कुछ टीटीई की जमकर बहस व विवाद की स्‍थि‍ति निर्मित हुई थी। हालांकि पूर्व के सालों में भी ऐसी जोड़तोड़ होती थी। लेकिन उस दौरान अधिकारियों का खासा दखल भी था। फ‍िलहाल उच्‍च स्‍तर पर ऐसा कुछ भी प्रभाव नहीं दिखाई देने से चेकिंग ड्यूटी को लेकर फैली हुई अराजकता सवैधानिक सिस्‍टम को मुंह चिढ़ाने लगी है।
मालूम हो कि न्‍यूज जंक्‍शन-18 द्वारा जनहित सहित ट्रेनों से यात्रियों से काली कमाई के खिलाफ मुहिम चलाई है। इसे निरंतर जारी रखा जाएगा। कानपुर-बांद्रा, पश्चिम एक्‍सप्रेस तथा गरीबरथ जैसी प्रमुख मलाईदार ट्रेनों की वर्किंग में टीटीई राकेश शर्मा तथा पप्‍पू राणा की लगातार ड्यूटी लगाई जाने को लेकर दूसरे चेकिंग कर्मचारी ही मुखर होने लगे है। इन कर्मचारियों का कहना है कि पिछले छह माह के ड्यूटी रोस्टर की जांच की जाए तो अनियमितता सामने आ जाएगी। पिछले दिनों इसी बात को लेकर सीटीआई ऑफ‍िस में कुछ अन्‍य टीटीई ने आपत्ति दर्ज कराई थी।

पश्चिम एक्‍प्रेस में ही विजिलेंस केस बना था:- टिकिट चेकिंग की वर्किंग में अनियमितता की बात करें तो पूर्व में पश्चिम एक्‍सप्रेस में ही एक टीटीई का विजिलेंस केस बना था। तब भी टीटीई ने खूद पर कार्रवाई व विभागीय दंड की भी मेलजोल से भरपाई करवा ली थी। बताया जा रहा है कि करीब दशक पहले रतलाम मंडल में एक टीटीई को दिल्‍ली जा रही पश्चिम एक्‍सप्रेस में मथुरा के आसपास विजिलेंस इंस्‍पेक्‍टर वत्‍स ने ईएफटी में हैराफेरी कर वसूली से कम राशि दर्ज करने को लेकर पकड़ा था। बाद में इसका राजकोट मंडल में निचले पद ग्रुप डी में इंटरडिवीजन तबादला कर दिया था। लेकिन कुछ दिनों ग्रुप डी में काम करने के बाद इसे जूनियर टीसी बना दिया गया। इससे बड़ी बात यह है कि कुछ समय में ही टीटीई ने रतलाम तबादला करवा लिया था। यहां जूनियर टीसी रहते दोबारा उसे ईएफटी थमा दी गई। इसके बाद भी यहां संबंधित टीटीई का दो बार विजिलेंस केस बना।

जीएम दौरे के बाद कार्रवाई संभव:- आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक 16 जनवरी 2025 को हुए विजिलेंस केस में अनुपस्‍थ‍ित मिले एक टीटीई को निलंबित कर दिया गया था। इसी मामले में और भी कार्रवाई होना संभावित है। 24 जनवरी 2025 को जीएम का रतलाम मंडल दौरा है। इसमें सभी अधिकारी व्‍यस्‍त है। इसके बाद मामले को दोबारा संज्ञान में लिया जाएगा। दूसरी ओर विजिलेंस की रिपोर्ट का भी इंतजार किया जा रहा है। इसके बाद पुख्‍ता विभागीय कार्रवाई होगी। दूसरी ओर सीटीआई ऑफ‍िस में अधिकारी रिकॉर्ड की भी जांच कराएंगे। इसमें रोस्‍टर की अनुपालना न होने की स्‍थ‍िति में कुछ और जिम्‍मेदारों पर गाज गिर सकती है।

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