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श्री गुरु तेग बहादुर शैक्षणिक विकास समिति…..46 साल की स्वस्थ शैक्षणिक परंपरा पर सवाल, अब आंतरिक कलह व शिकायतों का दौर शुरू

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। शिक्षा को लेकर श्री गुरु तेग बहादुर शैक्षणिक संस्था कभी शहर में ख्यात रही है। लेकिन अब इसका दोयम संचालन अभिभावकों  की चर्चाओं में शुमार होने लगा है। वहीं संस्था के चुनाव में आंतरिक कलह तथा अब विद्यार्थियों को दी जाने वाली शासकीय रियायतों में कटौती की शिकायतों ने सवाल खड़े कर दिए है।
बता दें कि भाजपा नेता यतेंद्र भारद्वाज ने शहर के प्रतिष्ठित इस शिक्षण संस्थान श्री गुरु तेग बहादुर एकेडमी पर विद्यार्थियों के खेल भविष्य के साथ लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए हैं। भाजपा नेता भारद्वाज ने आरोप लगाया है कि स्कूल प्रबंधन अभिभावकों से खेल सहित अन्य मदों में वार्षिक शुल्क वसूल रहा है। बावजूद बच्चों को मध्य प्रदेश शासन द्वारा आयोजित स्कूल स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने का अवसर नहीं दिया जा रहा है। इन्होंने प्रदेश के शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ आवश्यक कदम उठाने और प्रतिभावान खिलाड़ियों को उनका हक दिलाने की मांग की है।

स्कूल प्रबंधन के इतिहास में पहला मामला:- श्री गुरु तेग बहादुर शैक्षणिक विकास समिति की बात करें तो इसके संचालन इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है। जब चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद मतदान की व्यवस्था को लेकर बनी असमंजस की स्थिति बनी। इसके कारण हाल ही में निर्धारित चुनाव स्थगित करने पडे। हालांकि समिति के 46 साल के इतिहास में अब तक चुनाव नियमित रूप से होते आए हैं। लेकिन इस बार शहर से बाहर रहने वाले सदस्यों के मतदान को लेकर सदस्यों के बीच सहमति नहीं बन सकी।
चुनाव में ऐसे सदस्यों के मत किस माध्यम से लिए जाएं, इसे लेकर अलग-अलग सुझाव सामने आए। एक पक्ष ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मतदान कराने की बात कही। जबकि दूसरे पक्ष की राय थी कि संबंधित सदस्यों को डाक के माध्यम से बैलेट पेपर भेजकर मतदान कराया जाए। दोनों विकल्पों को लेकर एकमत नहीं बन पाने के कारण चुनाव प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी और अंततः चुनाव स्थगित करना पड़ा।
अब अनुपस्थित सदस्यों के मतदान की व्यवस्था को लेकर स्पष्ट निर्णय होने के बाद चुनाव की नई तारीख घोषित की जाएगी। इसके बाद समिति के नए स्थायी अध्यक्ष का चुनाव हो सकेगा।

फ़ोटो:- कार्यकारी अध्यक्ष हरजीत सिंह चावला।

तीसरे अध्यक्ष के निधन के बाद होना है चौथा चुनाव:- श्री गुरु तेग बहादुर शैक्षणिक विकास समिति शहर की प्रमुख शैक्षणिक संस्थाओं में शामिल है। समिति के गठन के बाद अब तक तीन व्यक्ति अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इनमें राजेंद्रसिंह, हरदयालसिंह और गुरनामसिंह शामिल हैं। तीसरे अध्यक्ष गुरनामसिंह के निधन के बाद समिति को अब अपना चौथा अध्यक्ष चुनना है।
इस चुनाव के संचालन की जिम्मेदारी हरजीत चावला को चुनाव अधिकारी के रूप में सौंपी गई थी। चुनाव की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई थी, लेकिन मतदान को लेकर सामने आए तकनीकी और प्रक्रियागत सवालों का समाधान नहीं हो सका। खासतौर पर शहर से बाहर रहने वाले सदस्यों के मत लेने की व्यवस्था चुनाव के लिए सबसे बड़ी अड़चन बन गई।
चूंकि समिति के सदस्यों की ओर से इस मुद्दे पर अलग-अलग राय सामने आती रही और किसी एक प्रक्रिया पर अंतिम सहमति नहीं बन पाई, इसलिए चुनाव को आगे बढ़ाने के बजाय स्थगित करने का निर्णय लेना पड़ा।

