रेलवे टिकट बुकिंग में बड़े फर्जीवाड़े….रतलाम से दिल्ली तक हेराफेरी, निजामुद्दीन-बांद्रा ट्रेन का जनरल टिकट, 3 यात्रियों पर महज 622 रुपए दर्ज
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रेलवे के टिकट बुकिंग काउंटरों पर गड़बड़ी और हेराफेरी का मामला अब केवल रतलाम तक सीमित न रहकर देश के बड़े शहरों और मेट्रो स्टेशनों तक फैलता नजर आ रहा है।
रतलाम रेलवे स्टेशन पर चेकिंग के दौरान एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया। जिसने रेलवे की पूरी सुरक्षा व्यवस्था और टिकटिंग प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच के दौरान निजामुद्दीन से बांद्रा स्टेशन का 3 यात्रियों का बना एक टिकिट जब्त किया। इसमें प्रिंट में केवल 622 रुपए दर्ज है। मामला सीसीएम तक पहुंचा है।
टिकिट जांच जांच में खुली पोल, दिल्ली के अधिकारी नहीं दे पाए जवाब:- मंगलवार-बुधवार की मध्यरात्रि स्टेशन पर नियमित चेकिंग के दौरान चेकिंग स्टाफ ने ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों के टिकट की जांच की। उस समय प्लेटफॉर्म पर त्रिवेंद्रम एक्सप्रेस खड़ी थी। एक यात्री नीचे उतरा था। प्लेटफॉर्म पर जांच के लिए टिकिट की पूछताछ की गई। तब उससे मिले टिकिट में हज़रत निजामुद्दीन से बांद्रा टर्मिनस (VIA MTJ-BRC-ST-BSR) का सफर कर रहे तीन यात्रियों का एक टिकिट मिला। लेकिन टिकिट जांचने पर जनरल यूटीएस (UTS) टिकट पर दर्ज कुल राशि महज 622 रुपए पाई गई। इतने लंबे सफर के लिए तीन वयस्क यात्रियों का टिकट किराया वास्तविक दर से बेहद कम अंकित था। रेलवे स्टाफ के मुताबिक सुपरफास्ट ट्रेन का यह किराया प्रति यात्री 400 रुपए है। इस मान से टिकिट प्रिंट 1200 रुपए होना चाहिए।

इस संदिग्ध टिकट को देखकर रतलाम स्टाफ ने तत्काल दिल्ली तक पूछताछ की और संबंधित विभाग से जानकारी मांगी। हालांकि, इस गंभीर गड़बड़ी पर रेलवे के जिम्मेदार अधिकारी कोई ठोस जवाब नहीं दे सके और पल्ला झाड़ते नजर आए। इनके बाद स्टाफ ने रतलाम दौरे पर आए सीसीएम तथा स्कॉड को जानकारी दी। वहीं विजिलेंस भी इस त्रुटि में तह तक जांच में जुटी है।
विजिलेंस जांच में भी खुली थी गड़बड़ी, लेकिन कार्रवाई नदारद:- एक दिन पहले रतलाम स्थित टिकट बुकिंग कार्यालय पर विजिलेंस द्वारा की गई छापामार कार्रवाई में ‘केश शार्टेज’ और ‘अनकाउंटेड कैश’ बरामद हुई थी। इस खुलासे के बावजूद विभाग के रवैए में कोई सुधार नहीं आया है।
फिक्स विंडो पर तय कर्मचारी, उठ रहे सवाल:- विजिलेंस की कार्रवाई और लगातार सामने आ रही अनियमितताओं के बाद भी रोस्टर प्रबंधन में ड्यूटी फिक्सिंग को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। स्टेशन पर पहले की तरह ही चुनिंदा बुकिंग खिड़कियों (फिक्स विंडो) पर फिक्स कर्मचारी ही लगातार ड्यूटी बजा रहे हैं।
इस तरह की लगातार अनदेखी से यह अंदेशा जताया जा रहा है कि टिकट बुकिंग में चल रही इस हेराफेरी के पीछे एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है। जिसकी निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच होना बेहद जरूरी है। मामले से जुड़ी ख़बरों का ट्वीट कर रेल मंत्री के संज्ञान के लाया जा रहा है।