तीन स्कूलों का संचालन करती है समिति:- श्री गुरु तेग बहादुर शैक्षणिक विकास समिति के अंतर्गत शहर में तीन स्कूल संचालित किए जाते हैं। इनमें बरबड़ रोड स्थित श्री गुरु तेग बहादुर एकेडमी, शास्त्री नगर स्थित गुरु तेग बहादुर पब्लिक स्कूल तथा न्यू रोड स्थित गुरु तेग बहादुर स्कूल शामिल हैं।
<span;>समिति का शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय योगदान रहा है। ऐसे में अध्यक्ष पद का चुनाव संस्था के प्रशासनिक और आगामी संचालन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

46 साल में पहली बार टली चुनावी प्रकिया:- समिति के गठन के बाद से अब तक चुनाव की प्रक्रिया के सामने इस तरह की स्थिति नहीं आई थी। इस बार चुनाव स्थगित होने के साथ ही 46 वर्षों में पहली बार संस्था को ऐसी परिस्थिति का सामना करना पड़ा है। अब अगली तारीख तय करने से पहले अनुपस्थित सदस्यों के मतदान की प्रक्रिया को स्पष्ट करना आवश्यक होगा, ताकि भविष्य में मतदान को लेकर किसी तरह का विवाद या असमंजस न रहे।

आरटीई प्रवेश विवाद से भी चर्चा में रही थी समिति:- श्री गुरु तेग बहादुर शैक्षणिक विकास समिति इससे पहले आरटीई के तहत गरीब बच्चों के प्रवेश से जुड़े मामले को लेकर भी चर्चा में रही थी। आरटीई यानी शिक्षा के अधिकार के तहत प्रवेश के समय समिति से जुड़े स्कूलों में गरीब बच्चों के दाखिले का मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा था।
दाखिले की प्रक्रिया के बीच हाईकोर्ट से स्टे लिए जाने के बाद 72 गरीब बच्चे संबंधित स्कूल में प्रवेश से वंचित रह गए थे। इन बच्चों को मजबूरी में दूसरे स्कूलों में प्रवेश लेना पड़ा था।
बरबड़ रोड स्थित श्री गुरु तेग बहादुर एकेडमी में ही 63 बच्चे ऐसे बताए गए थे, जिनका दाखिला नहीं हो पाया था। प्रवेश नहीं मिलने के कारण इन बच्चों को अन्य स्कूलों का रुख करना पड़ा। आरटीई के इस मामले में समिति हाईकोर्ट भी पहुंची थी और दाखिले के ठीक पहले स्टे लिया गया था।
अब एक बार फिर समिति चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह संस्था के चुनाव का स्थगित होना है। चुनाव प्रक्रिया को लेकर अंतिम निर्णय होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि चौथे अध्यक्ष के निर्वाचन के लिए मतदान किस व्यवस्था के तहत कराया जाएगा।

फ़ोटो:- कोषाध्यक्ष देवेंद्र वाधवा। 

सुविधाओं के उपभोग पर बढ़ी लालसा:- दरअसल समिति में शामिल पदाधिकारियों का शहर सहित आज में प्रभाव रहता आया।।विशेष तौर पर नए सत्र के एडमिशन के समय समिति सदस्यों की खासी पूछपरख रहती आई। वहीं प्रबंधन द्वारा दी जाने वाली सुविधाएं आम सदस्यों के बीच ग्लैमर भी निर्मित करती है। वर्तमान के कार्यकारी अध्यक्ष हरजीत सिंह चावला आगे भी समिति के स्थाई पद के लिए आशान्वित है। वही संचालन से जुड़ा एक धड़ा इन्हें लेकर एकमत नहीं है। इसे लेकर आंतरिक खींचतान भी है। दूसरी ओर पूर्व अध्यक्ष के पुत्र व वर्तमान के समिति कोषाध्यक्ष देवेंद्र वाधवा स्वयं पदोन्नति चाहते है। लेकिन कार्य कुशलता व दैनिक व्यवहार को देखते ये समिति के अन्य अधिकांश सदस्यों की पसंद से परे है। यहीं वजह है कि इन्हें तकरीबन एक दशक से पद के बावजूद संचालन व्यवस्थाओं से किनारे किए हुए है।
इधर, पूरे मामले में कार्यकारी अध्यक्ष हरजीत सिंह चावला का कहना है कि चुनाव की सर्वमान्य प्रकिया को लेकर जल्दी ही फैसला लिया जाएगा। विद्यार्थियों को खेल गतिविधियों के लिए जो भी खर्च होता है। इसका भार स्वयं संस्था द्वारा उठाया जाता है।

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